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आधा दर्जन किसानों की फसल डूबी
हजारा/पीलीभीत।
Updated Mon, 31 Jul 2017 08:02 PM IST
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आधा दर्जन किसानों की फसल डूबी
- फोटो : आधा दर्जन किसानों की फसल डूबी
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बाढ़ खंड द्वारा बचाव कार्य के नाम पर की जा रही रश्म अदायगी के चलते शारदा द्वारा ग्राम नहरोसा व उसके आसपास के क्षेत्र में किया जा रहा भू-कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। 24 घंटे के भीतर आधा दर्जन ग्रामीणों की फसल लीलने के साथ ही नदी भू-कटान करते हुए कुलवा फार्म के तीन ग्रामीणों के घरों के निकट पहुंच गई है। भयभीत लोगों ने नदी को निकट आता देख अपना मकान अपने ही हाथों से तोड़ना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से बचाव कार्य में लापरवाही बरत रहे अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के साथ उनके द्वारा अभिलेखों में दर्शाए जा रहे कार्य की मौके पर जांच कराने की मांग की है।
ट्रांस क्षेत्र के नहरोसा गांव व उसके मजरा कुलवा फार्म की ओर शारदा पिछले कई दिनों से कटान करते हुए आबादी के नजदीक बढ़ती जा रही है। गांव की आबादी को कटान से खतरे की आशंका को देखते हुए हालांकि बाढ़ खंड के अधिकारियों ने पहले ही प्रस्ताव बना कर भेज दिया था, लेकिन प्रस्ताव की स्वीकृत देर से होने के कारण बाढ़ खंड के अधिकारी बचाव कार्य को गंभीरता से नहीं करा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अचानक शुरू हुए कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारी फ्लड फाइटिंग कार्य के नाम पर एक ठेकेदार के माध्यम से बचाव कार्य तो शुरू कराया, लेकिन दो दिन तक ठीक गति से काम होने के बाद से लगातार कच्छप गति से काम चल रहा है। इसके चलते बचाव कार्य से कटान नहीं रुक पा रहा है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक कटान स्थल पर बल्ली का भी अभाव है। यही नहीं मानक के अनुरूप भी कार्य नहीं हो रहा है। जिसके मुताबिक कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लोग बाढ़ खंड के अधिकारियों की भरपूर मदद भी कर रहे हैं, लेकिन कार्य में हीला हवाली के चलते उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां तक कि गांव वालों की ओर से कटान रोकने को दी जा रही पेड़ों की टहनियों व झाड़ियों तक को बाढ़ खंड के अधिकारी मंहगे दामों में खरीद नदी में डलवाने की बात कह रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि भू-कटान रोकने के लिए समय से बचाव कार्य न कराने से गांव निवासी कासिम अली, मो इस्लाम, कुलदीप सिंह, गुरनाम सिंह, गुरदीप सिंह, हरभजन सिंह, सज्जन सिंह, परमजीत सिंह आदि किसानों की गन्ना आदि की फसल निगलते हुए आबादी को आगोश में लेने के लिए तेजी से बढ़ती जा रही है। यही नहीं गांव निवासी गुरदीप सिंह, तरसेम सिह, प्यार कौर समेत तीन ग्रामीणों के पक्के आवास को भी शारदा अपने आगोश में लेने के लिए उनके मकान से चंद कदम दूर रह गई है। इससे भयभीत हो तीनों ही परिवारों ने अपनों की मदद से मकानों को खुद अपने हाथों तोड़ना शुरू कर दिया है। पीड़ित गुरनाम सिंह, गुरजिंदर सिंह ने मकान को तोड़कर उसका सामान ढोने में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं कुलवा फार्म के बूटा सिंह, पलविंदर सिंह, हरभजन सिंह के साथ-साथ यहां गुरुद्धारा सिंह सभा के भवन को भी खतरा पैदा हो गया है। नहरोसा के अलावा शारदा राणाप्रताप नगर के मुनीब गौतम, विक्रम सिंह, अरूण पाठक, इजहार आदि किसानों की भूमि को निगल कर नौकाघाट के तिराहे का वजूद मिटाते हुए गांव की ओर बढ़ती जा रही है। इससे लोग भयभीत हैं।
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मौके पर कम कागजों में अधिक हो रहा काम
हजारा। ग्राम नहरोसा प्रधान समीउद्दीन उर्फ सम्मू व गांव निवासी हाफिज मोबीन का कहना है कि बाढ़ खंड के अधिकारी मौके पर बचाव कार्य के नाम पर सिर्फ रश्मअदायगी कर रहे हैं। बल्ली पायलिंग नाम मात्र की कराई गई, लेकिन कागजों में लाखों रुपये का कार्य होना दर्शाया जा रहा है। ठेकेदार और अधिकारी दोनों का उद्देश्य गुणवत्ता के साथ बचाव कार्य करना नहीं बल्कि बचाव कार्य के नाम पर प्राप्त होने वाले धन को कागजों में व्यय दिखा बंदरबांट करना है। यदि शासन प्रशासन जांच करे तो हकीकत सामने आने पर पोल खुल जाएगी।
एसएसबी जवान, गुरुद्वारे के सेवक मदद को पहुंचे
हजारा। शारदा नदी पिछले कई दिनों से क्षेत्र में कटान कर रही है। तमाम ग्रामीणों की फसल नदी की भेंट चढ़ गई। अब घरों को भी अपने आगोश में लेने लगी है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने पीड़ितों की सुधि नहीं ली है। पीड़ितों को न तो अभी तक नदी में फसल समेत समाई भूमि का मुआवजा ही उन्हें मिल सका है और न ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने की दिशा में कोई प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इन पीड़ितों की मदद के लिए स्थानीय थाने के कुछ पुलिस कर्मी और 39 वीं वाहिनी एसएसबी मुख्यालय गदनियां के जवान मदद के लिए वहां पहुंचे हैं। इतना ही नहीं कारसेवा गुरुद्वारा महंगापुर से भी एक जत्था पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचा है।
एक ही झटके में बह गया बचाव कार्य
हजारा। बाढ़ खंड द्वारा यहां बचाव कार्य के नाम पर रश्म अदायगी के रूप में बनवाए गए कटर, स्पर भी एक ही झटके में क्षतिग्रस्त हो बह गए। इसके बाद हरकत में आए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने वहां जेई पीडथी मौर्या, राममोहन चौबे की देखरेख में बंबू कैरेट के नाम पर नदी के किनारे बांस के टुकडों को बांधकर उसमें एसी बैग लगवा रहे हैं। इस दौरान काम करा रहे ठेकेदार का मुंशी कंधई लाल गिर कर डूबने लगा जिसे मौके पर मौजूद तैराकों ने बाहर निकालकर जान बचाई।
अमरिया क्षेत्र में देवहा ने शुरू किया कटान
अमरिया। देवहा नदी ने तहसील क्षेत्र के वरा दुनवा, मझलिया, जगत आदि गांव में कटान शुरू कर दिया है। बीते 24 घंटे के भीतर नदी कई ग्रामीणों की दसियों एकड़ भूमि मय फसल लील चुकी है। किसानों का कहना है कि वह पिछले काफी समय से संभावित खतरे को देखते हुए वहां स्पर बनाने की मांग प्रशासन से करते रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते नदी द्वारा इस बार फिर तेज बहाओ के साथ कटान शुरू कर दिया है। कटान के चलते बीते 24 घंटे के भीतर गांव मझलिया निवासी इश्तियाक अहमद, नजमुददीन मलिक, अकरम मास्टर, इंतियाज अहमद, लालता प्रसाद, व बरा दुनवा निवासी, ताजुददीन मलिक, पोथी राम सहित दर्जनों किसानों की कई एकड़ जमीन कट कर नदी में समा गई है।
शारदा की भेंट चढ़ने लगे रमनगरा बुझिया में बनाए गए कटर
माधोटांडा (पीलीभीत)। क्षेत्र के रमनगरा बुझिया में गत वर्ष शारदा नदी ने कहर बरपाते हुए कई एकड़ कृषि भूमि व आबादी क्षेत्र को निगल लिया था। उस दौरान बरसात बाद बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पूरा वर्ष बीतने के बाद भी यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं करा गए। इधर अब जब शारदा नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने लगी तो बाढ़ ने रमनगरा बुझिया में भूकटान रोकने को रेत भरे बोरों से 36 कटरों का निर्माण कराया। माना जा रहा था कि इससे भूकटान रुकेगा। इधर शारदा नदी का जलस्तर रोजाना ही घटता बढ़ता रहता है। हालांकि अभी शारदा के पानी की धार तो किनारे पर नहीं आई है, इसके बावजूद डाउन स्ट्रीम में बनाए गये कटर पानी में धंसने लगे हैं। इस इलाके में शारदा ने गत वर्ष बाढ़ के दौरान गोलाई में लूप बनाकर कटान किया था। हालांकि इस वर्ष अभी बाढ़ तो नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा हैं कि बाढ़ आने पर बनाए गए कटर पानी में बह सकते हैं। जिससे यहां स्थिति संभलने के बजाए और भी बिगड़ सकती है। इधर किसानों को इस बार यह उम्मीद है कि शायद अब बाढ़ न आए, इसलिए नदी के मोहाने पर किसानों ने जो सब्जी फसलें व गन्ना बो रखा हैं, उसमें खाद पानी लगा रहे हैं। इधर जलस्तर में गिरावट के बावजूद रमनगरा में छह नंबर स्पर के डाउन स्ट्रीम में बनाया गए स्पर की नोज (स्पर का अगला भाग) का हिस्सा जिसमें जियो बेग लगाए गए थे, वह शारदा नदी की भेंट चढ़ गया। यहां कराए गए बाढ़ नियंत्रण कार्यों की स्थिति देखकर लगता है कि यदि शारदा अपने पुराने ढर्रे पर चली तो यहां स्थिति गत वर्ष की भांति भयावह हो सकती है।
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ट्रांस क्षेत्र के नहरोसा गांव व उसके मजरा कुलवा फार्म की ओर शारदा पिछले कई दिनों से कटान करते हुए आबादी के नजदीक बढ़ती जा रही है। गांव की आबादी को कटान से खतरे की आशंका को देखते हुए हालांकि बाढ़ खंड के अधिकारियों ने पहले ही प्रस्ताव बना कर भेज दिया था, लेकिन प्रस्ताव की स्वीकृत देर से होने के कारण बाढ़ खंड के अधिकारी बचाव कार्य को गंभीरता से नहीं करा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अचानक शुरू हुए कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारी फ्लड फाइटिंग कार्य के नाम पर एक ठेकेदार के माध्यम से बचाव कार्य तो शुरू कराया, लेकिन दो दिन तक ठीक गति से काम होने के बाद से लगातार कच्छप गति से काम चल रहा है। इसके चलते बचाव कार्य से कटान नहीं रुक पा रहा है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक कटान स्थल पर बल्ली का भी अभाव है। यही नहीं मानक के अनुरूप भी कार्य नहीं हो रहा है। जिसके मुताबिक कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लोग बाढ़ खंड के अधिकारियों की भरपूर मदद भी कर रहे हैं, लेकिन कार्य में हीला हवाली के चलते उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां तक कि गांव वालों की ओर से कटान रोकने को दी जा रही पेड़ों की टहनियों व झाड़ियों तक को बाढ़ खंड के अधिकारी मंहगे दामों में खरीद नदी में डलवाने की बात कह रहे हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि भू-कटान रोकने के लिए समय से बचाव कार्य न कराने से गांव निवासी कासिम अली, मो इस्लाम, कुलदीप सिंह, गुरनाम सिंह, गुरदीप सिंह, हरभजन सिंह, सज्जन सिंह, परमजीत सिंह आदि किसानों की गन्ना आदि की फसल निगलते हुए आबादी को आगोश में लेने के लिए तेजी से बढ़ती जा रही है। यही नहीं गांव निवासी गुरदीप सिंह, तरसेम सिह, प्यार कौर समेत तीन ग्रामीणों के पक्के आवास को भी शारदा अपने आगोश में लेने के लिए उनके मकान से चंद कदम दूर रह गई है। इससे भयभीत हो तीनों ही परिवारों ने अपनों की मदद से मकानों को खुद अपने हाथों तोड़ना शुरू कर दिया है। पीड़ित गुरनाम सिंह, गुरजिंदर सिंह ने मकान को तोड़कर उसका सामान ढोने में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं कुलवा फार्म के बूटा सिंह, पलविंदर सिंह, हरभजन सिंह के साथ-साथ यहां गुरुद्धारा सिंह सभा के भवन को भी खतरा पैदा हो गया है। नहरोसा के अलावा शारदा राणाप्रताप नगर के मुनीब गौतम, विक्रम सिंह, अरूण पाठक, इजहार आदि किसानों की भूमि को निगल कर नौकाघाट के तिराहे का वजूद मिटाते हुए गांव की ओर बढ़ती जा रही है। इससे लोग भयभीत हैं।
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मौके पर कम कागजों में अधिक हो रहा काम
हजारा। ग्राम नहरोसा प्रधान समीउद्दीन उर्फ सम्मू व गांव निवासी हाफिज मोबीन का कहना है कि बाढ़ खंड के अधिकारी मौके पर बचाव कार्य के नाम पर सिर्फ रश्मअदायगी कर रहे हैं। बल्ली पायलिंग नाम मात्र की कराई गई, लेकिन कागजों में लाखों रुपये का कार्य होना दर्शाया जा रहा है। ठेकेदार और अधिकारी दोनों का उद्देश्य गुणवत्ता के साथ बचाव कार्य करना नहीं बल्कि बचाव कार्य के नाम पर प्राप्त होने वाले धन को कागजों में व्यय दिखा बंदरबांट करना है। यदि शासन प्रशासन जांच करे तो हकीकत सामने आने पर पोल खुल जाएगी।
एसएसबी जवान, गुरुद्वारे के सेवक मदद को पहुंचे
हजारा। शारदा नदी पिछले कई दिनों से क्षेत्र में कटान कर रही है। तमाम ग्रामीणों की फसल नदी की भेंट चढ़ गई। अब घरों को भी अपने आगोश में लेने लगी है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने पीड़ितों की सुधि नहीं ली है। पीड़ितों को न तो अभी तक नदी में फसल समेत समाई भूमि का मुआवजा ही उन्हें मिल सका है और न ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने की दिशा में कोई प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इन पीड़ितों की मदद के लिए स्थानीय थाने के कुछ पुलिस कर्मी और 39 वीं वाहिनी एसएसबी मुख्यालय गदनियां के जवान मदद के लिए वहां पहुंचे हैं। इतना ही नहीं कारसेवा गुरुद्वारा महंगापुर से भी एक जत्था पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचा है।
एक ही झटके में बह गया बचाव कार्य
हजारा। बाढ़ खंड द्वारा यहां बचाव कार्य के नाम पर रश्म अदायगी के रूप में बनवाए गए कटर, स्पर भी एक ही झटके में क्षतिग्रस्त हो बह गए। इसके बाद हरकत में आए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने वहां जेई पीडथी मौर्या, राममोहन चौबे की देखरेख में बंबू कैरेट के नाम पर नदी के किनारे बांस के टुकडों को बांधकर उसमें एसी बैग लगवा रहे हैं। इस दौरान काम करा रहे ठेकेदार का मुंशी कंधई लाल गिर कर डूबने लगा जिसे मौके पर मौजूद तैराकों ने बाहर निकालकर जान बचाई।
अमरिया क्षेत्र में देवहा ने शुरू किया कटान
अमरिया। देवहा नदी ने तहसील क्षेत्र के वरा दुनवा, मझलिया, जगत आदि गांव में कटान शुरू कर दिया है। बीते 24 घंटे के भीतर नदी कई ग्रामीणों की दसियों एकड़ भूमि मय फसल लील चुकी है। किसानों का कहना है कि वह पिछले काफी समय से संभावित खतरे को देखते हुए वहां स्पर बनाने की मांग प्रशासन से करते रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते नदी द्वारा इस बार फिर तेज बहाओ के साथ कटान शुरू कर दिया है। कटान के चलते बीते 24 घंटे के भीतर गांव मझलिया निवासी इश्तियाक अहमद, नजमुददीन मलिक, अकरम मास्टर, इंतियाज अहमद, लालता प्रसाद, व बरा दुनवा निवासी, ताजुददीन मलिक, पोथी राम सहित दर्जनों किसानों की कई एकड़ जमीन कट कर नदी में समा गई है।
शारदा की भेंट चढ़ने लगे रमनगरा बुझिया में बनाए गए कटर
माधोटांडा (पीलीभीत)। क्षेत्र के रमनगरा बुझिया में गत वर्ष शारदा नदी ने कहर बरपाते हुए कई एकड़ कृषि भूमि व आबादी क्षेत्र को निगल लिया था। उस दौरान बरसात बाद बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पूरा वर्ष बीतने के बाद भी यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं करा गए। इधर अब जब शारदा नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने लगी तो बाढ़ ने रमनगरा बुझिया में भूकटान रोकने को रेत भरे बोरों से 36 कटरों का निर्माण कराया। माना जा रहा था कि इससे भूकटान रुकेगा। इधर शारदा नदी का जलस्तर रोजाना ही घटता बढ़ता रहता है। हालांकि अभी शारदा के पानी की धार तो किनारे पर नहीं आई है, इसके बावजूद डाउन स्ट्रीम में बनाए गये कटर पानी में धंसने लगे हैं। इस इलाके में शारदा ने गत वर्ष बाढ़ के दौरान गोलाई में लूप बनाकर कटान किया था। हालांकि इस वर्ष अभी बाढ़ तो नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा हैं कि बाढ़ आने पर बनाए गए कटर पानी में बह सकते हैं। जिससे यहां स्थिति संभलने के बजाए और भी बिगड़ सकती है। इधर किसानों को इस बार यह उम्मीद है कि शायद अब बाढ़ न आए, इसलिए नदी के मोहाने पर किसानों ने जो सब्जी फसलें व गन्ना बो रखा हैं, उसमें खाद पानी लगा रहे हैं। इधर जलस्तर में गिरावट के बावजूद रमनगरा में छह नंबर स्पर के डाउन स्ट्रीम में बनाया गए स्पर की नोज (स्पर का अगला भाग) का हिस्सा जिसमें जियो बेग लगाए गए थे, वह शारदा नदी की भेंट चढ़ गया। यहां कराए गए बाढ़ नियंत्रण कार्यों की स्थिति देखकर लगता है कि यदि शारदा अपने पुराने ढर्रे पर चली तो यहां स्थिति गत वर्ष की भांति भयावह हो सकती है।