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पहले फिल्मों में देखी थी पुलिस अब आमने-सामने मिले तो भरोसा जगा, अच्छा लगा

Tue, 29 Mar 2022 01:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 01:42 AM IST
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Had seen in films earlier, now if the police are exposed, then wake up trust
शहर कोतवाली का भ्रमण करने आए बेनहर पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। पहले तो पुलिस को फिल्मों में देखते थे पर सोमवार को कोतवाली में पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से देख्रने और समझने का मौका मिला। इसके बाद विद्यार्थी बोले- अगर हम अपनी बात को सच सच बताएं तो अपराध रुकेगा और पुलिस से मदद मिलेगी।
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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर बेनहर पब्लिक स्कूल की 19 छात्र-छात्राओं ने कोतवाली का भ्रमण करके पुलिस के शस्त्र देखे। कैसे रिपोर्ट दर्ज की जाती है? इस बात को समझा। अपराध और घरेलू हिंसा के मामलों में पुलिस से मदद लेने के लिए क्या करना चाहिए? यह बात भी विद्यार्थियों ने पुलिस क्षेत्राधिकारी सुनील दत्त से समझी। कोतवाली के इंस्पेक्टर हरीशवर्धन और रीना सिंह ने भी छात्र-छात्राओं की जिज्ञासा शांत की।
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कोतवाली में पुलिस की कार्य प्रणाली देखने के बाद अनुष्का सिंह बोलीं- फिल्मों में पुलिस देखी थी लेकिन इतने करीब से पुलिस को पहली बार देखा और बहुत अच्छा लगा। अब मैं कह सकती हूं कि पुलिस से डरने की जरूरत नहीं है। पुलिस हमारी मददगार है। घरेलू हिंसा हो या साइबर क्राइम, अपराध से जुड़े हर मामले में पुलिस हेल्प लाइन नंबर 112 और 1090 पर एक कॉल कीजिए। मदद के लिए पुलिस हाजिर होती है।
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नई बस्ती की आकर्षिका चौहान ने पुलिस से जुड़े अनुभव साझा किए। आकर्षिका बोलीं- वह पहली बार किसी कोतवाली में आईं हैं लेकिन फोन पर पहले पुलिस से संपर्क कर चुकी हैं। एक मामले में फोन पर पुलिस को सूचना दी थी तत्काल पुलिस हरकत में आई थी और न्याय मिला था। इसलिए वह कह सकती हैं कि अपनी बात बिना संकोच के पुलिस को बताने की जरूरत है। कोतवाली का भ्रमण कराने शिक्षक सुरेंद्र शर्मा, शिक्षिका संगीता मुद्गल साथ रहे।
दुष्यंत गंगवार, सूर्यांश गंगवार, शुभ प्रताप सिंह, स्मृति बंसल, गरिमा यादव, अनुरीत, प्रत्यूष पाठक, प्रखर गंगवार, प्रखर मोहन, दीपांशु भट्ट आदि ने कोतवाली का भ्रमण किया।
यह थे सवाल-जवाब
एक्सीडेंट होने के बाद घायल अपना इलाज कराते हैं तो यह बताएं कि एफआईआर कितने दिन बाद तक दर्ज हो सकती है? कशिश अवस्थी, खकरा मोहल्ला
घायल के लिए सबसे ज्यादा जरूरी इलाज कराना है। अगर संभव हो तो तत्काल घटना की सूचना 112 पर दे दें। यदि नहीं दे पाते हैं तो इलाज के बाद जितनी जल्दी हो संबंधित थाने को फोन पर लिखित रूप से अवगत कराएं। इससे न्याय पाना आसान होगा।
अगर हमने पुलिस की मदद के लिए फोन किया और अपराधियों के डर से हम उस स्थान को छोड़ देते हैं जहां से हमने फोन किया था तो क्या पुलिस की मदद मिल पाएगी? आकर्षिका चौहान, नई बस्ती
पुलिस को जिस मोबाइल नबंर से कॉल की है, पुलिस उसी नंबर पर संपर्क करेगी। आप चाहें तो अपने अगले स्थान की गूगल लोकेशन डाल दीजिए। पुलिस आप तक पहुंचेगी और आपको हर हाल में मदद मिलेगी।
मैंने सुनगढ़ी पुलिस को अपने मोबाइल के खो जाने की सूचना दी। लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। ऐसा क्यों?
सुरम्य पाराशरी, मोहल्ला शेर मोहम्मद
अगर ऐसा हुआ है तो आपको तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अवगत कराना चाहिए। आप वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर सूचना देकर फॉलोअप कीजिए। कार्रवाई अवश्य होगी। सर्विलांस के माध्यम से मोबाइल फोन तलाशा जाएगा।
सड़क हादसा हो या अपराध हम लोग इसलिए सूचना देने से परहेज करते हैं कि पुलिस सूचना देने वाले को ही परेशान करने लगती है। ऐसा क्यों? कशिश कटियार, एकता नगर
अब ऐसा नहीं है। पुलिस की कार्यप्रणाली बदल चुकी है। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाता है। पुलिस के किसी भी अधिकारी से बात कीजिए। हादसा हो या अपराध सूचना देना आपका धर्म है। आपको कानूनी परेशानी नहीं आएगी। यह एक पुरानी धारणा है कि जो सूचना देता है पुलिस उसी को परेशान करती है।
पुलिस को किसी घटना के बारे में गवाही कौन दे सकता है? आभ्या सिंह, ठेका चौकी
जिसने भी घटना होते देखी है। या फिर घटनाक्रम से जुड़ी कोई जानकारी जिसके पास है वह गवाही दे सकता है। साक्ष्य उपलब्ध करा सकता है। अपराधी को सजा दिलाने में गवाह और साक्ष्य की अहम भूमिका होती है। यदि गवाही देंगे तो पुलिस और न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
फेक आईडी से मेसेज और फोन कॉल आती हैं। बचाव कैसे करें।
जतिन कनौजिया, बल्लभनगर
सोशल मीडिया पर किसी भी अपरिचित के साथ कोई बात साझा न करें। खुद भी फेक आईडी न बनाएं। अगर कोई कॉल बार-बार आती है तो पुलिस को बताएं। पुलिस सर्विलांस के माध्यम से आरोपी को ट्रेस करेगी और कार्रवाई होगी।
दूसरे देशों से मेसेज आते हैं और ईमान जीतने की बात कही जाती है। इसमें कई बार हम फंस जाते हैं तो बचाव के लिए क्या करें? अर्जुन सिंह, वसुंधरा कॉलोनी
सबसे बड़ी बात यह है कि किसी लालच में न आएं। अगर कहीं गलती से फंस जाएं तो तत्काल पुलिस को बताएं। साइबर क्राइम रोकने के लिए टीम बनी है। पुलिस आरोपियों को पकड़ेगी।

क्या गुमशुदगी की रिपोर्ट 24 घंटे बाद दर्ज करानी होती है ? अनुष्का सिंह, गोदावरी स्टेट
नहीं ये आम जनता में फैली भ्रांति है, किसी के गुमशुदा होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। बीते दिनों में ही एक बच्चा घर से लापता हो गया था। परिजन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, कुछ घंटों में ही बच्चे को सकुशल घर वालों को सौंप दिया।

सीओ सिटी सुनील दत्त से पुलिस से जुड़े सवाल करते विद्यार्थी। संवाद

सीओ सिटी सुनील दत्त से पुलिस से जुड़े सवाल करते विद्यार्थी। संवाद- फोटो : PILIBHIT

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