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अमरगंज गोशाला: एक टिनशेड और कमरा बनाने में ही खपा दिए 11 लाख रुपये
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पीलीभीत। गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के लिए जनपद में संचालित की जा रही गोशालाओं में अव्यवस्थाओं की भरमार है। लाखों रुपये खर्च कर बनवाई जा रहीं गोशालाओं मेें भी बजट खपाने के सिवाय कुछ नहीं किया गया। चंदोई, पिपराखास, करेली की तरह ही अमरगंज गांव में बनी गोशाला इसी को बयां करती दिखी।
जनपद में संचालित 19 गोशालाओं में अधिकांश बदहाल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोवंश संरक्षण मुहिम के चलते पशुओं के खाना खर्च पर तीन साल में जनपद में डेढ़ करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जा चुके हैँ। इसके बावजूद पशुओं को सिर्फ सूखा चारा ही नसीब हो रहा। गोवंशीय पशु गंदगी में रहने को मजबूर हैं। अभिलेखों में चमचमा रही देवीपुरा, नूरपुर, बरखेड़ा, न्यूरिया हुसैनपुर, कलीनगर समेत अन्य गोशालाओं की धरातल की हकीकत पहले ही सामने आ चुकी है। जो नई गोशालाएं बनाई जा रही हैं, उनमें गुणवत्ता और संसाधनों को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
ललौरीखेड़ा के ग्राम अमरगंज में ग्राम निधि और मनरेगा से बनाई गई गोशाला में अभी पशुओं को शिफ्ट नहीं किया गया है। एक टिनशेड, जानवरों के भूसे की नांद और एक कमरा बनवाने में ही 11.20 लाख रुपये खर्च हो गए। खर्च किए गए बजट के हिसाब से काम आधा भी नहीं दिखता। गोशाला जाने का रास्ता काफी संकरा और जर्जर है। आबादी से दूर बनी इस गोशाला के चारों तरफ खेत हैं। ऐसे में गोवंशीय पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी इसे महफूज नहीं कहा जा सकता। पशुओं के भूसा-चारा डालने वाली नांद की बनावट भी सही नहीं। उसमें गहराई ही नहीं दी गई। इससे न तो ढंग से भूसा-चारा रखा जा सकेगा, न ही पशु भरपेट खा पाएंगे। बाउंड्रीवॉल भी नहीं बन सकी। अब मनरेगा से बाउंड्रीवॉल बनवाने का काम शुरू कराया गया है। इसमें भी ग्रामीण निर्माण सामग्री को लेकर सवाल उठाते रहे। एक ग्रामीण ने बताया कि रेत खरीदकर नहीं, बल्कि परिसर की जगह को खोदकर ही निकाली जा रही है। इसके गड्ढे भी जगह-जगह दिखाए। दोयम ईंट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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ग्रामीण बोले...पता नहीं कब शुरू होगी गोशाला
अमरगंज गांव के लोगों का कहना था कि गांव में छुट्टा पशुओं की संख्या अधिक है। मुख्यमंत्री जितने रुपये गोशाला पर खर्च कर रहे हैं, कभी किसी सरकार ने नहीं किए होंगे। मगर गांव की गोशाला एक साल से अधिक समय बाद भी शुरू नहीं हुई। जैसी भी बनी हो, कम से कम इसे शुरू तो कराया जाए।
सचिव ने यह कहकर साध ली चुप्पी
पंचायत सचिव से जब इस मामले में जानकारी करने को संपर्क साधा गया तो वह बजट भी नहीं बता सके। कहा कि फाइल में देखकर बता पाऊंगा। बोले- अभी हाल ही में मेरी तैनाती हुई है, फाइल कहीं और रखी है, इसलिए बाद में बताऊंगा। खामियों को लेकर भी जवाब देने के बजाय चुप्पी साध ली।
जैसा जेई साहब ने बताया वैसा कराया निर्माण
ग्राम प्रधान चमेली देवी के पति नंदराम ने बताया कि 11.20 लाख रुपये की लागत से गोशाला बनवाई गई है। गोशाला का काम पूरा हो चुका है। परिसर की बाउंड्रीवॉल के लिए मनरेगा से अलग से काम शुरू कराया गया है। कराया गया काम बिल्कुल संतोषजनक हैं। नांद आदि कमियों को लेकर बोले कि जैसा जेई साहब ने बताया, उसी हिसाब से निर्माण कराया गया है।
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जनपद में संचालित 19 गोशालाओं में अधिकांश बदहाल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोवंश संरक्षण मुहिम के चलते पशुओं के खाना खर्च पर तीन साल में जनपद में डेढ़ करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जा चुके हैँ। इसके बावजूद पशुओं को सिर्फ सूखा चारा ही नसीब हो रहा। गोवंशीय पशु गंदगी में रहने को मजबूर हैं। अभिलेखों में चमचमा रही देवीपुरा, नूरपुर, बरखेड़ा, न्यूरिया हुसैनपुर, कलीनगर समेत अन्य गोशालाओं की धरातल की हकीकत पहले ही सामने आ चुकी है। जो नई गोशालाएं बनाई जा रही हैं, उनमें गुणवत्ता और संसाधनों को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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ललौरीखेड़ा के ग्राम अमरगंज में ग्राम निधि और मनरेगा से बनाई गई गोशाला में अभी पशुओं को शिफ्ट नहीं किया गया है। एक टिनशेड, जानवरों के भूसे की नांद और एक कमरा बनवाने में ही 11.20 लाख रुपये खर्च हो गए। खर्च किए गए बजट के हिसाब से काम आधा भी नहीं दिखता। गोशाला जाने का रास्ता काफी संकरा और जर्जर है। आबादी से दूर बनी इस गोशाला के चारों तरफ खेत हैं। ऐसे में गोवंशीय पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी इसे महफूज नहीं कहा जा सकता। पशुओं के भूसा-चारा डालने वाली नांद की बनावट भी सही नहीं। उसमें गहराई ही नहीं दी गई। इससे न तो ढंग से भूसा-चारा रखा जा सकेगा, न ही पशु भरपेट खा पाएंगे। बाउंड्रीवॉल भी नहीं बन सकी। अब मनरेगा से बाउंड्रीवॉल बनवाने का काम शुरू कराया गया है। इसमें भी ग्रामीण निर्माण सामग्री को लेकर सवाल उठाते रहे। एक ग्रामीण ने बताया कि रेत खरीदकर नहीं, बल्कि परिसर की जगह को खोदकर ही निकाली जा रही है। इसके गड्ढे भी जगह-जगह दिखाए। दोयम ईंट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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ग्रामीण बोले...पता नहीं कब शुरू होगी गोशाला
अमरगंज गांव के लोगों का कहना था कि गांव में छुट्टा पशुओं की संख्या अधिक है। मुख्यमंत्री जितने रुपये गोशाला पर खर्च कर रहे हैं, कभी किसी सरकार ने नहीं किए होंगे। मगर गांव की गोशाला एक साल से अधिक समय बाद भी शुरू नहीं हुई। जैसी भी बनी हो, कम से कम इसे शुरू तो कराया जाए।
सचिव ने यह कहकर साध ली चुप्पी
पंचायत सचिव से जब इस मामले में जानकारी करने को संपर्क साधा गया तो वह बजट भी नहीं बता सके। कहा कि फाइल में देखकर बता पाऊंगा। बोले- अभी हाल ही में मेरी तैनाती हुई है, फाइल कहीं और रखी है, इसलिए बाद में बताऊंगा। खामियों को लेकर भी जवाब देने के बजाय चुप्पी साध ली।
जैसा जेई साहब ने बताया वैसा कराया निर्माण
ग्राम प्रधान चमेली देवी के पति नंदराम ने बताया कि 11.20 लाख रुपये की लागत से गोशाला बनवाई गई है। गोशाला का काम पूरा हो चुका है। परिसर की बाउंड्रीवॉल के लिए मनरेगा से अलग से काम शुरू कराया गया है। कराया गया काम बिल्कुल संतोषजनक हैं। नांद आदि कमियों को लेकर बोले कि जैसा जेई साहब ने बताया, उसी हिसाब से निर्माण कराया गया है।