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1.81 करोड़ से बनी कलीनगर गोशाला में गोवंश बदहाल
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पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोवंश संरक्षण मुहिम पर भले करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हो, मगर धरातल पर अधिकांश गोशालाओं का हाल एक जैसा ही है। देवीपुरा, बरखेड़ा, नूरपुर, न्यूरिया हुसैनपुर, चंदोई की तरह कलीनगर कस्बे में बनाई गई गोशाला में भारी गोलमाल मालूम पड़ता है। उसमें पलने वाले गोवंशीय पशु बदहाल हैं। उनके रहने, खाने से लेकर इलाज तक के पुख्ता इंतजाम गोशाला में दिखाई नहीं देते। पशु भूखे पेट गंदगी में रहने को मजबूर हैं। कस्बे के लोग गोशालाओं से अच्छी स्थिति छुट्टा पशुओं की बताते हैं।
गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के उद्देश्य से नगर पंचायत कलीनगर की ओर से कस्बे में ही 1.81 करोड़ रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया है। गोशाला में पशु रखने के लिए तीन टिनशेड, कर्मचारियों के रहने को चार कमरे, भूसे का गोदाम, बाउंड्रीवॉल बनाई गई है। हालांकि जितना बजट खर्च हुआ, उतनी लागत कराए गए निर्माण को देखकर नहीं लगती। वर्तमान में इस गोशाला में 165 गाोवंश हैं। इनकी देखरेख करने के लिए पांच लोगों का स्टाफ तैनात किया गया है। रविवार दोपहर को अमर उजाला की टीम गोशाला की हकीकत परखने पहुंची तो बाहर से देखकर ऐसा लगा कि शायद कलीनगर गोशाला में सब ठीक-ठाक मिलेगा। मगर भीतर पहुंचते ही व्यवस्थाएं देखी तो यहां भी गोवंशीय पशुओं की बदहाल तस्वीर दिखी। परिसर में साफ-सफाई नहीं थी। पशु गंदगी में ही बैठने को मजबूर थे। परिसर के एक हिस्से में तो सिर्फ कीचड़ ही थी। उसी में गोवंशीय पशु विचरण कर रहे थे। भूसे के गोदाम में भी सफाई नहीं थी। भूसे के ढेर में ही गोबर आदि तमाम गंदगी थी। उसे साफ ही नहीं किया गया था। गोवंशीय पशुओं के पीने के पानी की हौदी का हाल तो बहुत ही खराब था। उसमें काई जमी हुई थी। हौदी में भरा पानी हरे रंग का दिखाई दे रहा था। मगर मौजूद दो कर्मचारी साफ-सफाई दुरुस्त होने का ही हवाला देते रहे। जब उन्हें गंदगी दिखाई गई तो कर्मचारियों की संख्या कम होने का हवाला दे डाला। एक कमरे में थोड़ा सा हरा चारा रखा था। उसमें कीडे़ दिखाई दे रहे थे। नांद में हरा चारा नहीं था, पशुओं को सूखा भूसा ही खिलाया जा रहा था। ऐसा लगा मानों अफसरों के निरीक्षण के वक्त खुद को बचाने के लिए थोड़ा हरा चारा स्टाक कर रखा हो। कुल 165 पशुओं की गोशाला में चंद दवाएं थीं।
एक साल में मर गए 23 गोवंश, फिर भी सुधार नहीं
कलीनगर गोशाला की तस्वीर अफसर भले ही बेहतर बताएं, लेकिन यहां पर भी पशुओं के मरने का आंकड़ा कम नहीं कहा जा सकता। कर्मचारियों ने बताया कि सितंबर 2019 में यह गोशाला शुरू हो गई थी। इसमें अब तक 23 गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। हालांकि मौत की वजह को लेकर चुप्पी साध ली गई।
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अफसर-कर्मचारी बनाते रहे बारिश का बहाना
गोशाला में गंदगी समेत अन्य अव्यवस्थाओं पर नगर पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी बारिश का बहाना बनाकर साख बचाते दिखाई दिए। एक कर्मचारी ने तो गंदगी मिलने पर यहां तक कह दिया कि सुबह से दो बार सफाई हो चुकी है। इसके बाद दोबारा जानवरों ने गंदगी फैला दी। बाकी स्टाफ के आने पर फिर से सफाई कराई जाएगी।
गोशाला में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त चल रही हैं। पानी की हौदी समेत परिसर में गंदगी हुई है तो उसकी सफाई कराएंगे। गोवंशीय पशुओं को हरा चारा प्रतिदिन दिया जा रहा है। दवाएं भी पर्याप्त रहती हैं। बारिश की वजह से हो सकता है गंदगी हुई हो, सुधार कराया जाएगा। - लेखपाल भारती, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, कलीनगर
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गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के उद्देश्य से नगर पंचायत कलीनगर की ओर से कस्बे में ही 1.81 करोड़ रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया है। गोशाला में पशु रखने के लिए तीन टिनशेड, कर्मचारियों के रहने को चार कमरे, भूसे का गोदाम, बाउंड्रीवॉल बनाई गई है। हालांकि जितना बजट खर्च हुआ, उतनी लागत कराए गए निर्माण को देखकर नहीं लगती। वर्तमान में इस गोशाला में 165 गाोवंश हैं। इनकी देखरेख करने के लिए पांच लोगों का स्टाफ तैनात किया गया है। रविवार दोपहर को अमर उजाला की टीम गोशाला की हकीकत परखने पहुंची तो बाहर से देखकर ऐसा लगा कि शायद कलीनगर गोशाला में सब ठीक-ठाक मिलेगा। मगर भीतर पहुंचते ही व्यवस्थाएं देखी तो यहां भी गोवंशीय पशुओं की बदहाल तस्वीर दिखी। परिसर में साफ-सफाई नहीं थी। पशु गंदगी में ही बैठने को मजबूर थे। परिसर के एक हिस्से में तो सिर्फ कीचड़ ही थी। उसी में गोवंशीय पशु विचरण कर रहे थे। भूसे के गोदाम में भी सफाई नहीं थी। भूसे के ढेर में ही गोबर आदि तमाम गंदगी थी। उसे साफ ही नहीं किया गया था। गोवंशीय पशुओं के पीने के पानी की हौदी का हाल तो बहुत ही खराब था। उसमें काई जमी हुई थी। हौदी में भरा पानी हरे रंग का दिखाई दे रहा था। मगर मौजूद दो कर्मचारी साफ-सफाई दुरुस्त होने का ही हवाला देते रहे। जब उन्हें गंदगी दिखाई गई तो कर्मचारियों की संख्या कम होने का हवाला दे डाला। एक कमरे में थोड़ा सा हरा चारा रखा था। उसमें कीडे़ दिखाई दे रहे थे। नांद में हरा चारा नहीं था, पशुओं को सूखा भूसा ही खिलाया जा रहा था। ऐसा लगा मानों अफसरों के निरीक्षण के वक्त खुद को बचाने के लिए थोड़ा हरा चारा स्टाक कर रखा हो। कुल 165 पशुओं की गोशाला में चंद दवाएं थीं।
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एक साल में मर गए 23 गोवंश, फिर भी सुधार नहीं
कलीनगर गोशाला की तस्वीर अफसर भले ही बेहतर बताएं, लेकिन यहां पर भी पशुओं के मरने का आंकड़ा कम नहीं कहा जा सकता। कर्मचारियों ने बताया कि सितंबर 2019 में यह गोशाला शुरू हो गई थी। इसमें अब तक 23 गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। हालांकि मौत की वजह को लेकर चुप्पी साध ली गई।
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अफसर-कर्मचारी बनाते रहे बारिश का बहाना
गोशाला में गंदगी समेत अन्य अव्यवस्थाओं पर नगर पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी बारिश का बहाना बनाकर साख बचाते दिखाई दिए। एक कर्मचारी ने तो गंदगी मिलने पर यहां तक कह दिया कि सुबह से दो बार सफाई हो चुकी है। इसके बाद दोबारा जानवरों ने गंदगी फैला दी। बाकी स्टाफ के आने पर फिर से सफाई कराई जाएगी।
गोशाला में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त चल रही हैं। पानी की हौदी समेत परिसर में गंदगी हुई है तो उसकी सफाई कराएंगे। गोवंशीय पशुओं को हरा चारा प्रतिदिन दिया जा रहा है। दवाएं भी पर्याप्त रहती हैं। बारिश की वजह से हो सकता है गंदगी हुई हो, सुधार कराया जाएगा। - लेखपाल भारती, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, कलीनगर