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गोबर से उत्पाद तैयार करके बढ़ाई जाएगी गोशालाओं की आमदनी
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पीलीभीत। गोशालाओं की दशा सुधारने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। गोवंशीय पशुओं के गोबर से उत्पाद तैयार कर आमदनी की जाएगी। डीएम ने कार्ययोजना तैयार कर ली है। इसे सफल बनाने के लिए जल्द काम शुरू कराया जाएगा।
जनपद में वर्तमान में 29 गोशालाएं है। हर साल करोड़ो रुपये गायों खानपान और इंतजाम दुरुस्त करने को खर्च खिए जाते है। मगर गोशालाओं की तस्वीर को बदला नहीं जा सका। अब भी बड़ी संख्या में गोवंशीय पशु गोशालाओं में भूख तो कभी इलाज के अभाव में बीमारी से दम तोड़ देते हैं। सिस्टम के जिम्मेदार कभी शासन से भरण पोषण को मिलने वाली रकम के कम होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं तो कभी बीमारी का हवाला देकर। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की बनवाई हुई देवीपुरा गोशाला में अगस्त के पहले हफ्ते में 15 गोवंशीय पशु मरने के बाद कई दिनों तक कीचड़ में पड़े रहे थे। अन्य गोशालाओं के हालात भी बदतर हैं। अमर उजाला ने गोशालाओं की बदहाल तस्वीर उजागर करते हुए प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की थीं। खबरों का संज्ञान लेते हुए डीएम ने सुधार कराया, जिसका असर भी दिखने लगा। बजट की कमी स्थायी समाधान को गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। गोशालाओं के खर्च में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए डीएम ने आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया है। गोवंशीय पशुओं के गोबर से ही इसका रास्ता तलाशा गया है।
गोबर से कई उत्पाद जैविक खाद, उपले, गमले, लकड़ी, अगरबती आदि बनाए जा सकते हैं। इन उत्पादों को गोशालाओं में बनवाकर बेचा जाएगा। आम जनजीवन में इन उत्पादों का इस्तेमाल होता है, इसलिए बिक्री भी आसान होगी। बिक्री से होने वाली आमदनी गोशालाओं के खाते में जमा की जाएगी, ताकि समय पर गोवंश के संरक्षण में रकम काम आ सके। जुटाई गई रकम में किसी तरह की हेराफेरी न हो, इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
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मुहिम को सफल बनाने में सहयोगी बनेंगे सरकारी विभाग
गोशालाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए बनाई गई योजना को सफल बनाने में सरकारी विभाग भी सहयोगी बनेंगे। हर साल उद्यान और वन विभाग पौधरोपण समेत अन्य कामों में गमले खरीदता है। इसकी बड़ी रकम चुकाई जाती है। ऐसे में गोशालाओं में ही गमले बनेंगे तो सीधे गोशाला के खाते में ही रकम भेज दी जाएगी।
हरे चारे के लिए शुरू हो चुकी मुहिम
गोवंशीय पशुओं के खानपान की दिक्कत दूर करने के लिए पहले ही डीएम के निर्देश पर मुहिम शुरू हो चुकी है। हरे चारे की स्थायी व्यवस्था करने के लिए हर गोशाला के पास चारागाह की जमीन तलाश की जा रही है। नूरपुर समेत कई जगह जमीन मिलने के बाद नैपियर घास की बुबाई भी कर दी गयी है।
आज होगा छह गोशालाओं का उद्घाटन
जनपद की चार विधानसभा क्षेत्रों में बनी छह गोशालाओं का शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों और अफसरों की मौजूदगी में उद्घाटन किया जाएगा। इनमें 30 पशुओं की क्षमता वाली ललौरीखेड़ा ब्लॉक की अमरगंज, बरखेड़ा ब्लॉक की पृथ्वीपुर, पूरनपुर ब्लॉक की फतेहपुर खुर्द, बिलसंडा ब्लॉक की सिंधौरा खरगपुर, 60 पशु की क्षमता वाली दियोरियकलां, 200 पशुओं क्षमता की करेली गोशाला शामिल है।
गोशालाओं के संचालन में बजट की दिक्कत न आए, इसके लिए गोबर से उपले, गमले आदि उत्पाद बनाकर गोशालाओं की आमदनी बढ़ाई जाएगी। सरकारी विभाग भी खरीद करेंगे तो प्रयास सफल भी होगा। स्थानीय इच्छुक लोगों को भी गोशालाओं से जोड़कर व्यवस्था और बेहतर कराई जाएगी। - पुलकित खरे, डीएम
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जनपद में वर्तमान में 29 गोशालाएं है। हर साल करोड़ो रुपये गायों खानपान और इंतजाम दुरुस्त करने को खर्च खिए जाते है। मगर गोशालाओं की तस्वीर को बदला नहीं जा सका। अब भी बड़ी संख्या में गोवंशीय पशु गोशालाओं में भूख तो कभी इलाज के अभाव में बीमारी से दम तोड़ देते हैं। सिस्टम के जिम्मेदार कभी शासन से भरण पोषण को मिलने वाली रकम के कम होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं तो कभी बीमारी का हवाला देकर। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की बनवाई हुई देवीपुरा गोशाला में अगस्त के पहले हफ्ते में 15 गोवंशीय पशु मरने के बाद कई दिनों तक कीचड़ में पड़े रहे थे। अन्य गोशालाओं के हालात भी बदतर हैं। अमर उजाला ने गोशालाओं की बदहाल तस्वीर उजागर करते हुए प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की थीं। खबरों का संज्ञान लेते हुए डीएम ने सुधार कराया, जिसका असर भी दिखने लगा। बजट की कमी स्थायी समाधान को गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। गोशालाओं के खर्च में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए डीएम ने आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया है। गोवंशीय पशुओं के गोबर से ही इसका रास्ता तलाशा गया है।
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गोबर से कई उत्पाद जैविक खाद, उपले, गमले, लकड़ी, अगरबती आदि बनाए जा सकते हैं। इन उत्पादों को गोशालाओं में बनवाकर बेचा जाएगा। आम जनजीवन में इन उत्पादों का इस्तेमाल होता है, इसलिए बिक्री भी आसान होगी। बिक्री से होने वाली आमदनी गोशालाओं के खाते में जमा की जाएगी, ताकि समय पर गोवंश के संरक्षण में रकम काम आ सके। जुटाई गई रकम में किसी तरह की हेराफेरी न हो, इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
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मुहिम को सफल बनाने में सहयोगी बनेंगे सरकारी विभाग
गोशालाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए बनाई गई योजना को सफल बनाने में सरकारी विभाग भी सहयोगी बनेंगे। हर साल उद्यान और वन विभाग पौधरोपण समेत अन्य कामों में गमले खरीदता है। इसकी बड़ी रकम चुकाई जाती है। ऐसे में गोशालाओं में ही गमले बनेंगे तो सीधे गोशाला के खाते में ही रकम भेज दी जाएगी।
हरे चारे के लिए शुरू हो चुकी मुहिम
गोवंशीय पशुओं के खानपान की दिक्कत दूर करने के लिए पहले ही डीएम के निर्देश पर मुहिम शुरू हो चुकी है। हरे चारे की स्थायी व्यवस्था करने के लिए हर गोशाला के पास चारागाह की जमीन तलाश की जा रही है। नूरपुर समेत कई जगह जमीन मिलने के बाद नैपियर घास की बुबाई भी कर दी गयी है।
आज होगा छह गोशालाओं का उद्घाटन
जनपद की चार विधानसभा क्षेत्रों में बनी छह गोशालाओं का शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों और अफसरों की मौजूदगी में उद्घाटन किया जाएगा। इनमें 30 पशुओं की क्षमता वाली ललौरीखेड़ा ब्लॉक की अमरगंज, बरखेड़ा ब्लॉक की पृथ्वीपुर, पूरनपुर ब्लॉक की फतेहपुर खुर्द, बिलसंडा ब्लॉक की सिंधौरा खरगपुर, 60 पशु की क्षमता वाली दियोरियकलां, 200 पशुओं क्षमता की करेली गोशाला शामिल है।
गोशालाओं के संचालन में बजट की दिक्कत न आए, इसके लिए गोबर से उपले, गमले आदि उत्पाद बनाकर गोशालाओं की आमदनी बढ़ाई जाएगी। सरकारी विभाग भी खरीद करेंगे तो प्रयास सफल भी होगा। स्थानीय इच्छुक लोगों को भी गोशालाओं से जोड़कर व्यवस्था और बेहतर कराई जाएगी। - पुलकित खरे, डीएम