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बाढ़ आई तो डूब जाएगा एफएसटीपी प्लांट

Mon, 23 May 2022 12:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 12:33 AM IST
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FSTP plant will be submerged if there is a flood
पीलीभीत। देवहा नदी के किनारे मैला निस्तारण के लिए एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया जा रहा है। अगर बाढ़ आती है तो देवहा नदी के किनारे सवा चार करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए जा रहे प्लांट के डूबने का खतरा है। इस विषय में अब जिम्मेदार अधिकारी भी मान रहे हैं कि स्थान का चयन गलत हुआ लेकिन उसके लिए कौन जिम्मेदार है, इस सवाल पर अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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पीलीभीत-बरेली मार्ग पर देवहा नदी के पुल के निकट नदी किनारे जिस स्थान पर प्लांट लगाया जा रहा है। वहां से नदी 25 मीटर दूर भी नहीं है। आसपास के बुजुर्गों बताया कि जहां प्लांट बन रहा है, वहां बाढ़ का पानी आ ही जाता है। पंद्रह वर्ष पहले तो इतना पानी आया था कि पूरा इलाका ही जलमग्न हो गया था। फिर ऐसे स्थान को ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए चुना क्यों गया।
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नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का कहना है कि उनके कार्यकाल से पहले स्थान चयनित हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया बाढ़ आने पर यह क्षेत्र डूबने का खतरा रहता है। उनके मुताबिक प्लांट का काम 95 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। अब जो काम बचा है, वह एक महीने में पूरा होगा। जल निगम की कंस्ट्रक्सन डिवीजन इस काम को निजी संस्था के जरिए करा रही है। उन्होंने हाल में ही निरीक्षण किया था। तब यह बात सामने आई थी कि बाढ़ से प्लांट को खतरा है।
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अभी खाली स्थान पर फेंका जाता है मैला - नगर पालिका क्षेत्र में शौचालयों की सफाई से मैला निकलता है। अभी इसे खाली स्थान पर फेंक दिया जाता है। मैला निस्तारण का कोई इंतजाम नहीं है। स्वच्छता पर शासन का जोर है। इसीलिए एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया गया है।
घरों में बने सीवर टैंक के स्लज को ट्रीट कर सॉलिड और लिक्विड को यह प्लांट अलग करेगा। बचे सॉलिड वेस्ट का इस्तेमाल खाद के रूप में किसान कर सकते हैं। लिक्विड का इस्तेमाल खेतों की सिंचाई के लिए किया जा सकेगा।

हैरत : यही जगह मिली थी प्रशासन को - सभासद संजीव सक्सेना ने ट्रीटमेंट प्लांट बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बनाने पर हैरत जताई। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करके का प्लांट ऐसे इलाके में बनाया गया है, जहां नदी का पानी बढ़ते ही आना-जाना मुश्किल हो जाएगा। अब सवाल यह है कि जिम्मेदारों ने ऐसे स्थान का चयन क्यों किया।
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