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चार छात्राओं ने खोली प्रोफेसर की पोल
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पीलीभीत। प्रोफेसर की रंगीन मिजाजी तो लंबे समय से चल रही थी लेकिन जिन चार छात्राओं ने इसका खुलासा किया है उनके मुताबिक वह दो वर्ष से यह सब देख रहीं थीं और डर की वजह से बोल नहीं पा रहीं थीं। एफआईआर दर्ज कारने वाली छात्रा के भाई को उसकी बहन और तीन अन्य छात्राओं ने आरोपी से जुड़े पूरे साक्ष्य 18 नवंबर को पहली बार दिए। बातचीत के दौरान छात्राओं ने उन तरीकों का भी बयान किया जिनके जरिए छात्राओं को सेक्स रैकेट में फंसाया जाता था। नशा कराया जाता था और शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था।
छात्रा के भाई ने बताया कि छात्राओं से मिली जानकारियों के आधार पर उन्होंने अपने स्तर से छानबीन शुरू की। एक छात्रा ने प्रोफेसर की पत्नी से फोन पर शिकायत की। एक पीड़िता के भाई ने 20 नवंबर को कॉलेज के प्राचार्य से बातचीत की। इससे प्रोफेसर को भनक लग गई। जो छात्राएं शिकायत करने पर आमादा थीं उनमें से एक छात्रा के मोबाइल नंबर पर एक महिला की कॉल आई जिसने बदनामी का डर दिखाते हुए धमकाया। इसकी कॉल रिकार्डिंग पुलिस को दी गई है। रिकार्डिंग में अंडरवर्ल्ड से रिश्ते बताए गए और अंजाम भुगतने तक की धमकी दी। इसके बाद तीन छात्राएं कार्रवाई के लिए आगे बढ़ने को राजी नहीं हुईं लेकिन जब उनकी बहन पीछे न हटी तो वह फिर धमकी भरी फोन कॉल आना बंद हो गई। पीड़िता के भाई ने यह भी बताया कि जब से एफआईआर दर्ज कराई है तब से ही प्रोफेसर डरा हुआ है और भागा हुआ है। उनके मुताबिक गणित का प्रोफेसर लंबे समय से इस तरह की हरकतों में लिप्त था और छात्राएं परेशान थीं। कॉलेज परिसर में ही छात्राओं को कंप्यूटर कक्ष में अकेले किसी न किसी बहाने से बुलाया जाता था। इनमें से ही कुछ छात्राओं को प्रोफेसर ने निवास पर भी बुलाया था।
प्रोफेसर को बचाने के लिए पीड़िता के घर पहुंची छात्रा कौन थी?
जब आरोपी को पता चल गया कि अब कुछ छात्राएं आवाज उठा रहीं हैं और चार छात्राओं ने अपनी आपबीती पुलिस तक कहने का मन बना लिया है तो उसकी ओर से छात्राओं को धमकाने का प्रयास किया। इसमें एक छात्रा पीड़िता के घर पहुंच गई लेकिन उसकी वीडियो रिकार्डिंग की जाने लगी तो वह अपना ही बचाव करने लगी और कुछ ही देर में वहां से चली गई। पीड़िता का कहना था कि वह छात्रा उसकी सीनियर थी और चाहती थी कि इस मामले में शिकायत न की जाए।
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अगर भाई हिम्मत न देता तो एक छात्रा भी दर्ज नहीं कराती एफआईआआर
छात्राएं प्रोफेसर की करतूत को तो बयां कर रहीं थीं लेकिन पुलिस थाने जाकर एफआईआर के लिए राजी नहीं हो रहीं थीं। तीन छात्राएं तो पहले ही पीछे हट गईं। चौथी छात्रा भी पुलिस तक नहीं जाना चाहती थी लेकिन जब उसके भाई ने हिम्मत दी तो वह न्याय के लिए आगे बढ़ गई। छात्रा के भाई ने बताया कि उसे दूसरी छात्राओं से पता चला था कि उसकी बहन के साथ भी प्रोफेसर ने दुष्कर्म किया है तो फिर उसने अपनी बहन से बातचीत की। बहन की आंखों के आंसू नहीं थम रहे थे। वह डरी हुई थी और उसका हाल बेहाल था। बहन को हिम्मत दी और दुष्कर्म करने वाले को सजा दिलाने का भरोसा दिया तब वह कार्रवाई के लिए तैयार हुई और कोतवाली तक गई लेकिन दिक्कत तब हुई जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में साढ़े छह घंटे लगा दिए। पहले कोतवाली के दरोगा ने सुना और कहा कि जब सीओ आएंगे तब रिपोर्ट होगी। सीओ रात में दस बजे के बाद आए तब उन्होंने बयान लिए। एक घंटे तक पूछताछ की और तब एफआईआर हो सकी। इसके लिए शाम को पांच बजे से रात में 11.30 बजे तक कोतवाली में इंतजार करना।
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छात्रा के भाई ने बताया कि छात्राओं से मिली जानकारियों के आधार पर उन्होंने अपने स्तर से छानबीन शुरू की। एक छात्रा ने प्रोफेसर की पत्नी से फोन पर शिकायत की। एक पीड़िता के भाई ने 20 नवंबर को कॉलेज के प्राचार्य से बातचीत की। इससे प्रोफेसर को भनक लग गई। जो छात्राएं शिकायत करने पर आमादा थीं उनमें से एक छात्रा के मोबाइल नंबर पर एक महिला की कॉल आई जिसने बदनामी का डर दिखाते हुए धमकाया। इसकी कॉल रिकार्डिंग पुलिस को दी गई है। रिकार्डिंग में अंडरवर्ल्ड से रिश्ते बताए गए और अंजाम भुगतने तक की धमकी दी। इसके बाद तीन छात्राएं कार्रवाई के लिए आगे बढ़ने को राजी नहीं हुईं लेकिन जब उनकी बहन पीछे न हटी तो वह फिर धमकी भरी फोन कॉल आना बंद हो गई। पीड़िता के भाई ने यह भी बताया कि जब से एफआईआर दर्ज कराई है तब से ही प्रोफेसर डरा हुआ है और भागा हुआ है। उनके मुताबिक गणित का प्रोफेसर लंबे समय से इस तरह की हरकतों में लिप्त था और छात्राएं परेशान थीं। कॉलेज परिसर में ही छात्राओं को कंप्यूटर कक्ष में अकेले किसी न किसी बहाने से बुलाया जाता था। इनमें से ही कुछ छात्राओं को प्रोफेसर ने निवास पर भी बुलाया था।
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प्रोफेसर को बचाने के लिए पीड़िता के घर पहुंची छात्रा कौन थी?
जब आरोपी को पता चल गया कि अब कुछ छात्राएं आवाज उठा रहीं हैं और चार छात्राओं ने अपनी आपबीती पुलिस तक कहने का मन बना लिया है तो उसकी ओर से छात्राओं को धमकाने का प्रयास किया। इसमें एक छात्रा पीड़िता के घर पहुंच गई लेकिन उसकी वीडियो रिकार्डिंग की जाने लगी तो वह अपना ही बचाव करने लगी और कुछ ही देर में वहां से चली गई। पीड़िता का कहना था कि वह छात्रा उसकी सीनियर थी और चाहती थी कि इस मामले में शिकायत न की जाए।
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अगर भाई हिम्मत न देता तो एक छात्रा भी दर्ज नहीं कराती एफआईआआर
छात्राएं प्रोफेसर की करतूत को तो बयां कर रहीं थीं लेकिन पुलिस थाने जाकर एफआईआर के लिए राजी नहीं हो रहीं थीं। तीन छात्राएं तो पहले ही पीछे हट गईं। चौथी छात्रा भी पुलिस तक नहीं जाना चाहती थी लेकिन जब उसके भाई ने हिम्मत दी तो वह न्याय के लिए आगे बढ़ गई। छात्रा के भाई ने बताया कि उसे दूसरी छात्राओं से पता चला था कि उसकी बहन के साथ भी प्रोफेसर ने दुष्कर्म किया है तो फिर उसने अपनी बहन से बातचीत की। बहन की आंखों के आंसू नहीं थम रहे थे। वह डरी हुई थी और उसका हाल बेहाल था। बहन को हिम्मत दी और दुष्कर्म करने वाले को सजा दिलाने का भरोसा दिया तब वह कार्रवाई के लिए तैयार हुई और कोतवाली तक गई लेकिन दिक्कत तब हुई जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में साढ़े छह घंटे लगा दिए। पहले कोतवाली के दरोगा ने सुना और कहा कि जब सीओ आएंगे तब रिपोर्ट होगी। सीओ रात में दस बजे के बाद आए तब उन्होंने बयान लिए। एक घंटे तक पूछताछ की और तब एफआईआर हो सकी। इसके लिए शाम को पांच बजे से रात में 11.30 बजे तक कोतवाली में इंतजार करना।