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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Five minutes from the tigress fought Manjit

पांच मिनट तक बाघिन से लड़ती रही मंजीत 

Mon, 06 Feb 2017 10:52 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Mon, 06 Feb 2017 10:52 PM IST
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बाघ, बाघिन या फिर कोई अन्य जंगली जानवर अचानक सामने आ जाए, तो अक्सर भयभीत होकर व्यक्ति सुधबुध खो बैठता है। लेकिन रविवार देर रात मंजीत कौर ने बाघिन के हमले में घायल होने के बाद भी साहस और हिम्मत से काम लिया। पूरे पांच मिनट तक वह और उसके परिवार के अन्य सदस्य खूनी बाघिन से भिड़े। जिसके चलते बाघिन मंजीत को अपना शिकार नहीं बना सकी। मंजीत कौर और उसके परिवार के लोगों के इस साहस की सोमवार पूरे दिन चर्चा होती रही। मंजीत कौर रोज की तरह परिवार के साथ आंगन में सो रही थी। उनकी चारपाई पर उनका दस वर्षीय पौत्र जगरुप भी लेटा हुआ था। देर रात करीब एक बजे अचानक घर में घुसी बाघिन ने मंजीत पर हमला कर दिया। मच्छर दानी में बाघिन का पंजा लगते ही मंजीत की आंख खुल गई। जिसके बाद आंखों के सामने बाघिन को देख कुछ सेकेंड के लिए तो वह सुधबुध खो बैठी, लेकिन बाद में खुद को और साथ सो रहे पौत्र जगरुप को बचाने के लिए हिम्मत जुटाकर बाघिन से लड़ गई। बाघिन पंजे से उन पर वार करती रही और वह अपने हाथ से उसका पलटवार कर शोर मचाती रही। इस बीच एक बार बाघिन ने पंजे से उनके एक हाथ को दबा दिया और दूसरा पंजा चलाया, जो उनके छाती पर लगा। जिसमें वह घायल हो गई। खुद के  घायल हो जाने से बेखबर मंजीत कौर ने चारपाई के पास रखे एक डंडे को उठाकर बाघिन को मारना शुरू कर दिया, लेकिन दूसरे वार में ही डंडा टूट गया। करीब पांच मिनट तक वह बाघिन से इसी तरह जूझती रही। शोर शराबे पर परिवार के अन्य लोग भी जाग गए। सभी ने माजरा देख जिसके हाथ में जो आया वो लेकर बाघिन पर टूट पड़ा। बेटा सरवन सिंह ने भी मां को बचाने के लिए कुल्हाड़ी से बाघिन पर वार किया। बाद में सभी ने मिल कर शोर मचाया और जमीन पर लाठी फटकारनी शुरू कर दी। इस पर बाघिन घर से बाहर चली गई, लेकिन दस मिनट बाद बाघिन दुबारा घर में आ गई। इस बार परिवार के लोग अलर्ट थे, लिहाजा हमला नहीं कर सकी। जिला अस्पताल में भर्ती घायल मंजीत कौर के साहस की सराहना सिर्फ परिवार ही नहीं, गांव में भी होती रही। उनको वीरांगना का खिताब देकर लोग चर्चा करते दिखाई दिए। 
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