{"_id":"6a18a2a47e50a3d7a506f590","slug":"first-they-lost-their-mothers-love-now-they-lost-their-father-leaving-three-children-orphaned-pilibhit-news-c-121-1-pbt1011-160609-2026-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: मां की ममता पहले छिनी, अब पिता का साया भी उठा, अनाथ हो गए तीन बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: मां की ममता पहले छिनी, अब पिता का साया भी उठा, अनाथ हो गए तीन बच्चे
विज्ञापन
जहानाबाद में घटना स्थल पर लगी भीड़।
- फोटो : Archive
जहानाबाद। स्कूल संचालक महेंद्रपाल की मौत के बाद तीनों बच्चे अनाथ हो गए। अपनी सगी मां को बचपन में ही खो दिया। पिता ने दूसरी शादी की, लेकिन इन बच्चों को दूसरी मां का साथ भी अधिक दिनों तक नहीं मिल सका। अब पिता का भी साया सिर से उठ गया। तीनों बच्चों की परवरिश को लेकर परिजनों में चिंता है। हंसता-खेलता परिवार ऐसे मोड़ पर आ गया, जहां दुखों के सिवा कुछ नहीं रह गया।
महेंद्रपाल की जिंदगी में दुखों का सिलसिला काफी पुराना है। ग्रामीणों के मुताबिक, महेंद्रपाल को अपनी जिंदगी को संवारने और बच्चों की परवरिश के लिए दो शादियां करनी पड़ीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पहली शादी बहेड़ी निवासी सरला देवी से हुई थी।
करीब आठ वर्ष पूर्व सरला देवी की बीमारी से मृत्यु हो गई। उनसे चार बच्चे पुत्री प्रभा (17), सुधा (16) और दो जुड़वां पुत्र राम और लखन (8 वर्ष) हुुए। लखन की लगभग एक वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई।
विज्ञापन
पहली पत्नी की मौत के बाद बच्चों की देखभाल और अकेलेपन को दूर करने के लिए महेंद्रपाल ने करीब छह साल पहले छिनकी (बहेड़ी) की रहने वाली रिंकी से दूसरी शादी की, लेकिन दुखों ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा।
करीब तीन साल पहले रिंकी की भी मौत हो गई। दोनों माताओं को खोने के बाद तीनों बच्चे अपने पिता महेंद्रपाल के सहारे रह रहे थे। बड़ी बहनें मिलकर छोटे भाई राम को संभालती रहीं हैं। चार दिन पहले धान का बीज लेने की बात कहकर निकले महेंद्रपाल के वापस लौटने की बच्चे प्रतीक्षा करते रह गए। संवाद
विज्ञापन
महेंद्रपाल की जिंदगी में दुखों का सिलसिला काफी पुराना है। ग्रामीणों के मुताबिक, महेंद्रपाल को अपनी जिंदगी को संवारने और बच्चों की परवरिश के लिए दो शादियां करनी पड़ीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पहली शादी बहेड़ी निवासी सरला देवी से हुई थी।
विज्ञापन
करीब आठ वर्ष पूर्व सरला देवी की बीमारी से मृत्यु हो गई। उनसे चार बच्चे पुत्री प्रभा (17), सुधा (16) और दो जुड़वां पुत्र राम और लखन (8 वर्ष) हुुए। लखन की लगभग एक वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई।
विज्ञापन
पहली पत्नी की मौत के बाद बच्चों की देखभाल और अकेलेपन को दूर करने के लिए महेंद्रपाल ने करीब छह साल पहले छिनकी (बहेड़ी) की रहने वाली रिंकी से दूसरी शादी की, लेकिन दुखों ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा।
करीब तीन साल पहले रिंकी की भी मौत हो गई। दोनों माताओं को खोने के बाद तीनों बच्चे अपने पिता महेंद्रपाल के सहारे रह रहे थे। बड़ी बहनें मिलकर छोटे भाई राम को संभालती रहीं हैं। चार दिन पहले धान का बीज लेने की बात कहकर निकले महेंद्रपाल के वापस लौटने की बच्चे प्रतीक्षा करते रह गए। संवाद