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पटाखे छोड़े, पर अपने साथ दूसरों का भी रखें ख्याल
Pilibhit
Updated Tue, 10 Nov 2015 09:38 PM IST
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दिवाली के मौके पर धूम, धमाके व रोशनी के लिए पटाखों का बाजार सज चुका है तथा उस पर खरीदारों की भीड़ भी जुटने लगी है। जानकारों की मानें तो इस बार भी करोड़ों रुपये के पटाखे जिले में छोड़ने जाने की तैयारी है। पर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पटाखों से निकलने वाली तेज आवाज, गंधक-पोटास व अन्य विस्फोटक सामग्री से तैयार पटाखों का धुंआ किसी की भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
त्योहार का आगमन खुशियों की सौगात होती है। रोशनी का त्योहार कहे जाने वाले इस पर्व को समाज का प्रत्येक व्यक्ति बड़े हर्षोल्लास से मनाना चाहता है। खासकर बच्चों और युवाओं में पटाखे फोड़ने की ललक रहती है। कभी-कभी हम अपनी खुशियों के खातिर जाने अनजाने में दूसरों को परेशानियों में डाल देते हैं। आतिशबाजी के समय शायद ही किसी का ध्यान ध्वनि व वायु प्रदूषण की ओर जाता हो। शहर के चिकित्सक डा. ज्ञान प्रकाश कहते हैं कि आतिशबाजी से निकलने वाली गूंज और धुएं से स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। स्वास अथवा हृदय से संबंधित रोगियों के लिए यह कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है।
क्या होता है नुकसान
- सांस रोगियों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कतें
- आंखों को क्षति पहुंचता है प्रदूषित धुआं
- वातावरण में प्रदूषण की मात्रा हो जाती अधिक
- जहरीली गैसों से श्वास रोगों का बढ़ता खतरा
- श्रवण शक्ति पर पड़ता है काफी असर
पटाखे चलाते समय क्या बरतें सावधानी
-तेज आवाज के पटाखों का प्रयोग न करें
-खुले मैदान पर पटाखों का प्रयोग करना चाहिए
-तेज रोशनी वाले पटाखों का प्रयोग न करें
-जहरीली गैसों के पटाखों से परहेज करें
-लोकल पटाखों का प्रयोग न करें
बहुत सावधानी से जलाए पटाखे
पटाखों से निकलने वाला धुआं शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है। सांस रोगियों और हार्ट के रोगियों को पटाखों से परहेज करना चाहिए। अगर किसी को भी परेशानी हो तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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-डॉ पीके मिश्रा, फिजीशियन जिला अस्पताल
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त्योहार का आगमन खुशियों की सौगात होती है। रोशनी का त्योहार कहे जाने वाले इस पर्व को समाज का प्रत्येक व्यक्ति बड़े हर्षोल्लास से मनाना चाहता है। खासकर बच्चों और युवाओं में पटाखे फोड़ने की ललक रहती है। कभी-कभी हम अपनी खुशियों के खातिर जाने अनजाने में दूसरों को परेशानियों में डाल देते हैं। आतिशबाजी के समय शायद ही किसी का ध्यान ध्वनि व वायु प्रदूषण की ओर जाता हो। शहर के चिकित्सक डा. ज्ञान प्रकाश कहते हैं कि आतिशबाजी से निकलने वाली गूंज और धुएं से स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। स्वास अथवा हृदय से संबंधित रोगियों के लिए यह कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है।
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क्या होता है नुकसान
- सांस रोगियों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कतें
- आंखों को क्षति पहुंचता है प्रदूषित धुआं
- वातावरण में प्रदूषण की मात्रा हो जाती अधिक
- जहरीली गैसों से श्वास रोगों का बढ़ता खतरा
- श्रवण शक्ति पर पड़ता है काफी असर
पटाखे चलाते समय क्या बरतें सावधानी
-तेज आवाज के पटाखों का प्रयोग न करें
-खुले मैदान पर पटाखों का प्रयोग करना चाहिए
-तेज रोशनी वाले पटाखों का प्रयोग न करें
-जहरीली गैसों के पटाखों से परहेज करें
-लोकल पटाखों का प्रयोग न करें
बहुत सावधानी से जलाए पटाखे
पटाखों से निकलने वाला धुआं शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है। सांस रोगियों और हार्ट के रोगियों को पटाखों से परहेज करना चाहिए। अगर किसी को भी परेशानी हो तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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-डॉ पीके मिश्रा, फिजीशियन जिला अस्पताल