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विधायक के भांजे और सिपाही की ओर से दर्ज दोनों एफआईआर की विवेचना गैर जनपद से कराने की मांग

Tue, 03 Mar 2020 02:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2020 02:05 AM IST
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fight case
पीलीभीत। बरखेड़ा के विधायक किशनलाल राजपूत के भांजे ऋषभ और डीएम के तत्कालीन गनर सिपाही मोहित गुर्जर के बीच हुए विवाद का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शासन से कराई गई जांच में अधिकारियों की लापरवाही उजागर हो चुकी है। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से दर्ज एफआईआर की विवेचना गैर जनपद से कराने के लिए सुनगढ़ी पुलिस ने एसपी को पत्र भेजा है, ताकि बाद में सवाल न उठे।
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घटना 12 सितंबर 2019 की रात हुई थी। विधायक के भांजे ऋषभ की ओर से डीएम के तत्कालीन गनर मोहित गुर्जर और उसके साथियों के खिलाफ लूट, जानलेवा हमला और अपहरण की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। सिपाही समेत तीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सिपाही के समर्थन में गुर्जर महासभा, समाजवादी पार्टी के कई नेता आगे आ गए थे। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया था। सिपाही पर लगी संगीन धाराएं हटा दी गई थीं। बाद में मामला बंधक बनाकर मारपीट की धारा में तरमीम कर दिया गया था। इससे आसानी से गनर मोहित को जमानत मिल गई थी।
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जमानत पर छूटने के बाद सिपाही मोहित गुर्जर की ओर से कोर्ट के आदेश पर दिसंबर 2019 में विधायक किशनलाल राजपूत और उनके समर्थकों के खिलाफ डकैती की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप था कि सिपाही को पुलिस चौकी में बंधक बनाकर पीटा और लूटपाट की। विधायक पर सिपाही को जूते-चप्पल से पीटने का भी आरोप था। इसकी विवेचना अभी सुनगढ़ी पुलिस के पास है। शासन की ओर से लखनऊ के एडीजी जोन एसएन सावत ने आकर जांच की थी। इसमें दोनों पक्षों से जुड़े 25 लोगों के बयान दर्ज किए गए थे। इसमें पुलिस अधिकारियों की घटना में लापरवाही सामने आई थी। ऐसे में उन्होंने भी विवेचना कहीं और कराने की बात कही थी। इसके बाद अब सुनगढ़ी थाना प्रभारी ने भी एक पत्र एसपी को भेजा है। इसमें विवेचना दूसरे जनपद से कराने को ज्यादा बेहतर रहना कहा गया है। अब अफसर जल्द इस पर निर्णय लेंगे।
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विवेचना हटाने के लिए यह बताया कारण
सुनगढ़ी पुलिस की ओर से विवेचना दूसरे जनपद या फिर किसी दूसरी एजेंसी से कराने की बात कहते हुए पत्र भेजा गया है। इसके पीछे कारण के तौर पर बताया गया है कि मामला सिपाही और जनप्रतिनिधि से जुड़ा है। ऐसे में निष्पक्ष विवेचना करने के बाद भी उस पर सवाल उठाए जा सकते हैं। पुलिस इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहती। खासतौर से विवेचक सुर्खियों में रहे इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता।
पुलिस अफसरों पर हो सकती है कार्रवाई
शासन से आए जांच अधिकारी एडीजी एसएन सावत ने अपनी रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी है। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट में तत्कालीन एसपी मनोज कुमार सोनकर से लेकर अन्य अधिकारियों की लापरवाही पाई गई। ऐसे में अब डीजीपी की ओर से मामले में संबंधित अधिकारियों को विभागीय दंड दिया जा सकता है।

सुनगढ़ी पुलिस ने पत्र देकर विवेचना गैर जनपद से कराने की मांग की है। वरिष्ठ अधिकारियों को इससे अवगत करा दिया गया है। आगे का निर्णय उन्हीं के स्तर से लिया जाएगा। - अभिषेक दीक्षित, एसपी
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