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आपातकाल का दंशः पिता कर रहे थे लोकतंत्र की रक्षा, बच्चों को चुकानी पड़ी कीमत

Fri, 24 Jun 2022 12:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2022 12:04 AM IST
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Father was protecting democracy, children had to pay the price
डीडी गुप्ता - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। आपातकाल में सरकार की यातनाएं तो प्रत्येक बंदी ने झेलीं थीं, लेकिन जिनके परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी उनके लिए आपातकाल बड़ी विपत्ति बनकर आया था। जिले में कई ऐसे लोकतंत्र सेनानी हैं, जिनके परिवार ने उस दौर में जो मुसीबतें उठाईं, उनकी याद आने पर वे आज भी तत्कालीन सरकार को कोसने लगते हैं। लोकतंत्र सेनानी डीडी गुप्ता के परिवार से जुड़ा घटनाक्रम आज भी उनके जेहन में ताजा है। डीडी गुप्ता जेल में थे और उनके बच्चों को फीस जमा न कर पाने की वजह से उन्हें वार्षिक परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था।
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डीडी गुप्ता बताते हैं कि वह उन दिनों रामा इंटर कॉलेज में शिक्षक थे, जब आपातकाल में जेल गए तो उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन भत्ता भी नहीं दिया जा रहा था। इस दौरान आर्थिक संकट आया। मकान किराये का था। उनके पिता समय-समय पर आकर परिवार के लिए राशन का इंतजाम कर जाते थे लेकिन यह सब पर्याप्त नहीं था। एक वक्त ऐसा भी आया जब संतराम सरस्वती शिशु मंदिर अशोक कॉलोनी में पढ़ने वाले उनके दो बच्चों शैलेंद्र और संध्या को फीस जमा न होने की वजह से वार्षिक परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया।
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वे बताते हैं कि खूबचंद मंदिर में चलने वाले शिवाजी शिशु शिक्षा निकेतन के प्रधानाध्यापक गिरजासरन और प्रबंधक पुत्तू लाल ने हमदर्दी दिखाई। अपने विद्यालय में प्रवेश लिया। उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र दिया, लेकिन परिवार पर मुसीबत कम नहीं हुई, क्योंकि जिस कॉलेज में वह खुद शिक्षक पद पर थे उसी रामा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ने उनके बेटे को छठी कक्षा में दाखिला देने से इन्कार कर दिया था। क्योंकि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल गए थे। तब तत्कालीन डीएम को हस्तक्षेप करना पड़ा। डीएम के हस्तक्षेप के बाद उनके बेटे को दाखिला मिल सका था। विश्वमित्र टंडन द्वारा लिखित पुस्तक ‘पीलीभीत में इमरजेंसी की सौ अनसुनी कहानियां’ भी इस प्रसंग का उल्लेख है।
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