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Pilibhit News: पांच दशक से जमीन पर काबिज किसानों को नहीं मिला मालिकाना हक
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पूरनपुर। ग्राम पंचायत चंदिया हजारा के गांव राहुलनगर की करीब 400 एकड़ जमीन पर गांव के लोग खेती कर रहे हैं। गांव में आवास, सडक़, शौचालय, बिजली आपूर्ति की सुविधाएं भी हैं। जमीन ग्राम सभा में परती में दर्ज भी हैं, लेकिन वन विभाग के अड़ंगा लगाने पर जमीन पर काबिज लोगों को न तो पट्टा मिल पा रहा है और न ही गन्ना सट्टा बन रहा है। जमीन पर बोई जाने वाली गन्ना की फसल किसानों को औने-पौने दामों में बिक्री करनी पड़ रही है।
प्रधान वासुदेव कुंडू ने कैबिनेट सचिव और मुख्य सचिव सहित अन्य को पत्र भेजकर विशेषज्ञों की टीम गठित कर वन अधिनियम की धारा छह को निरस्त कराकर जमीन को ग्राम संपत्ति घोषित कराकर काबिज लोगों को मालिकाना हक दिलाने की मांग की है। चंदिया हजारा के प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि गांव राहुलनगर बस्ती राजस्व अभिलेखों में बंजर परती में दर्ज है। विभिन्न गाटों की करीब 400 एकड़ जमीन पर वर्ष 1976 में 70 लोगों को ढाई-ढाई एकड़ का पट्टा किया गया था। इसके साथ अन्य जमीन पर 316 परिवार खेती करते हैं।
इसी जमीन पर गांव राहुलनगर बसा है। इसमें लोगों को आवास, शौचालय की सुविधा मिली है। बिजली आपूर्ति भी है। कुछ साल पहले से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के तहत वन अधिनियम की धारा छह लागू होने से जमीन के मालिकाना हक को लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। पत्र में संबंधित विभागों और विधि विशेषज्ञों की टीम गठित कराकर ग्राम सभा की बंजर परती भूमि पर से वन अधिनियम की धारा 6 को निरस्त कराकर जमीन को राजस्व अभिलेख में दर्ज कराने की मांग की गई। संवाद
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प्रधान वासुदेव कुंडू ने कैबिनेट सचिव और मुख्य सचिव सहित अन्य को पत्र भेजकर विशेषज्ञों की टीम गठित कर वन अधिनियम की धारा छह को निरस्त कराकर जमीन को ग्राम संपत्ति घोषित कराकर काबिज लोगों को मालिकाना हक दिलाने की मांग की है। चंदिया हजारा के प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि गांव राहुलनगर बस्ती राजस्व अभिलेखों में बंजर परती में दर्ज है। विभिन्न गाटों की करीब 400 एकड़ जमीन पर वर्ष 1976 में 70 लोगों को ढाई-ढाई एकड़ का पट्टा किया गया था। इसके साथ अन्य जमीन पर 316 परिवार खेती करते हैं।
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इसी जमीन पर गांव राहुलनगर बसा है। इसमें लोगों को आवास, शौचालय की सुविधा मिली है। बिजली आपूर्ति भी है। कुछ साल पहले से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के तहत वन अधिनियम की धारा छह लागू होने से जमीन के मालिकाना हक को लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। पत्र में संबंधित विभागों और विधि विशेषज्ञों की टीम गठित कराकर ग्राम सभा की बंजर परती भूमि पर से वन अधिनियम की धारा 6 को निरस्त कराकर जमीन को राजस्व अभिलेख में दर्ज कराने की मांग की गई। संवाद
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