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Pilibhit News: भारत-नेपाल सीमा से सटे 15 किमी क्षेत्र में सरकारी भूमि से हटेगा अतिक्रमण

Sun, 01 Feb 2026 02:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 02:02 AM IST
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Encroachments will be removed from government land in the 15 km area along the India-Nepal border.
भारत-नेपाल सीमा का नोमैंस लैड क्षेत्र में बसी आबादी। स्रोत ग्रामीण
कलीनगर। इंडो-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की सुरक्षित पेट्रोलिंग और सीमांत क्षेत्रों में चौकसी को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी ने सीमा से सटे 15 किलोमीटर क्षेत्र में स्थित सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए हैं। तहसील प्रशासन ने आदेश पर अमल शुरू कर दिया है। इससे सीमांत इलाकों में हड़कंप है।
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जनपद की भारत-नेपाल सीमा अंतरराष्ट्रीय पिलर नंबर 17 से शुरू होती है, इससे पहले उत्तराखंड से सटा नेपाल का इलाका पड़ता है। कलीनगर तहसील क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा में पिलर नंबर 17 से 29 तक का इलाका आता है। इस पूरे क्षेत्र में कई राजस्व गांव, थारू जनजाति के परिवार, विस्थापित बंगाली परिवार बसे हैं। नदी की बाढ़ से बेघर होने के बाद शारदा डैम की तलहटी में भी कॉलोनियां बस गईं। नदी के दोनों ओर कई स्थानों पर वन विभाग और राजस्व विभाग की भूमि पर वर्षों से आबादी बसी हुई है, जिसको लेकर विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे भी चल रहे हैं। नोमैंस-लैंड से सटे क्षेत्रों में अतिक्रमण और आबादी होने के कारण पूर्व में तस्करी की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
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एसएसबी को भी सुरक्षित पेट्रोलिंग करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नेपाल सरकार द्वारा अपने क्षेत्र में झूला पुल और सुरक्षा चौकियां स्थापित किए जाने के बाद भारतीय क्षेत्र में भी सुरक्षा बल और प्रशासन सतर्क हुआ है। अब जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमा से 15 किलोमीटर दायरे में टाइगर रिजर्व, वन विभाग, राजस्व विभाग या किसी अन्य सरकारी भूमि पर किया गया कोई भी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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भूमि को कथित रूप से बेचने का सिलसिला हुआ शुरू
सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक सख्ती की आशंका को देखते हुए कुछ अतिक्रमणकारियों ने कब्जे वाली भूमि को कथित रूप से बेचना शुरू कर दिया है, इससे सीमांत क्षेत्रों में अवैध लेन-देन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, ऐसे में जिला प्रशासन और सरकार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर कितनी सख्ती दिखाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे विभागीय अधिकारी
आदेश के तहत सीमा से सटे 15 किलोमीटर चौड़ाई वाले क्षेत्र में, चाहे वह भूमि किसी भी सरकारी विभाग की हो, सभी अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएंगे। इसके साथ ही सीमांत इलाकों से जुड़े सभी विभागीय अधिकारियों को हर 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस आदेश के बाद सीमांत क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर कब्जा कर बैठे अतिक्रमणकारियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।


भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाके में अतिक्रमण को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। संयुक्त रिपोर्ट मिलने के बाद अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया पर अमल शुरू किया जाएगा। - प्रमेश कुमार, एसडीएम कलीनगर
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