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गोरखडिब्बी में हाथियों ने मचाया उत्पात, पांच झोपड़ियां तहस-नहस कर डाली
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माधोटांडा। नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से आए हाथियों का सीमावर्ती गांवों में छठे दिन भी आतंक रहा। हाथियों ने रात गोरखडिब्बी क्षेत्र में करीब तीन घंटे तक उत्पात मचाया। पांच किसानों की झोपड़ियां उजाड़ने के साथ उनकी गेहूं की फसल भी रौंद डाली। हाथियों के आतंक से सीमावर्ती गांवों में दहशत है।
इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटी नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से करीब छह पूर्व दो जंगली हाथी भारतीय क्षेत्र के लग्गा भग्गा क्षेत्र में आ गए। यह हाथी पांच दिन में छह से अधिक किसानों की 12 झोपड़ियों को तहस नहस करने के साथ उनकी गेहूं की फसलों को रौंद डाला। सीमावर्ती गांवों के किसानों के मुताबिक यह जंगली हाथी दिन में लग्गा भग्गा क्षेत्र में चले जाते हैं और रात को गांवों में किसानों की झोपड़ियों और उनकी फसलों को निशाना बना रहे हैं। इधर, शुक्रवार रात भी जंगली हाथियों ने गोरखडिब्बी क्षेत्र में खरगाई लाल, विकास, दिनेश्वर बैरागी, सहित पांच किसानों की झोपड़ियों को तहस नहस कर डाला। किसानों ने बताया कि हाथियों ने रात करीब 12 बजे के आसपास झोपड़ियों को तोड़ना शुरू किया। इस पर लोगों ने शोर-शराबा करना शुरू कर दिया। इससे हाथी और गुस्से में आए गए और उन्होंने अन्य लोगों की झोपड़ियों पर हमला कर दिया। हाथियों को गुस्सा देख किसानों के परिवारों ने खेतों में छिपकर अपनी जान बचाई। करीब तीन घंटे तक हाथी झोपड़ी तोड़ने के साथ खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को रौंदते रहे। इसके बाद हाथी लग्गा भग्गा की ओर चले गए। किसानों के मुताबिक अब हाथी करीब छह एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल को बर्बाद कर चुके हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन हाथियों को खदेड़ने के बजाए निगरानी की बात कहकर जिम्मेदारी से बच रहा है।
वनकर्मियों की टीम मौके पर ही है। यह इलाका हाथियों का कॉरीडोर कहलाता है। लगभग हर साल ही हाथी एक दूसरे क्षेत्र में आते रहते हैं। कोई अप्रिय घटना न हो, वनकर्मी ग्रामीणों को सतर्क कर रहे हैं।
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- डीके गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही
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इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटी नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से करीब छह पूर्व दो जंगली हाथी भारतीय क्षेत्र के लग्गा भग्गा क्षेत्र में आ गए। यह हाथी पांच दिन में छह से अधिक किसानों की 12 झोपड़ियों को तहस नहस करने के साथ उनकी गेहूं की फसलों को रौंद डाला। सीमावर्ती गांवों के किसानों के मुताबिक यह जंगली हाथी दिन में लग्गा भग्गा क्षेत्र में चले जाते हैं और रात को गांवों में किसानों की झोपड़ियों और उनकी फसलों को निशाना बना रहे हैं। इधर, शुक्रवार रात भी जंगली हाथियों ने गोरखडिब्बी क्षेत्र में खरगाई लाल, विकास, दिनेश्वर बैरागी, सहित पांच किसानों की झोपड़ियों को तहस नहस कर डाला। किसानों ने बताया कि हाथियों ने रात करीब 12 बजे के आसपास झोपड़ियों को तोड़ना शुरू किया। इस पर लोगों ने शोर-शराबा करना शुरू कर दिया। इससे हाथी और गुस्से में आए गए और उन्होंने अन्य लोगों की झोपड़ियों पर हमला कर दिया। हाथियों को गुस्सा देख किसानों के परिवारों ने खेतों में छिपकर अपनी जान बचाई। करीब तीन घंटे तक हाथी झोपड़ी तोड़ने के साथ खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को रौंदते रहे। इसके बाद हाथी लग्गा भग्गा की ओर चले गए। किसानों के मुताबिक अब हाथी करीब छह एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल को बर्बाद कर चुके हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन हाथियों को खदेड़ने के बजाए निगरानी की बात कहकर जिम्मेदारी से बच रहा है।
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वनकर्मियों की टीम मौके पर ही है। यह इलाका हाथियों का कॉरीडोर कहलाता है। लगभग हर साल ही हाथी एक दूसरे क्षेत्र में आते रहते हैं। कोई अप्रिय घटना न हो, वनकर्मी ग्रामीणों को सतर्क कर रहे हैं।
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- डीके गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही