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मौसम की बेरुखी... सावन में रूठे बदरा, सूख रही धान की फसल

Tue, 26 Jul 2022 12:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 12:15 AM IST
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Dry clouds in Sawan, paddy fields drying up
बिलसंडा क्षेत्र में सूखे पड़े धान के खेत। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत/बिलसंडा। सावन के महीने में बादल रूठ गए हैं। बिना बारिश न के धान की फसल मुरझा रही है और खेत सूखते जा रहे हैं। जिले में एक लाख, 34 हजार, 907 हेक्टेयर धान की फसल है। जुलाई में 379.50 मिलीलीटर औसत बारिश की जरूरत होती है, लेकिन इस बार जुलाई में अब तक 70 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। बिलसंडा और बीसलपुर में इससे भी कम बारिश हुई है।
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पिछले वर्ष जुलाई में 184.20 एमएम बारिश हुई थी। अबकी बार बारिश कम होने का नतीजा खेतों में साफ देखा जा रहा है। कई जगह खेतों में दरारें नजर आने लगी हैं। किसानों के लिए बारिश का इंतजार अभी थमा नहीं है। सावन के महीने में भी बादल आसमान में खूब उमड़ रहे हैं, लेकिन बरस नहीं रहे। खेतों की प्यास नहीं बुझ पा रही है। सूरज की तल्खी के चलते तापमान बढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी और उमस से लोग परेशान हैं। बिलसंडा में सोमवार शाम साढ़े चार बजे थोड़ी सी बारिश हुई। इससे किसानों को थोड़ी सी राहत मिली ह्रै।
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सिंचाईं करते रहें, फसल न सूखने दें
कृषि विज्ञानी डॉ. एसएस ढाका ने बताया कि 27-28 जुलाई को बारिश होने का पूर्वानुमान है। जब तक बारिश नहीं हो रही है तब तक किसान फसलों को सूखने न दें। सिंचाईं करते रहें ताकि मेहनत बर्बाद न होने पाए। उन्होंने कहा कि फसल को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है लेकिन फिर भी यथासंभव प्रयास करें। नहर और नलकूप से सिंचाई करते रहें।
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सावन में इस बार कम हुई बारिश
सावन के महीने में बारिश न होने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। बुजुर्ग किसानों का मानना है कि सावन में ऐसा मौसम बहुत सालों बाद देखा जा रहा है। अगर बारिश नहीं हुई तो बड़े क्षेत्र में धान की फसल सूख जाएगी। फिलहाल सिंचाईं का खर्च बढ़ गया है। धान की फसल में लागत बढ़ने के साथ ही उत्पादन प्रभावित होने की भी आशंका बढ़ती जा रही है। अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सिंचाई का खर्च बढ़ेगा और उत्पादन घटेगा। करेली के किसान भृगुराज सिंह ने बताया कि बारिश न होने से सूखे जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। इससे फसलें सूख रही हैं और उन्हें बचाने के लिए सिंचाई करना महंगा पड़ रहा है। पशुओं के चारे तक समस्या बढ़ गई है।

इस तरह बढ़ेगा सिंचाईं का खर्च
सिमरौली के प्रवेश सिंह ने बताया कि धान की फसल में कम से कम दस बार सिंचाई करनी पड़ेगी। एक बार में एक बीघा धान की सिंचाई में लगभग ढाई सौ रुपये का खर्च आता है। ऐसे में दस बार में प्रति बीघा फसल की सिंचाई पर ढाई हजार रुपये का खर्च आएगा।
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