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Pilibhit News: कुत्तों का बढ़ता आतंक, तीन साल में एक लाख दस हजार लोगों को काटा, निकायों ने नहीं कराई एक भी नसबंदी

Wed, 23 Sep 2026 12:22 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Wed, 23 Sep 2026 12:22 AM IST
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Dogs are becoming a growing menace, biting 110,000 people in three years, yet authorities haven't carried out a single sterilization.
जिला अस्पताल में घूमते आवारा कुत्ते। संवाद
पीलीभीत। शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब लोगों की सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य विभाग पर भी भारी पड़ रही है। पिछले तीन वर्षों में 1,01,424 लोग कुत्तों के काटने के बाद सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचे। वर्ष 2026 में भी अब तक 10 हजार से अधिक लोग इनके हमले का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद जिले की तीन नगर पालिकाओं और सात नगर पंचायतों में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए बीते तीन वर्षों में एक भी अभियान नहीं चलाया गया।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर स्थापित कर नसबंदी और टीकाकरण कराने की व्यवस्था होनी है। लेकिन, जिले में यह कवायद अभी जमीन तलाशने, प्रस्ताव बनाने और बजट मांगने से आगे नहीं बढ़ सकी है। नतीजा यह है कि शहर के कई इलाकों में कुत्तों के झुंड राहगीरों और बच्चों पर झपट रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में रोजाना इनके हमलों के पीड़ित पहुंच रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे की तस्वीर साफ करते हैं। वर्ष 2023 में 25,204, 2024 में 55,721 और 2025 में 20,499 लोगों को कुत्तों ने काटा। तीन वर्षों का आंकड़ा जोड़ें तो 1,01,424 लोग एंटी रैबीज उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचे।
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2024 में अकेले 55 हजार से अधिक लोगों के पहुंचने से स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्ष 2026 में भी अब तक 10 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के हमले के बाद उपचार करा चुके हैं।
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जिला अस्पताल में रोज 110 लोग लगवा रहे टीका
कुत्तों के हमले के बाद लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने के लिए पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में औसतन 110 लोग प्रतिदिन एंटी रेबीज टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं। जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर भी नियमित रूप से डोज लगाई जा रही हैं। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग लगातार टीकाकरण कर रहा है, दूसरी ओर कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार स्थानीय निकायों की कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
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कागजों में नियंत्रित होती रही कुत्तों की संख्या
जिला पशुचिकित्साधिकारी डॉ. प्रवीण त्यागी के अनुसार उनके कार्यकाल में किसी भी नगर पालिका अथवा नगर पंचायत ने आवारा कुत्तों की नसबंदी कराने के संबंध में विभाग को न मौखिक रूप से जानकारी दी और न लिखित पत्र भेजा। यानी जिस व्यवस्था से कुत्तों की संख्या नियंत्रित होनी थी, वह कागजों में ही चलती रही।
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छह माह में जमीन मिली, दो महीने से प्रस्ताव अटका
शहर में एबीसी सेंटर स्थापित करने के लिए जमीन तलाशने में करीब छह माह लग गए। अब राजस्व विभाग ने मीरापुर में 7,585 वर्गमीटर भूमि चिह्नित कर नगर पालिका को उपलब्ध करा दी है। लेकिन जमीन मिलने के बाद भी करीब दो माह से नगर पालिका प्रस्ताव तैयार करने तक ही सीमित है। उधर काला मंदिर, सुनगढ़ी, अशोक कॉलोनी, नखासा समेत कई मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, शाम के समय इनकी सक्रियता ज्यादा बढ़ जाती है। बच्चों और पैदल राहगीरों को सबसे अधिक खतरा रहता है।
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अस्पताल में मरीजों से पहले दिख जाते हैं आवारा कुत्ते
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मेडिकल कॉलेज परिसरों में आवारा कुत्तों की निगरानी के लिए कमेटी गठित करने और परिसर में इनके विचरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद पीलीभीत मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल परिसर में दिनभर आवारा कुत्ते घूमते नजर आते हैं।
मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही वाले स्थानों पर झुंड दिखाई देने से कभी भी अप्रिय स्थिति पैदा हो सकती है। विडंबना यह है कि जिस अस्पताल में कुत्तों के काटने के बाद लोगों को एंटी रैबीज टीके लगाए जा रहे हैं, उसी परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी बनी हुई है।
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एबीसी सेंटर शुरू हुआ तो मिलेगी स्थायी राहत
आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण से ही संभव है। इसके लिए एबीसी सेंटर की स्थापना जरूरी है। सेंटर बनने के बाद कुत्तों को पकड़कर नसबंदी, टीकाकरण और निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस छोड़े जाने की व्यवस्था की जा सकेगी।
फिलहाल जमीन उपलब्ध होने के बावजूद प्रस्ताव आगे न बढ़ने से योजना की रफ्तार सुस्त है। लगातार बढ़ रहे हमलों के बीच अब सवाल यह है कि एबीसी सेंटर कब बनेगा और शहरवासियों को आवारा कुत्तों के झुंड से कब राहत मिलेगी।

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वर्जन
नगर पालिका क्षेत्र से कुत्तों की नसबंदी को लेकर एबीसी सेंटर बनाने के लिए भूमि चिह्नित कर ली गई है, अब प्रस्ताव भेजने के साथ बजट की प्रक्रिया की जा रही है। - संजीव कुमार, अधिशासी अधिकारी
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