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डॉक्टरों का टोटा, कैसे हो संक्रामक रोगियों का इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 09 May 2016 11:47 PM IST
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गर्मी की दस्तक के साथ ही मौसमी बीमारियों ने भी तेजी से पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। जिले का सेहत महकमा सरकारी अस्पतालों में इलाज की पर्याप्त सुविधा होने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत में महकमे के दावे खोखले ही नजर आ रहे हैं। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक डॉक्टरों की लंबे अरसे से कमी बनी हुई है।
18 डॉक्टरों के सहारे
जिला अस्पताल
जिला अस्पताल पर गौर करें तो यहां 27 में से सीएमएस समेत कुल 18 डाक्टर ही तैनात हैं। पर्याप्त डॉक्टर न होने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं अकसर बेपटरी ही रहती है। रोजाना एक हजार तक ओपीडी करने वाले इस अस्पताल में चंद डाक्टर मरीजों का किस तरह का इलाज करते होंगे, यह एक बड़ा सवाल है।
सीएचसी, पीएचसी में
भी डॉक्टरों का टोटा
सरकारी चिकित्सकीय सेवाओं की चर्चा करें तो जिले में छह सीएचसी, दो ब्लाक लेबल पीएचसी, 21 न्यू पीएचसी हैं। इनमें स्वीकृत 99 डॉक्टरों के पदों पर केवल 67 डॉक्टर कार्यरत हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी खासी कमी है। यही वजह है कि ग्रामीण अंचल के मरीज भी सीएचसी व पीएचसी पर न जाकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचते हैं।
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सेहत महकमे का दावा है कि संक्रामक रोगों से निपटने को सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवा व अलग वार्डों में बेडों की व्यवस्था कर दी गई है। वहीं जिला अस्पताल में भी संक्रामक वार्ड स्थापित किए गए हैं, जिससे जिला अस्पताल में आने वाले मरीज का समय से उपचार हो सके, लेकिन इन वार्डों की व्यवस्था का हाल वहां भर्ती होने गए मरीज बेहतर तरीके से जानते हैं।
गर्मी बढ़ते ही संक्रामक रोगों के मरीज बढ़ने लगते हैं। मरीजों को कोई दिक्कत न हो इसलिए इंतजाम कर दिए गए हैं। एक वार्ड बनाने के साथ ही संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तैयारी कर ली गई है। अस्पताल में दवा का भी पर्याप्त स्टॉक कर लिया गया है। जिससे मरीज के इलाज के दौरान कोई दिक्कत न हो सके।
- आरसी शर्मा, सीएमएस
एक नजर जिला अस्पताल की ओपीडी पर
तरीख मरीजों की संख्या
छह मई 1028
पांच मई 920
चार मई 1022
तीन मई 1173
दो मई 1348
संक्रामक रोगों से निपटने
को हैं पर्याप्त इंतजाम
जिले के सभी चिकित्साधिकारियों को पूर्व में ही संक्रामक रोगों को लेकर अलर्ट किया जा चुका है। सभी को पर्याप्त मात्रा में दवा की उपलब्धता बनाए रखने व अलग वार्ड स्थापित करने को निर्देशित किया जा चुका है।
- डॉ. सीएम चतुर्वेदी, प्रभारी सीएमओ
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18 डॉक्टरों के सहारे
जिला अस्पताल
जिला अस्पताल पर गौर करें तो यहां 27 में से सीएमएस समेत कुल 18 डाक्टर ही तैनात हैं। पर्याप्त डॉक्टर न होने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं अकसर बेपटरी ही रहती है। रोजाना एक हजार तक ओपीडी करने वाले इस अस्पताल में चंद डाक्टर मरीजों का किस तरह का इलाज करते होंगे, यह एक बड़ा सवाल है।
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सीएचसी, पीएचसी में
भी डॉक्टरों का टोटा
सरकारी चिकित्सकीय सेवाओं की चर्चा करें तो जिले में छह सीएचसी, दो ब्लाक लेबल पीएचसी, 21 न्यू पीएचसी हैं। इनमें स्वीकृत 99 डॉक्टरों के पदों पर केवल 67 डॉक्टर कार्यरत हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी खासी कमी है। यही वजह है कि ग्रामीण अंचल के मरीज भी सीएचसी व पीएचसी पर न जाकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचते हैं।
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सेहत महकमे का दावा है कि संक्रामक रोगों से निपटने को सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवा व अलग वार्डों में बेडों की व्यवस्था कर दी गई है। वहीं जिला अस्पताल में भी संक्रामक वार्ड स्थापित किए गए हैं, जिससे जिला अस्पताल में आने वाले मरीज का समय से उपचार हो सके, लेकिन इन वार्डों की व्यवस्था का हाल वहां भर्ती होने गए मरीज बेहतर तरीके से जानते हैं।
गर्मी बढ़ते ही संक्रामक रोगों के मरीज बढ़ने लगते हैं। मरीजों को कोई दिक्कत न हो इसलिए इंतजाम कर दिए गए हैं। एक वार्ड बनाने के साथ ही संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तैयारी कर ली गई है। अस्पताल में दवा का भी पर्याप्त स्टॉक कर लिया गया है। जिससे मरीज के इलाज के दौरान कोई दिक्कत न हो सके।
- आरसी शर्मा, सीएमएस
एक नजर जिला अस्पताल की ओपीडी पर
तरीख मरीजों की संख्या
छह मई 1028
पांच मई 920
चार मई 1022
तीन मई 1173
दो मई 1348
संक्रामक रोगों से निपटने
को हैं पर्याप्त इंतजाम
जिले के सभी चिकित्साधिकारियों को पूर्व में ही संक्रामक रोगों को लेकर अलर्ट किया जा चुका है। सभी को पर्याप्त मात्रा में दवा की उपलब्धता बनाए रखने व अलग वार्ड स्थापित करने को निर्देशित किया जा चुका है।
- डॉ. सीएम चतुर्वेदी, प्रभारी सीएमओ