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Pilibhit News: इमरजेंसी में मरीज छोड़कर चली गईं डॉक्टर
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर लेटा मरीज। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। जिला अस्पताल के आकस्मिक विभाग (इमरजेंसी) में ड्यूटी करने वाली एक चिकित्सक मरीजों को देखने के बजाय निजी काम से अस्पताल से बाहर चलीं गईं। कुछ देर तक मरीज स्ट्रेचर पर यूं ही पड़ा रहा और उसका इलाज शुरू नहीं हो सका। आखिरकार फार्मेसिस्ट की सूचना पर जूनियर डॉक्टर मौके पर पहुंचा तो इलाज शुरू हो सका।
बीते सप्ताह भी इमरजेंसी में ड्यूटी के दौरान एक चिकित्सक 20 मिनट तक नदारद रहे थे। इससे मरीजों को परेशानी हुई। जिसमें प्राचार्य की ओर से जांच कराने की बात भी कही गई थी।
शनिवार को एक चिकित्सक की बतौर ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) ड्यूटी दोपहर दो बजे से थी। डॉक्टर दो बजे यहां पहुंचीं तो लेकिन 15 से 20 मिनट बाद निकल गईं। इस बीच नौगवां पकड़िया निवासी इरफान को उसके परिजनों ने घायल अवस्था में यहां पहुंचाया। काफी देर तक डॉक्टर के आने का इंतजार होता रहा। इसकी जानकारी जब फार्मेसिस्ट को हुई तो उन्होंने जूनियर डॉक्टर को बुलाया और इलाज शुरू कराया।
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इस बाबत मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजीव सक्सेना ने बताया है कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की कमी के कारण कुछ ही चिकित्सकों की ड्यूटी इमरजेंसी में लगाई जाती है। जेआर तो हैं, लेकिन इन्हें ईएमओ नहीं बनाया जा सकता।
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पीलीभीत। जिला अस्पताल के आकस्मिक विभाग (इमरजेंसी) में ड्यूटी करने वाली एक चिकित्सक मरीजों को देखने के बजाय निजी काम से अस्पताल से बाहर चलीं गईं। कुछ देर तक मरीज स्ट्रेचर पर यूं ही पड़ा रहा और उसका इलाज शुरू नहीं हो सका। आखिरकार फार्मेसिस्ट की सूचना पर जूनियर डॉक्टर मौके पर पहुंचा तो इलाज शुरू हो सका।
बीते सप्ताह भी इमरजेंसी में ड्यूटी के दौरान एक चिकित्सक 20 मिनट तक नदारद रहे थे। इससे मरीजों को परेशानी हुई। जिसमें प्राचार्य की ओर से जांच कराने की बात भी कही गई थी।
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शनिवार को एक चिकित्सक की बतौर ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) ड्यूटी दोपहर दो बजे से थी। डॉक्टर दो बजे यहां पहुंचीं तो लेकिन 15 से 20 मिनट बाद निकल गईं। इस बीच नौगवां पकड़िया निवासी इरफान को उसके परिजनों ने घायल अवस्था में यहां पहुंचाया। काफी देर तक डॉक्टर के आने का इंतजार होता रहा। इसकी जानकारी जब फार्मेसिस्ट को हुई तो उन्होंने जूनियर डॉक्टर को बुलाया और इलाज शुरू कराया।
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इस बाबत मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजीव सक्सेना ने बताया है कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की कमी के कारण कुछ ही चिकित्सकों की ड्यूटी इमरजेंसी में लगाई जाती है। जेआर तो हैं, लेकिन इन्हें ईएमओ नहीं बनाया जा सकता।