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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   DM of five Democracy fighters stopped pension

पांच लोकतंत्र सेनानियों की डीएम ने रोकी पेंशन

Fri, 31 Mar 2017 11:07 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Fri, 31 Mar 2017 11:07 PM IST
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जिले में कुछ संगीन अपराधों में लिप्त रहे लोगों को गलत ढंग से लोकतंत्र सेनानी घोषित कर पेंशन दिए जाने के मामले में तत्कालीन प्रशासन के साथ-साथ दो माननीयों की भूमिका भी उजागर हुई है। मामले के तूल पकड़े जाने के बाद जिलाधिकारी मासूम अली सरवर ने प्रथम दृष्टया गलत पाए गए पांच लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन पर रोक लगाने के साथ ही 15 दिन का नोटिस जारी कर लोकतंत्र सेनानी होने का सबूत पेश करने को कहा है। डीएम ने साफ किया कि यदि वह लोग अपने लोकतंत्र सेनानी होने का ठोस सबूत पेश नहीं कर सके तो उनके खिलाफ अब तक दी गई पेंशन की वसूली के साथ अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। जिले में आधा दर्जन से अधिक लोग गलत ढंग से लोकतंत्र सेनानी बना दिए गए हैं। शुरू में इस आवाज को असल लोकतंत्र सेनानियों ने भी समय-समय पर उठाया, लेकिन इनमें से अधिकांश के सपा नेताओं के करीबी होने के कारण प्रशासन उनकी बातों को नजरंदाज करता रहा। अमर उजाला में इसके खुलासे के बाद प्रशासन कुछ हरकत में आया। इसके बाद लोकतंत्र सेनानी संगठन की ओर से की गई शिकायत पर प्रशासन ने जांच शुरू की। शिकायती पत्र में लोकतंत्र पेंशन पा रहे पांच लोगों का नाम भी शामिल था जिन्हें गलत ढंग से पेंशन दी जा रही थी। प्रशासन ने  खुफिया विभाग से उनकी रिपोर्ट मंगाई तो प्रारंभिक जांच में ही सलाउद्दीन पुत्र मोहम्मद फारूक, मोहम्मद अब्दुल वली खां, अखिलेश मिश्र, कौशल कुमार, और चंद्रप्रकाश फंस गए। इनमे से सलाउद्दीन का कुछ दिन पहले निधन हो गया है। इस रिपोर्ट के बाद भी प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से कतराता रहा। अमर उजाला में इस फर्जीवाड़े के सिलसिलेवार खुलासे के बाद जिलाधिकारी मासूम अली सरवर ने अब इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने प्रथम दृष्ट्या गलत पाए गए उपरोक्त पांच लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। पांचों लोगों को नोटिस जारी कर उनसे खुद के इमरजेंसी के दौरान राजनीतिक कारणों से जेल भेजे जाने का साक्ष्य उपलब्ध कराने को 15 दिन का समय दिया है।
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... तो माननीयों के लिखे को मान लिया साक्ष्य
जिला प्रशासन ने जब उपरोक्त पांच लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की पत्रावलियों की गहनता से पड़ताल की तो उसे पता चला कि इनमें से एक सपा सरकार में कद्दावर नेता के करीबी रह चुके हैं। यह भी पता चला कि इनमें से एक व्यक्ति तो ऐसे भी हैं जो कभी किसी मामले में जेल गए ही नहीं। यही नहीं गलत ढंग से लोकतंत्र सेनानी बने कई लोग ऐसे भी मिले जिन्हें तत्कालीन सपा सरकार के दो विधायकों ने अपने लेटर पैड पर उनके लोकतंत्र सेनानी होने का प्रणामपत्र दिया था। तत्कालीन अधिकारी भी आंख बंद कर सिर्फ विधायकों के लिखे होने के आधार पर उन्हें लोकतंत्र सेनानी घोषित कर दिया।
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इस मामले में प्रशासन का रुख स्पष्ट है। प्रथम दृष्ट्या गलत ढंग से लोकतंत्र सेनानी घोषित किये गए पांच लोगों की पेंशन रोक दी गई है। उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी, लेकिन इसके पहले उन्हें 15 दिन के भीतर अपनी सफाई पेश करने का मौका नोटिस भेज कर दिया गया है। इस अवधि में उन्हें अपने लोकतंत्र सेनानी होने का साक्ष्य देना होगा। यदि नहीं दे पाते हैं तो उनके खिलाफ रिकवरी व अन्य कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अन्य लोकतंत्र सेनानियों की भी शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। - मासूम अली सरवर, जिलाधिकारी
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