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तहसील दिवस में डीएम से भिड़े विधायक
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत/बीसलपुर।
Updated Tue, 19 Sep 2017 11:25 PM IST
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- डीएम पर भू-माफिया को संरक्षण देने के आरोप के बाद बढ़ी बात
- दो भाजपा विधायकों ने किया तहसील दिवस का बहिष्कार
तहसील दिवस में एक शिकायत को लेकर भाजपा विधायक रामसरन वर्मा और डीएम शीतल वर्मा में जमकर नोकझोंक हुई। बाद में विधायक वर्मा तहसील दिवस का बहिष्कार कर चले गए, उनके साथ बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत भी बाहर आ गए। विधायक वर्मा ने डीएम पर जनता की शिकायतों के निस्तारण में उदासीनता बरतने और भू माफिया को संरक्षण देने तक के आरोप लगाए हैं। उधर डीएम ने कहा कि विधायक सिविल कोर्ट की अधिकारिता में आने वाले एक मामले में उनसे हस्तक्षेप को कह रहे थे, मना करने पर वह खफा हो गए।
मंगलवार को बीसलपुर तहसील में डीएम की अध्यक्षता में तहसील दिवस आयोजित किया गया। इसमें बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा और इसी तहसील क्षेत्र में पड़ने वाले बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक किशनलाल राजपूत भी पहुंचे थे। इस दौरान गांव महदखास निवासी बाबूराम ने शिकायती पत्र दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी तीन बीघा जमीन पर गांव के ही एक दबंग ने झोपड़ी डाल रखी है। दबंग बाबूराम को तरह तरह की धमकियां दे रहा है, मगर कई बार लिखित शिकायत के बावजूद अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। डीएम ने बाबूराम को उनकी शिकायत का अतिशीघ्र निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। इसी दौरान एक महिला ने भी इसी तरह की शिकायत की। डीएम ने उसे कहा कि सिविल कोर्ट से निर्णित फैसले का अनुपालन कराने के लिए उसे कोर्ट से आदेश करवाना होना, तभी प्रशासन उनकी मदद कर सकेगा।
ये सब बातें सुन रहे विधायक रामसरन वर्मा ने तपाक से डीएम से कहा कि जब किसी की समस्या का समाधान ही नहीं हो पा रहा तो तहसील दिवस का क्या औचित्य है। बस इसी पर बात बढ़ी और डीएम से विवाद शुरू हो गया। इसके बाद विधायक वर्मा बाहर आकर पत्रकारों से कहा कि जिले में तहसील दिवसों में आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई होने के नाम पर केवल खानापूरी हो रही है। पीलीभीत में माफिया का बोलबाला है। प्रशासन की मिलीभगत से माफिया ने तालाबों पर अवैध कब्जा कर उन पर पक्के भवन बनवा रखे हैं। एक भ्रष्ट लेखपाल को हटाने के लिए कहा था, मगर डीएम ने उसे एक अन्य क्षेत्र का भी अतिरिक्त चार्ज दे दिया। उन्होंने कहा कि वह लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री को पूरी बात बताएंगे।
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तहसील दिवस में एक महिला ने प्रार्थना पत्र दिया था। उसकी प्रतिपक्षी सिविल कोर्ट से मुकदमा जीत चुकी थी। शिकायतकर्ता महिला इसके बाद भी उनसे उस पर कब्जे का आदेश करवाना चाहती थी। उसे बताया कि सिविल कोर्ट के मामले डीएम के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इस पर विधायक जी ने कहा कि डीएम को सभी पॉवर है। इस पर मैंने विधायक जी से कहा कि यदि कहीं ऐसा है तो दिखा दीजिए। मैं आदेश कर दूंगी। इस पर विधायक जी नाराज होकर तहसील दिवस से उठ कर चले गए।
शीतल वर्मा, डीएम पीलीभीत
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- दो भाजपा विधायकों ने किया तहसील दिवस का बहिष्कार
तहसील दिवस में एक शिकायत को लेकर भाजपा विधायक रामसरन वर्मा और डीएम शीतल वर्मा में जमकर नोकझोंक हुई। बाद में विधायक वर्मा तहसील दिवस का बहिष्कार कर चले गए, उनके साथ बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत भी बाहर आ गए। विधायक वर्मा ने डीएम पर जनता की शिकायतों के निस्तारण में उदासीनता बरतने और भू माफिया को संरक्षण देने तक के आरोप लगाए हैं। उधर डीएम ने कहा कि विधायक सिविल कोर्ट की अधिकारिता में आने वाले एक मामले में उनसे हस्तक्षेप को कह रहे थे, मना करने पर वह खफा हो गए।
मंगलवार को बीसलपुर तहसील में डीएम की अध्यक्षता में तहसील दिवस आयोजित किया गया। इसमें बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा और इसी तहसील क्षेत्र में पड़ने वाले बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक किशनलाल राजपूत भी पहुंचे थे। इस दौरान गांव महदखास निवासी बाबूराम ने शिकायती पत्र दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी तीन बीघा जमीन पर गांव के ही एक दबंग ने झोपड़ी डाल रखी है। दबंग बाबूराम को तरह तरह की धमकियां दे रहा है, मगर कई बार लिखित शिकायत के बावजूद अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। डीएम ने बाबूराम को उनकी शिकायत का अतिशीघ्र निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। इसी दौरान एक महिला ने भी इसी तरह की शिकायत की। डीएम ने उसे कहा कि सिविल कोर्ट से निर्णित फैसले का अनुपालन कराने के लिए उसे कोर्ट से आदेश करवाना होना, तभी प्रशासन उनकी मदद कर सकेगा।
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ये सब बातें सुन रहे विधायक रामसरन वर्मा ने तपाक से डीएम से कहा कि जब किसी की समस्या का समाधान ही नहीं हो पा रहा तो तहसील दिवस का क्या औचित्य है। बस इसी पर बात बढ़ी और डीएम से विवाद शुरू हो गया। इसके बाद विधायक वर्मा बाहर आकर पत्रकारों से कहा कि जिले में तहसील दिवसों में आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई होने के नाम पर केवल खानापूरी हो रही है। पीलीभीत में माफिया का बोलबाला है। प्रशासन की मिलीभगत से माफिया ने तालाबों पर अवैध कब्जा कर उन पर पक्के भवन बनवा रखे हैं। एक भ्रष्ट लेखपाल को हटाने के लिए कहा था, मगर डीएम ने उसे एक अन्य क्षेत्र का भी अतिरिक्त चार्ज दे दिया। उन्होंने कहा कि वह लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री को पूरी बात बताएंगे।
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तहसील दिवस में एक महिला ने प्रार्थना पत्र दिया था। उसकी प्रतिपक्षी सिविल कोर्ट से मुकदमा जीत चुकी थी। शिकायतकर्ता महिला इसके बाद भी उनसे उस पर कब्जे का आदेश करवाना चाहती थी। उसे बताया कि सिविल कोर्ट के मामले डीएम के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इस पर विधायक जी ने कहा कि डीएम को सभी पॉवर है। इस पर मैंने विधायक जी से कहा कि यदि कहीं ऐसा है तो दिखा दीजिए। मैं आदेश कर दूंगी। इस पर विधायक जी नाराज होकर तहसील दिवस से उठ कर चले गए।
शीतल वर्मा, डीएम पीलीभीत