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दिवाली पर छह करोड़ से अधिक के पटाखे छोड़े
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शहर के रामलीला मैदान में इसी जगह लगाई गईं थीं आतिशबाजी की दुकानें।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। जिले में जीएसटी के बाद बढ़ी महंगाई के बाद भी पटाखा मार्केट में करीब छह करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। यह स्थिति तब है, जब प्रशासन द्वारा आतिशबाजी बिक्री को लेकर कई कायदे कानून बना दिए गए। शहर के रामलीला मैदान में दूसरे दिन बिखरी पड़ी पॉलिथीन गवाही दे रहीं हैं।
इस दिवाली भी आतिशबाजी के शौकीनों का खुमार सिर चढ़कर बोला। बड़े पैमाने पर भले ही नहीं, लेकिन पटाखे फोड़ने का सिलसिला गुरुवार की शाम ऐसा शुरू हुआ कि आधी रात के बाद ही जाकर थमा। कारोबारी इस बार समूचे जनपद में दस करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होना मान रहे थे, लेकिन समय से दुकानें न लगने व महंगाई के चलते कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। जिले में करीब 422 दुकानें लगाई गई। इसके अलावा पूरनपुर, बीसलपुर, बिलसंडा आदि में दुकानें लगाई गई थी। थोक कारोबारियों के मुताबिक इस बार जिले में छह करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार रहा। थोक कारोबारी मोहम्मद अजीम ने बताया कि इस बार दुकानों को लगाने की परमीशन समय से नहीं मिल सकी। वहीं पिछले दिनों आई बाढ़ से भी पटाखा बाजार में असर दिखाई दिया। अन्य दुकानदारों की मानें तो इस बार पिछले साल के मुकाबले इस बार 25 प्रतिशत अधिक महंगाई रही। आतिशबाजी शिवाकाशी व मद्रास में बनती है, लेकिन जिले की आतिशबाजी का माल काशीपुर, कासगंज, बरेली के थोक व्यापारियों से बाजार में आया।
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इस दिवाली भी आतिशबाजी के शौकीनों का खुमार सिर चढ़कर बोला। बड़े पैमाने पर भले ही नहीं, लेकिन पटाखे फोड़ने का सिलसिला गुरुवार की शाम ऐसा शुरू हुआ कि आधी रात के बाद ही जाकर थमा। कारोबारी इस बार समूचे जनपद में दस करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होना मान रहे थे, लेकिन समय से दुकानें न लगने व महंगाई के चलते कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। जिले में करीब 422 दुकानें लगाई गई। इसके अलावा पूरनपुर, बीसलपुर, बिलसंडा आदि में दुकानें लगाई गई थी। थोक कारोबारियों के मुताबिक इस बार जिले में छह करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार रहा। थोक कारोबारी मोहम्मद अजीम ने बताया कि इस बार दुकानों को लगाने की परमीशन समय से नहीं मिल सकी। वहीं पिछले दिनों आई बाढ़ से भी पटाखा बाजार में असर दिखाई दिया। अन्य दुकानदारों की मानें तो इस बार पिछले साल के मुकाबले इस बार 25 प्रतिशत अधिक महंगाई रही। आतिशबाजी शिवाकाशी व मद्रास में बनती है, लेकिन जिले की आतिशबाजी का माल काशीपुर, कासगंज, बरेली के थोक व्यापारियों से बाजार में आया।
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