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जिला पंचायत का अविश्वास प्रस्ताव धड़ाम
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Mon, 22 May 2017 10:20 PM IST
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जिला पंचायत का अविश्वास प्रस्ताव धड़ाम
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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पेश किया गया अविश्वास महज औपचारिकता साबित हुआ। प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग के लिए बुलाई गई बैठक में अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले ही उपस्थित होने की हिम्मत नहीं जुटा सके। एक मात्र महिला सदस्य अर्चना वर्मा बैठक में उपस्थित हुई। निर्धारित समय तक सदस्यों के न आने पर पीठासीन अधिकारी स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट पंकज कुमार उपाध्याय ने अविश्वास प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। अविश्वास प्रस्ताव पास न होने से आरती महेंद्र जिला पंचातय अध्यक्ष बनी रहेंगी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के प्रयास शुरू किए गए थे। इसके लिए बीसलपुर की सदस्य शोभना देवी ने 19 सदस्यों के शपथपत्रों सहित जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इस पर चर्चा के लिए जिला जज की अनुमति के बाद 22 मई की तिथि निर्धारित की गई थी। सोमवार को सुबह 11 बजे से एक बजे तक अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी और इसके बाद वोटिंग की व्यवस्था थी। इसके लिए जिला जज द्वारा पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किए गए स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट पंकज कुमार उपाध्याय ठीक सुबह 11 बजे जिला पंचायत के मीटिंग हाल में पहुंच गए। अन्य अधिकारी भी समय से जिला पंचायत सभागार में पहुंच गए। करीब 12:15 बजे पूरनपुर क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य अर्चना वर्मा सभागार में पहुंची। निर्धारित समय तक किसी अन्य सदस्य के न पहुंचने पर पीठासीन अधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। एएमए जागन सिंह ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष केे खिलाफ आया अविश्वास प्रस्ताव अस्वीकार हो गया है। अब आरती महेंद्र जिला पंचायत अध्यक्ष बनी रहेंगी। इस मौके पर सीडीओ इंद्रदेव द्विवेदी, एएमए जागन सिंह, डीपीआरओ शशिकांत पांडेय मौजूद रहे।
खुद आने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके प्रस्तावक
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को शपथ पत्र देने वाले अन्य सदस्य तो दूर स्वयं प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाली शोभना देवी ही बैठक में पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। दरअसल जल्दबाजी और बिना पार्टी हाईकमान को विश्वास में लिए प्रस्तुत किए इस अविश्वास प्रस्ताव को पहले दिन से ही कमजोर माना जा रहा था। पहला झटका प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अगले दिन ही तब लगा जब 19 सदस्यों के सौंपे गए शपथपत्र में शामिल तीन सदस्यों ने तत्कालीन डीएम के समक्ष प्रस्तुत होकर अध्यक्ष के पक्ष में होने का दावा करते हुए शपथ पत्र दिए थे और एक दिन पूर्व उनके नाम से दाखिल हुए शपथपत्रों पर फर्जी हस्ताक्षर होना बताया था। इसके बाद दूसरा झटका पार्टी हाईकमान की फटकार के चलते लगा। पार्टी की फटकार के बाद प्रस्ताव वापस करने को प्रार्थनापत्र भी प्रस्तुत किया गया लेकिन जिला प्रशासन से इसे यह कहकर निरस्त कर दिया कि जब अविश्वास प्रस्ताव के समय 19 शपथपत्र दिए गए तो प्रस्ताव वापसी का प्रार्थनापत्र सिर्फ एक नाम से कैसे माना जा सकता है। अविश्वास प्रस्ताव वापस न होने के दिन से ही इसका गिरना तय मान लिया गया था और शायद इसलिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले ही बैठक में पहुंचने का साहस नहीं जुटा सके।
चैंबर में बैठी रहीं जिला पंचायत अध्यक्ष
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा एवं वोटिंग के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र सहित सभी 34 सदस्यों को पत्र भेजे गए थे। इसमें बैठक में केवल अर्चना वर्मा ही उपस्थित हुईं। जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र भी जिला पंचायत कार्यालय पहुंच, लेकिन विरोधी खेमे के सदस्यों द्वारा बैठक में पहुंचने का साहस न जुटा पाने के कारण वह अपने कार्यालय में बैंठ वहीं से ही बैठक पर नजर रखे रहीं।
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खुद आने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके प्रस्तावक
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को शपथ पत्र देने वाले अन्य सदस्य तो दूर स्वयं प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाली शोभना देवी ही बैठक में पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। दरअसल जल्दबाजी और बिना पार्टी हाईकमान को विश्वास में लिए प्रस्तुत किए इस अविश्वास प्रस्ताव को पहले दिन से ही कमजोर माना जा रहा था। पहला झटका प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अगले दिन ही तब लगा जब 19 सदस्यों के सौंपे गए शपथपत्र में शामिल तीन सदस्यों ने तत्कालीन डीएम के समक्ष प्रस्तुत होकर अध्यक्ष के पक्ष में होने का दावा करते हुए शपथ पत्र दिए थे और एक दिन पूर्व उनके नाम से दाखिल हुए शपथपत्रों पर फर्जी हस्ताक्षर होना बताया था। इसके बाद दूसरा झटका पार्टी हाईकमान की फटकार के चलते लगा। पार्टी की फटकार के बाद प्रस्ताव वापस करने को प्रार्थनापत्र भी प्रस्तुत किया गया लेकिन जिला प्रशासन से इसे यह कहकर निरस्त कर दिया कि जब अविश्वास प्रस्ताव के समय 19 शपथपत्र दिए गए तो प्रस्ताव वापसी का प्रार्थनापत्र सिर्फ एक नाम से कैसे माना जा सकता है। अविश्वास प्रस्ताव वापस न होने के दिन से ही इसका गिरना तय मान लिया गया था और शायद इसलिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले ही बैठक में पहुंचने का साहस नहीं जुटा सके।
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चैंबर में बैठी रहीं जिला पंचायत अध्यक्ष
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा एवं वोटिंग के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र सहित सभी 34 सदस्यों को पत्र भेजे गए थे। इसमें बैठक में केवल अर्चना वर्मा ही उपस्थित हुईं। जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र भी जिला पंचायत कार्यालय पहुंच, लेकिन विरोधी खेमे के सदस्यों द्वारा बैठक में पहुंचने का साहस न जुटा पाने के कारण वह अपने कार्यालय में बैंठ वहीं से ही बैठक पर नजर रखे रहीं।
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