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पांच डॉक्टरों के तबादले के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी पर संकट
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जिला अस्पताल इमरजेंसी वार्ड।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। विभिन्न विभागों के साथ स्वास्थ्य विभाग में भी बड़ी संख्या में तबादले हुए हैं। जिला अस्पताल के ही पांच डॉक्टरों का तबादला हो गया है। इससे इमरजेंसी और ओटी में डॉक्टरों का संकट खड़ा गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि लंब अरसे से रिक्त चल रहा दंत रोग विशेषज्ञ का पद भर गया है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 27 पद हैं, जिनमें तैनाती सिर्फ 15 की थी। पिछले दिनों हुए तबादलों में जिला अस्पताल के पांच डॉक्टर शामिल हैं। इनमें ईएनटी डॉ. एके मिश्रा, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जगदीश प्रसाद, जिला अस्पताल के एकमात्र सर्जन डॉ. पीके अग्रवाल, ईएमओ डॉ. सुधीर व्यास और एनेस्थियोलॉजिस्ट डॉ. निशिकांत गुप्ता शामिल हैं। इनकी जगह रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विनोद कुमार वर्मा और दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता सक्सेना जिला अस्पताल को मिले हैं।
वहीं, इमरजेंसी में प्रतिदिन चार डॉक्टरों की जरूरत होती है। एक अवकाश पर रहता है तो तीन डॉक्टर शिफ्टों में ड्यूटी करते हैं। इसमें भी सर्जन और एनेस्थियोलॉजिस्ट डॉक्टर सबसे अहम होते हैं। इनकी जरूरत इमरजेंसी के साथ ऑपरेशन के लिए भी होती है। अब जिला अस्पताल में एक भी सर्जन डॉक्टर नहीं है। इससे इमरजेंसी और ओटी में दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। अब जिला अस्पताल में कुल डॉक्टरों की संख्या 12 ही रह गई है।
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पांच डॉक्टरों के तबादले हुए हैं और दो डॉक्टर मिले हैं। प्रतिदिन तीन डॉक्टरों की जरूरत इमरजेंसी में ही होती है। सर्जन न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत होगी। -डॉ. वीके तिवारी, सीएमएस
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 27 पद हैं, जिनमें तैनाती सिर्फ 15 की थी। पिछले दिनों हुए तबादलों में जिला अस्पताल के पांच डॉक्टर शामिल हैं। इनमें ईएनटी डॉ. एके मिश्रा, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जगदीश प्रसाद, जिला अस्पताल के एकमात्र सर्जन डॉ. पीके अग्रवाल, ईएमओ डॉ. सुधीर व्यास और एनेस्थियोलॉजिस्ट डॉ. निशिकांत गुप्ता शामिल हैं। इनकी जगह रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विनोद कुमार वर्मा और दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता सक्सेना जिला अस्पताल को मिले हैं।
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वहीं, इमरजेंसी में प्रतिदिन चार डॉक्टरों की जरूरत होती है। एक अवकाश पर रहता है तो तीन डॉक्टर शिफ्टों में ड्यूटी करते हैं। इसमें भी सर्जन और एनेस्थियोलॉजिस्ट डॉक्टर सबसे अहम होते हैं। इनकी जरूरत इमरजेंसी के साथ ऑपरेशन के लिए भी होती है। अब जिला अस्पताल में एक भी सर्जन डॉक्टर नहीं है। इससे इमरजेंसी और ओटी में दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। अब जिला अस्पताल में कुल डॉक्टरों की संख्या 12 ही रह गई है।
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पांच डॉक्टरों के तबादले हुए हैं और दो डॉक्टर मिले हैं। प्रतिदिन तीन डॉक्टरों की जरूरत इमरजेंसी में ही होती है। सर्जन न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत होगी। -डॉ. वीके तिवारी, सीएमएस