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मुनींद्र देव शर्मा राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित

Mon, 31 Aug 2015 11:31 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Mon, 31 Aug 2015 11:31 PM IST
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Dev Sharma, president Munindra The awardees

शांति निकेतन संस्कृत माध्यमिक विद्यालय कनाकोर के प्रधानाचार्य मुनींद्र देव शर्मा का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति श्री शर्मा को सम्मानित करेंगे। जनपद में संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य पहले ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें यह सम्मान हासिल होगा।

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मूल रूप से बरेली जनपद के कस्बा फरीदपुर निवासी आचार्य मुनींद्र देव शर्मा ने वर्ष 1888 से शांति निकेतन संस्कृत विद्यालय कनाकोर में प्रधानाचार्य पद से शिक्षक कार्य प्रारंभ किया था। बताया कि राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होने की जानकारी सोमवार को ही मिली। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में मात्र दो संस्कृत विद्यालय के शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।
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पुरस्कार पाने वाले दूसरे शिक्षक संस्कृत माध्यमिक विद्यालय सोनहा जिला बस्ती के रामअजोर शुक्ला है। उन्हें यह सम्मान पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी देंगे। उन्होंने जिले के संस्कृृत विद्यालयों में छात्रों की घटती संख्या के पीछे संस्कृत अध्यापकों की कमी होना बताया। कहा कि जिले में दो विद्यालय आज भी अध्यापक विहीन चल रहे हैं।
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चयन होने पर दी बधाई
माध्यमिक संस्कृत शिक्षक कल्याण समिति की बैठक में प्रधानाचार्य मुनींद्र देव शर्मा के राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन होने पर उन्हें बधाई दी गई है। बैठक में मंत्री भगवान दत्त शुक्ला, डॉ. नारायणदास शर्मा, हेमदेव आर्य, रामवीर सिंह, प्रसादीलाल, जंगबहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।


सरकार संस्कृत विद्यालयों को दे सुविधा
राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित हुए संस्कृत विद्यालय कनाकोर के प्रधानाचार्य मुनींद्र देव शर्मा संस्कृत शिक्षा की हो रही उपेक्षा पर कहते हैं कि  शासन संस्कृत विद्यालयों पर ध्यान नहीं दे रहा है। अब जिले को ही लें तो यहां के पांच संस्कृत विद्यालयों में से ललित आर्दश माध्यमिक संस्कृत विद्यालय बीसलपुर व नेहरू स्मारक संस्कृत माध्यमिक विद्यालय बकैनिया अध्यापकविहीन चल रहे हैं। अध्यापक न होने के चलते ही इन विद्यालयों में छात्रों की संख्या भी तेजी से घटी है। संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार में भी उतनी दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार यदि संस्कृत विद्यालयों को सुविधा दें तो संस्कृत शिक्षा की स्थिति में खासा सुधार हो सकता है।

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