{"_id":"5f5fb9b38ebc3efba7678a9e","slug":"death-case-pilibhit-news-bly4198353199","type":"story","status":"publish","title_hn":"झगड़े में घायल महिला को छह घंटे बाद मिला इलाज, तब तक चली गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झगड़े में घायल महिला को छह घंटे बाद मिला इलाज, तब तक चली गई जान
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पीलीभीत। दो पक्षों के बीच रात नौ बजे का झगड़ा हो गया। झगड़े में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो जाती है। परिवार वाले उसे लेकर थाने लेकर पहुंचते हैं। पुलिस न तो उनकी रिपोर्ट दर्ज करती है, न ही अस्पताल में तुरंत इलाज शुरू करने के लिए मजरूबी चिट्ठी लिखती है। मुंशी उसे तुरंत अस्पताल जाने को कह देता है। अस्पताल पुलिस केस बताकर गंभीर मरीज को थाने भेज देता है। परिवार वाले महिला को लेकर फिर से थाने पहुंचते हैं। तब भी थाना प्रभारी और मुंशी उनकी बात नहीं सुनते हैं। पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से महिला दोबारा रात तीन बजे के बाद अस्पताल पहुंची। सुबह पांच बजे इलाज शुरू हो पाया। तब तक उसकी जान चली गई। अगर महिला को समय रहते इलाज मिल जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की संवेदनहीनता की यह कहानी मुसीबत के समय हद दर्जे की लापरवाही बयां करने के लिए काफी है। न्यूरिया थाना क्षेत्र बनकटी गांव में धर्मेंद्र कुमार का गांव के ही उमेश से पुरानी रंजिश में शुक्रवार रात नौ बजे विवाद हो गया। दोनों पक्षों में मारपीट हुई। धर्मेंद्र की मां जमुना देवी के सिर में चोट लग गई। वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। बेटे ने मौके डायल 112 को सूचना दी। डायल 112 पुलिस ने 108 एंबुलेंस बुलाकर उसे जिला अस्पताल भेज दिया। यहां डॉक्टरों ने मारपीट का केस बताते हुए इलाज करने के बजाय थाने से मजरूबी चिट्ठी लाने को कहा। महिला एंबुलेंस ही दोबारा बेटे के साथ रात 11 बजे न्यूरिया थाने पहुंची। वहां ड्यूटी पर तैनात मुंशी को तहरीर दी। मुंशी ने रिपोर्ट दर्ज न करके उसे फिर जिला अस्पताल जाने को कह दिया। बेटा एक घंटे थाने के चक्कर काटता रहा। पुलिस ने उसकी तहरीर पर तब बमुश्किल एनसीआर दर्ज की। उसके बाद थाने से एक सिपाही के साथ गंभीर घायल महिला को न्यूरिया सीएचसी पर भेज दिया। वहां डॉक्टरों ने उसका मेडिकल करने के बाद तुरंत भर्ती कर लिया। सीएचसी में हालत गंभीर होने पर महिला को शनिवार सुबह तीन बजे जिला अस्पताल रेफर किया। तब महिला के परिवार वाले सुबह तीन बजे टेंपो से उसे लेकर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। शनिवार सुबह पांच बजे जिला अस्पताल में महिला की मौत हो गई। छह घंटे से ज्यादा समय तक महिला इलाज के लिए तरसती रही। पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही में महिला की जान चली गई। जिला अस्पताल में अगर महिला का तुरंत इलाज शुरू हो जाता तो उसकी जान बच सकती थी। यह बात जब एसपी को पता चली तो उन्होंने इंस्पेक्टर न्यूरिया खीम सिंह जलाल और मुंशी अवधेश को निलंबित किया।
इमरजेंसी ड्यूटी पर स्टाफ घायलों को पहले प्राथमिक उपचार देते हैं। महिला के परिवार वाले मेडिकल पर अड़े थे। पुलिस की चिट्ठी के बिना मेडिकल संभव नहीं था। तीमारदार बिना बताए अस्पताल से चले गए। फिर दोबारा सुबह तीन बजे भर्ती कराया। - डॉ. रतन पाल सिंह सुमन, सीएमएस
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लापरवाही बरतने में इंस्पेक्टर और मुंशी को निलबिंत कर दिया गया। महिला के बेटे की तहरीर पर गैर इरातदन हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच कराई जा रही है। - जयप्रकाश, एसपी
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पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की संवेदनहीनता की यह कहानी मुसीबत के समय हद दर्जे की लापरवाही बयां करने के लिए काफी है। न्यूरिया थाना क्षेत्र बनकटी गांव में धर्मेंद्र कुमार का गांव के ही उमेश से पुरानी रंजिश में शुक्रवार रात नौ बजे विवाद हो गया। दोनों पक्षों में मारपीट हुई। धर्मेंद्र की मां जमुना देवी के सिर में चोट लग गई। वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। बेटे ने मौके डायल 112 को सूचना दी। डायल 112 पुलिस ने 108 एंबुलेंस बुलाकर उसे जिला अस्पताल भेज दिया। यहां डॉक्टरों ने मारपीट का केस बताते हुए इलाज करने के बजाय थाने से मजरूबी चिट्ठी लाने को कहा। महिला एंबुलेंस ही दोबारा बेटे के साथ रात 11 बजे न्यूरिया थाने पहुंची। वहां ड्यूटी पर तैनात मुंशी को तहरीर दी। मुंशी ने रिपोर्ट दर्ज न करके उसे फिर जिला अस्पताल जाने को कह दिया। बेटा एक घंटे थाने के चक्कर काटता रहा। पुलिस ने उसकी तहरीर पर तब बमुश्किल एनसीआर दर्ज की। उसके बाद थाने से एक सिपाही के साथ गंभीर घायल महिला को न्यूरिया सीएचसी पर भेज दिया। वहां डॉक्टरों ने उसका मेडिकल करने के बाद तुरंत भर्ती कर लिया। सीएचसी में हालत गंभीर होने पर महिला को शनिवार सुबह तीन बजे जिला अस्पताल रेफर किया। तब महिला के परिवार वाले सुबह तीन बजे टेंपो से उसे लेकर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। शनिवार सुबह पांच बजे जिला अस्पताल में महिला की मौत हो गई। छह घंटे से ज्यादा समय तक महिला इलाज के लिए तरसती रही। पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही में महिला की जान चली गई। जिला अस्पताल में अगर महिला का तुरंत इलाज शुरू हो जाता तो उसकी जान बच सकती थी। यह बात जब एसपी को पता चली तो उन्होंने इंस्पेक्टर न्यूरिया खीम सिंह जलाल और मुंशी अवधेश को निलंबित किया।
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इमरजेंसी ड्यूटी पर स्टाफ घायलों को पहले प्राथमिक उपचार देते हैं। महिला के परिवार वाले मेडिकल पर अड़े थे। पुलिस की चिट्ठी के बिना मेडिकल संभव नहीं था। तीमारदार बिना बताए अस्पताल से चले गए। फिर दोबारा सुबह तीन बजे भर्ती कराया। - डॉ. रतन पाल सिंह सुमन, सीएमएस
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लापरवाही बरतने में इंस्पेक्टर और मुंशी को निलबिंत कर दिया गया। महिला के बेटे की तहरीर पर गैर इरातदन हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच कराई जा रही है। - जयप्रकाश, एसपी