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सहालग का अंतिम दिन आज, चातुर्मास 20 से
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पीलीभीत। देवशयनी एकादशी यानी 20 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाएंगे। इस दिन से समस्त मांगलिक एवं शुभ कार्य चार माह के लिए थम जाएंगे। हालांकि देवशयनी एकादशी से ठीक पहले शुभ विवाह मुहूर्त रविवार यानी 18 जुलाई को है।
सनातन धर्म में चातुर्मास का बड़ा महत्व है। इसे वर्षा काल भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर आराम करने के लिए चले जाते हैं। इसके साथ ही समस्त मांगलिक और शुभ कार्य थम जाते हैं। इसके बाद मांगलिक कार्य कार्तिक मास की देव उठनी एकादशी से शुरू होते हैं।
पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक चातुर्मास से पहले 18 जुलाई रविवार को भड़ली नवमी मनाई जाएगी। यह विवाह के लिए शुभ तिथि है। चातुर्मास में आषाढ़, सावन, भादों, अश्विन और कार्तिक मास के 15 दिन रहते हैं। सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। सावन में शिव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देवशयनी एकादशी से प्रभु शयन करते हैं और देवोत्थान एकादशी पर उठते हैं। इसी के साथ मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते हैं। इस एकादशी की बड़ी महत्ता है।
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पुष्य नक्षत्र में आएंगे सूर्य, रहेंगे 15 दिन
देवशयनी एकादशी पर भगवान सूर्य पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में सूर्च 15 दिन रहेंगे। पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक सूर्य एक नक्षत्र में 15 दिन और चंद्रमा एक नक्षत्र में एक दिन रहते हैं। सूर्य के पुष्य नक्षत्र में होने से सिंह राशि के जातकों और राजकीय सेवा में लगे लोगों को विशेष लाभ प्राप्त होगा। इस दौरान मध्यम वर्षा का भी योग है।
चातुर्मास में मनेंगे बड़े त्योहार
चातुर्मास में भले ही मांगलिक कार्य न होते हो, लेकिन सनातन धर्म के लगभग सभी बड़े त्योहार इसी अवधि में मनाए जाते हैं। भगवान शिव का प्रिय महीना सावन के अलावा भादों में गणेश उत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, अश्विन में शारदीय नवरात्र, दशहरा और कार्तिक में दीपावली मनाई जाती है।
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सनातन धर्म में चातुर्मास का बड़ा महत्व है। इसे वर्षा काल भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर आराम करने के लिए चले जाते हैं। इसके साथ ही समस्त मांगलिक और शुभ कार्य थम जाते हैं। इसके बाद मांगलिक कार्य कार्तिक मास की देव उठनी एकादशी से शुरू होते हैं।
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पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक चातुर्मास से पहले 18 जुलाई रविवार को भड़ली नवमी मनाई जाएगी। यह विवाह के लिए शुभ तिथि है। चातुर्मास में आषाढ़, सावन, भादों, अश्विन और कार्तिक मास के 15 दिन रहते हैं। सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। सावन में शिव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देवशयनी एकादशी से प्रभु शयन करते हैं और देवोत्थान एकादशी पर उठते हैं। इसी के साथ मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते हैं। इस एकादशी की बड़ी महत्ता है।
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पुष्य नक्षत्र में आएंगे सूर्य, रहेंगे 15 दिन
देवशयनी एकादशी पर भगवान सूर्य पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में सूर्च 15 दिन रहेंगे। पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक सूर्य एक नक्षत्र में 15 दिन और चंद्रमा एक नक्षत्र में एक दिन रहते हैं। सूर्य के पुष्य नक्षत्र में होने से सिंह राशि के जातकों और राजकीय सेवा में लगे लोगों को विशेष लाभ प्राप्त होगा। इस दौरान मध्यम वर्षा का भी योग है।
चातुर्मास में मनेंगे बड़े त्योहार
चातुर्मास में भले ही मांगलिक कार्य न होते हो, लेकिन सनातन धर्म के लगभग सभी बड़े त्योहार इसी अवधि में मनाए जाते हैं। भगवान शिव का प्रिय महीना सावन के अलावा भादों में गणेश उत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, अश्विन में शारदीय नवरात्र, दशहरा और कार्तिक में दीपावली मनाई जाती है।