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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Wife of the false story that was hatched to digest right

बीवी का हक हजम करने को रची हत्या की झूठी कहानी

Tue, 18 Oct 2016 11:19 PM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला पीलीभ्ाीत
ब्ययूराो, अमर उजाला पीलीभ्ाीत Updated Tue, 18 Oct 2016 11:19 PM IST
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पहली पत्नी की ओर से किए गए हर्जा-खर्चा के मुकदमे से बचने और दूसरी शादी रचाने के लिए नौगवां पकड़िया गांव के ट्रक चालक इमरान ने अपनी ही हत्या की झूठी कहानी रच दी। लापता होने के बाद मां रेशमा से पत्नी व उसके बहनोई पर कोर्ट के आदेश पर हत्या का केस दर्ज करा दिया। छानबीन के दौरान जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो सारा सच सामने आ गया। गवाहों से ट्रक चालक के जिंदा होने के प्रमाण पुलिस को मिलते चले गए। इन्ही साक्ष्यों के आधार पर सुनगढ़ी पुलिस ने हत्या के मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाई है।
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शहर से सटे नौगवां पकड़िया गांव निवासी 28 वर्षीय इमरान पुत्र हामिद ट्रक चालक है। आठ साल पहले उसकी शादी गांव क ी ही चंदा बेगम से हुई। जिससे उसको चार बच्चे सलमान (8), रिजवान (6), महक (4) और गुडिया (2) हैं। पुलिस के मुताबिक पिछले कुछ समय में दंपति के बीच रिश्तों में दरार पड़नी शुरू हो गई। इस बीच पत्नी चंदा बेगम ने कोर्ट में हर्जा-खर्चा का एक वाद डाल दिया। इसके बाद 15 दिसंबर 2015 को अचानक इमरान गायब हो गया। एक जुलाई 2016 को कोर्ट के आदेश पर इमरान की हत्या के आरोप में मां रेशमा ने सुनगढ़ी थाने में पत्नी चंदा बेगम और बहनोई याकूब के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। इसके बाद से पुलिस मामले की छानबीन करती रही। एसएसआई मनोज कुमार त्यागी के तबादले के बाद विवेचना इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल शर्मा ने की। छानबीन के दौरान जो सामने आया, उसे देख पुलिस भी दंग रह गई। जिस ट्रक चालक इमरान की हत्या के मुकदमे की पुलिस छानबीन कर रही थी, वह जिंदा निकला। इसके कई प्रमाण पुलिस मिले, यहां तक कि केस दर्ज कराने वाली मां ने भी स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार पत्नी की ओर से हर्जा-खर्चा के केस बचने के लिए उसने ऐसा किया था। इसके बाद सितारगंज में दूसरी शादी कर ली और नाम बदलकर रहने लगा था। तमाम लोगों के बयान दर्ज करने और जिंदा होने से जुड़े सामने आए प्रमाणों के  आधार पर पुलिस ने हत्या के मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। 
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मां से मिलने आता था इमरान 
पुलिस का कहना है कि बेटे की हत्या का मुकदमा दर्ज कराने वाली मां रेशमा को उसके जिंदा होने की पूरी जानकारी थी। वह गायब होने के बाद कई बार पीलीभीत भी आया था। उसके साथ दूसरी पत्नी भी घर आई थी। जिसको गांव के तमाम लोगों ने भी देखा था। इसके अलावा जिले के बाहर भी गांव के कई लोगों ने इमरान से मुलाकात की। सभी के बयान दर्ज कर पुलिस ने अंतिम कार्रवाई की है। 
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अब सितारगंज से भी भागा इमरान 
पुलिस भले ही इमरान को जिंदा बता रही हो, लेकिन अभी वह हत्थे नहीं लग सका है। मां रेशमा ने पुलिस को दिए शपथ पत्र में झूठा मुकदमा दर्ज कराने की बात कबूल की, लेकिन यह भी बताया कि पुलिस के सामने झूठ खुलने पर वह सितारगंज से निकल गया है। अब बरेली में आकर रह रहा है, कहंा इसकी जानकारी किसी को नहंी है। हालांकि पुलिस उसका पता लगाने के लिए लगातार प्रयास जारी रखने की बात कह रही है। 

शुरूआत से पुलिस को था संदेह 
पुलिस को इमरान की हत्या किए जाने को लेकर शुरूआत से ही संदेह था। लापता होने के बाद मां रेशमा की ओर से पहले अफसरों से मुलाकात कर सीधे केस दर्ज कराने की कोशिश की गई थी। इसके बाद कोर्ट की शरण में जाकर कार्रवाई कराई। पूरे मामले में न तो इमरान की लाश मिली, न ही कोई ऐसा सामान। जिससे उसकी हत्या किए जाने की स्थिति स्पष्ट हो सके या फिर शिनाख्त। विवेचना के दौरान जहां जिंदा होने के प्रमाण मिलते गए, वहीं मौत को लेकर कोई सबूत सामने नहीं आ सका है। 

प्रमाण मिला तो खारिज होगी एफआर
इंस्पेक्टर सुनगढ़ी योगेंद्र पाल शर्मा ने बताया कि मुकदमे में सामने आए तथ्यों के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। इमरान की मां, उसकी पत्नी व गांव के तमाम लोगों ने उसके जीवित होने के शपथपत्र भी पुलिस को दिए हैं। अगर कोई ऐसा तथ्य सामने आता है, जिससे उसके मरने की पुष्टि हो सके, तो एफआर कैंसिल की जाएगी। 


ट्रक चालक इमरान की हत्या का मामला झूठा था। छानबीन के दौरान उसके जिंदा होने के प्रमाण मिले है। वह सितारगंज में नाम बदल, दूसरी शादी कर रह रहा था। अब वहां से बरेली में कहीं रहने चला गया है, उसका पता लगाया जा रहा है। मां की ओर से दर्ज कराए मुकदमें में एफआर लगा दी गई है। 
निर्मल कुमार विष्ट, सीओ सिटी 
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