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बच्चे को लेने जा रहा था, पुलिस ने मार दी गोली
Purnpur
Updated Fri, 24 Jul 2015 11:28 PM IST
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गांव के रमाकांत ने बताया कि उसका छह वर्षीय पुत्र विवेक गांव के समीप दूसरे गांव में प्राइवेट स्कूल में कक्षा दो का छात्र है। अपरान्ह को बच्चे की छुट्टी पर उसे लेने स्कूल बाइक से जा रहा था। इस दौरान पथराव होने लगा। रमाकांत का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने फायरिंग कर दी। जिसके छर्रे उसे लगे।
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वृद्ध की पिटाई पर फूटा लोगों में गुस्सा
गांव के वीरेंद्र आदि लोगों ने बताया कि सब कुछ शांति पूर्वक चल रहा था। जब अफसर दूसरे समुदाय के लोगों से बात करने जा रहे थे, तब पीछे चल रहे लोगों में गांव निवासी 70 वर्षीय टीकाराम ने जयश्रीराम का नारा लगा दिया। इस पर पुलिस ने टीकाराम की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। इस पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिणाम स्वरूप एक तरफ से ईटें, पत्थर और दूसरे तरफ से डंडे चलने लगे।
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ईद के बाद से शुरू कर दी गई थी आपत्ति
मदरसा के हाफिज मोहम्मद शाकिर रजा और गांव निवासी कमालुद्दीन आदि ने बताया कि 17 साल पहले से गांव में मदरसा है। पहले खपरैल में मदरसा चल रहा था। करीब एक माह पहले खपरैल जर्जर होने पर टीनशेड डाला गया। तब दूसरे समुदाय के लोग मदरसा को मस्जिद बनाने का आरोप लगाने लगे। उन्होंने बताया कि मदरसा में बहुत पहले से नमाज पढ़ी जाती है। अलविदा, ईद की नमाज भी मदरसा में पढ़ी गई। तब गांव में पुलिस भी मौजूद रही। अलविंदा वाले दिन कुछ लोगों ने नई परंपरा डालने का आरोप लगाते हुए विरोध किया था। शुक्रवार को फिर न विवाद हो। इसके लिए प्रशासन को पहले से ही सूचना दी गई थी। शुक्रवार को लोग मदरसा में नमाज पढने जा रहे थे। योजनाबंद्ध ढंग से मदरसा के समीप एकत्र दूसरे समुदाय के लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। तब वे लोग भाग कर घरों में छिप गए। उन लोगों की ओर से कोई पथराव नहीं हुआ। विवाद को लेकर वे लोग जुमे की नमाज भी नहीं पढ़ सके।
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...तो डाली जा सकती थी घटना
यदि दस दिन पूर्व मदरसे में खपैरल के स्थान पर मुस्लिम समुदाय ने टीने न डाली होती, तो यह घटना टाली जा सकती थी। हुआ यह कि मदरसे में खपरैल पड़ी थी, वहां ईद और अलविदा की नमाज भी होती, लेकिन दस दिन पूर्व खपरैल को हटाकर टीन शेड डाल दी गई। जिस कारण दूसरे समुदाय में यह बात फैल गई कि मस्जिद का निर्माण हो रहा है।
सात वर्ष पूर्व मदरसे में लगा दी गई थी आग
वर्ष 1997 में भी विवाद के चलते मदरसे में आग लगा दी गई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था। तभी से मदरसा चल रहा था और ईद और अलविदा की नमाज होती आ रही है।
बच्चे व महिलाएं पलायन को हुए विवश
शुक्रवार घटना के बाद समुदाय विशेष के लोगों में खासी दहशत है। वह आबादी में अपनी कम संख्या को लेकर खासे चिन्तित दिखे। यही वजह रही कि इस समुदाय के घरों की महिलाएं व बच्चे अपने घरों को छोड़कर खेतों के बीच होकर पलायन कर गए।
सिखों ने की मदद
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस दौरान एक समुदाय विशेष की महिलाएं व बच्चे भय के कारण खेतों से होते पलायन कर रहे थे उस समय सिख समुदाय के लोगों ने महिलाओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में उनकी पूरी मदद की।