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हैचरियों पर लगा लाखों के घोटाले का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा।
Updated Tue, 19 Sep 2017 11:21 PM IST
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मछली
- फोटो : self
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- शारदा सागर डैम में मछली के बच्चे छोड़ने के नाम पर खेल
शारदासागर डैम में नामित सदस्यों की देखरेख में एक करोड़ मछली के बच्चे छोड़ने के नाम पर अधिकारियों ने बड़ा खेल खेला है। तलहटी में बसी महाराजपुर की नामित ग्राम प्रधान ने मुख्य महा प्रबंधक मत्सय निगम को शिकायती पत्र भेजकर हैचरियों को बच्चे छोड़े जाने का भुगतान जांच करने के बाद देने की मांग की हैं।
डा. सुषमारानी शर्मा मुख्य महाप्रबंधक मत्स्य निगम के निर्देश पर शारदा सागर डैम में एक करोड़ मछली के बच्चे छोड़ने के निर्देश दिया गया था। जिसमें 75 लाख बच्चा खुटार हैचरी शाहजहांपुर, 25 लाख मछली के बच्चे सरयू हैचरी फैजाबाद से लाकर छोड़े जाने थे। इस वर्ष जलाशयों की निलामी ठेका न होने के चलते मुख्य महाप्रबंधक ने शासन के निर्देश पर बच्चा संचय के लिए संबंधित ग्राम प्रधान, जनपद की मुख्य कार्य अधिकारी, संबंधित हैचरी एवं उसके द्वारा नामित प्रतिनिधि, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता सिंचाई ने यह निर्णय लिया था कि उक्त सीमित सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से जलाशय में मत्स्य बीज संचय के उपरांत मत्स्य बीज पंचायत से संबंधित प्रमाणपत्र आधारित प्रारूप पर हस्ताक्षर कर दिया जाएगा।
महाराजपुर की नामित प्रधान आशा मिस्त्री ने महाप्रबंधक को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि उनकी गैर मौजूदगी में 24 लाख मत्स्य बीज संचय करा कर बिल सत्यापित कराने को लाया गया था। तब उन्होंने कह दिया था कि दोबारा जब बीज बच्चा छोड़ा जाए तो उन्हें अवगत कराया जाए। जिससे वह गिनती कर बीज संचय करवा देंगी। उन्होंने कहा कि अगले दिन मौके पर जाकर दो पैकेट की गिनती करने पर एक पैकेट में एक हजार बच्चा बीज के स्थान पर सिर्फ चार सौ ही निकले। इस तरह दस हजार पैकेटों में एक करोड़ के स्थान पर मात्र 40 लाख बीज ही उनके कर्मचारियों ने संचय किया है। ऐसे में बीज संचय के नाम पर बड़ा खेल खेला गया है। इसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस लिए हैचरियों को बीज संचय का भुगतान करने से पूर्व जांच करा ली जाए। उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर भी की है।
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शारदासागर डैम में नामित सदस्यों की देखरेख में एक करोड़ मछली के बच्चे छोड़ने के नाम पर अधिकारियों ने बड़ा खेल खेला है। तलहटी में बसी महाराजपुर की नामित ग्राम प्रधान ने मुख्य महा प्रबंधक मत्सय निगम को शिकायती पत्र भेजकर हैचरियों को बच्चे छोड़े जाने का भुगतान जांच करने के बाद देने की मांग की हैं।
डा. सुषमारानी शर्मा मुख्य महाप्रबंधक मत्स्य निगम के निर्देश पर शारदा सागर डैम में एक करोड़ मछली के बच्चे छोड़ने के निर्देश दिया गया था। जिसमें 75 लाख बच्चा खुटार हैचरी शाहजहांपुर, 25 लाख मछली के बच्चे सरयू हैचरी फैजाबाद से लाकर छोड़े जाने थे। इस वर्ष जलाशयों की निलामी ठेका न होने के चलते मुख्य महाप्रबंधक ने शासन के निर्देश पर बच्चा संचय के लिए संबंधित ग्राम प्रधान, जनपद की मुख्य कार्य अधिकारी, संबंधित हैचरी एवं उसके द्वारा नामित प्रतिनिधि, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता सिंचाई ने यह निर्णय लिया था कि उक्त सीमित सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से जलाशय में मत्स्य बीज संचय के उपरांत मत्स्य बीज पंचायत से संबंधित प्रमाणपत्र आधारित प्रारूप पर हस्ताक्षर कर दिया जाएगा।
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महाराजपुर की नामित प्रधान आशा मिस्त्री ने महाप्रबंधक को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि उनकी गैर मौजूदगी में 24 लाख मत्स्य बीज संचय करा कर बिल सत्यापित कराने को लाया गया था। तब उन्होंने कह दिया था कि दोबारा जब बीज बच्चा छोड़ा जाए तो उन्हें अवगत कराया जाए। जिससे वह गिनती कर बीज संचय करवा देंगी। उन्होंने कहा कि अगले दिन मौके पर जाकर दो पैकेट की गिनती करने पर एक पैकेट में एक हजार बच्चा बीज के स्थान पर सिर्फ चार सौ ही निकले। इस तरह दस हजार पैकेटों में एक करोड़ के स्थान पर मात्र 40 लाख बीज ही उनके कर्मचारियों ने संचय किया है। ऐसे में बीज संचय के नाम पर बड़ा खेल खेला गया है। इसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस लिए हैचरियों को बीज संचय का भुगतान करने से पूर्व जांच करा ली जाए। उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर भी की है।
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