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पीड़ितों को क्यों नहीं बताया नहीं हुई लूटे गए सामान की बरामदगी
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:12 PM IST
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डकैतियों के खुलासे के बाद लूटे गए सामान की बरामदगी को लेकर सवालों में घिरी पुलिस ने पीड़ितों से भी सामान की बरामदगी न होने की बात को छिपाई। बदमाशों के पकड़े जाने की सूचना मिलने पर न्यूरिया थाने पहुंचे पीड़ित पक्ष के लोगों को घंटों शिनाख्त के नाम पर पुलिस थाने में बैठाए रखा। बाद में शाम को उनको जेवरात गला दिए जाने की बात कहकर लौटा दिया गया।
बुधवार को एएसपी विकास कुमार वैद्य ने प्रेसवार्ता कर जिले में घटित डकैतियों के खुलासे का दावा किया था। पुलिस ने लखीमपुर जिले के भीरा क्षेत्र के निवासी लखपत उर्फ खोपड़ा समेत पांच बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी न्यूरिया क्षेत्र के कल्लिया गांव से दिखाई थी। पकड़े गए सभी बदमाश शातिर किस्म के थे, लेकिन बरामदगी के नाम पर पुलिस खाली हाथ थी। पहले से ही सवालों में घिरी पुलिस पर एक और आरोप लगा है। पुलिस ने बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित पक्ष के लोगों को थाने बुलाया था लेकिन उनसे यह बात छिपाई कि बरामदगी हुई ही नहीं है। शाम तक पीड़ित लोग बरामद सामान की शिनाख्त को थाने में रुके रहे। पुलिस भी रोके रहीऔर बाद में उनको लखीमपुर में जेवरात गलाए जाने की बात कहकर घर भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस के खुलासे पर तमाम सवाल उठते जा रहे है।
सराफ पर क्यों मेहरबान है पुलिस
खोपड़ा गैंग के तीन साथियों को पुलिस ने एक माह पूर्व गिरफ्तार कर पांच घटनाओं के खुलासे किए थे। बताया था कि पूरनपुर के एक सराफ के यहां लूट का माल बेचा गया था। अब इस बार लखीमपुर के सराफ के यहां जेवरात बेचने की बात पुलिस कह रही है, लेकिन अब तक न तो पूरनपुर के सराफ को पकड़ा गया और न ही लखीमपुर के सराफ पर कोई कार्रवाई की है। इतना ही नहीं दोनों के नाम मुकदमे में भी शामिल नहीं किए गए हैं। आखिर पुलिस इन सराफ पर मेहरबान क्यों हैं।
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पीठ थपथपाने वाले अब बचाव में जुटे
पकड़े गए बदमाशों से कुछ भी पता लगाने में पुलिस सफल नहीं हो सकी है। गुरूवार को पकड़े गए पांचों बदमाशों को पुलिस ने चालान कर दिया। लेकिन अंत तक बदमाश खुद की संलिप्तता घटनाओं में नकारते रहे, और पुलिस बेबस दिखाई दी। यही नहीं खुलासे को लेकर हुई फजीहत के बाद अब पहले से बड़े बड़े दावे करने वाले पुलिसकर्मी भी कन्नी काटने में जुट गए हैं। अफसरों के माथे पर भी शिकन दिखाई दी। हर कोई अधूरी कहानी को पूरा करने में जुटा है।
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बुधवार को एएसपी विकास कुमार वैद्य ने प्रेसवार्ता कर जिले में घटित डकैतियों के खुलासे का दावा किया था। पुलिस ने लखीमपुर जिले के भीरा क्षेत्र के निवासी लखपत उर्फ खोपड़ा समेत पांच बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी न्यूरिया क्षेत्र के कल्लिया गांव से दिखाई थी। पकड़े गए सभी बदमाश शातिर किस्म के थे, लेकिन बरामदगी के नाम पर पुलिस खाली हाथ थी। पहले से ही सवालों में घिरी पुलिस पर एक और आरोप लगा है। पुलिस ने बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित पक्ष के लोगों को थाने बुलाया था लेकिन उनसे यह बात छिपाई कि बरामदगी हुई ही नहीं है। शाम तक पीड़ित लोग बरामद सामान की शिनाख्त को थाने में रुके रहे। पुलिस भी रोके रहीऔर बाद में उनको लखीमपुर में जेवरात गलाए जाने की बात कहकर घर भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस के खुलासे पर तमाम सवाल उठते जा रहे है।
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सराफ पर क्यों मेहरबान है पुलिस
खोपड़ा गैंग के तीन साथियों को पुलिस ने एक माह पूर्व गिरफ्तार कर पांच घटनाओं के खुलासे किए थे। बताया था कि पूरनपुर के एक सराफ के यहां लूट का माल बेचा गया था। अब इस बार लखीमपुर के सराफ के यहां जेवरात बेचने की बात पुलिस कह रही है, लेकिन अब तक न तो पूरनपुर के सराफ को पकड़ा गया और न ही लखीमपुर के सराफ पर कोई कार्रवाई की है। इतना ही नहीं दोनों के नाम मुकदमे में भी शामिल नहीं किए गए हैं। आखिर पुलिस इन सराफ पर मेहरबान क्यों हैं।
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पकड़े गए बदमाशों से कुछ भी पता लगाने में पुलिस सफल नहीं हो सकी है। गुरूवार को पकड़े गए पांचों बदमाशों को पुलिस ने चालान कर दिया। लेकिन अंत तक बदमाश खुद की संलिप्तता घटनाओं में नकारते रहे, और पुलिस बेबस दिखाई दी। यही नहीं खुलासे को लेकर हुई फजीहत के बाद अब पहले से बड़े बड़े दावे करने वाले पुलिसकर्मी भी कन्नी काटने में जुट गए हैं। अफसरों के माथे पर भी शिकन दिखाई दी। हर कोई अधूरी कहानी को पूरा करने में जुटा है।