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बरामद किशोरी ने घर में फांसी लगा की खुदकुशी
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sun, 17 Apr 2016 10:52 PM IST
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पूरनपुर में पुलिस हिरासत में दो युवकों की मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि सर्किल पुलिस की एक और लापरवाही सामने आ गई है। क्षेत्र के युवक द्वारा बहला फुसला कर भगाई गई एक किशोरी को पुलिस ने आरोपी युवक के साथ शनिवार को बरामद कर लिया। पुलिस ने आरोपी युवक का चालान भी कर दिया तथा किशोरी का मेडिकल परीक्षण भी करा लिया, लेकिन उसका कोर्ट में बयान कराए बगैर परिवार वालों के सुपुर्दगी में दे दिया। रविवार को किशोरी का शव घर में लटका मिला। परिवार वालों के मुताबिक युवक के जेल जाने के बाद से उसके परिवार की महिलाओं ने उसके घर पहुंच काफी हंगामा किया व उनकी पुत्री को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद पुत्री ने फांसी लगा खुदकुशी कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है। घटना के बाद से पुलिस महकमे में हड़कंप है।
क्षेत्र के एक गांव की एक किशोरी का गांव के ही एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। बताया जाता है कि 12 अप्रैल को किशोरी अपने घर से खेत में गेहूं की बाली बिनने की बात कह कर गई थी। जहां से उसका प्रेमी उसे बहला फुसला कर भगा ले गया। बताया जाता है कि किशोरी के परिवार वालों ने घटना की सूचना उसी दिन पुलिस को दी लेकिन तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस ने आरोपी पक्ष के लोगों पर दबाव बनाया। जिसके बाद नाटकीय ढंग से 16 अप्रैल को गांव निवासी सुखविंदर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही आरोपी सुखविंदर को गिरफ्तार कर रविवार को कोर्ट के लिए चालान भेज दिया, लेकिन बरामद किशोरी का मेडिकल परीक्षण करा उसका कोर्ट में बयान कराने के बजाय पुलिस ने किशोरी को उसके परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया। सुबह किशोरी का शव उसके घर की दूसरी मंजिल पर धोती से लटका मिला। परिवार वालों के मुताबिक युवक के जेल जाने के बाद उसके घर की महिलाओं ने शनिवार को उनके घर पर पहुंच कर काफी हंगामा किया था तथा किशोरी को भला बुरा कहते हुए उसे आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया था। जिसके चलते उसने फांसी लगा खुदकुशी कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
पुलिस की इसमें लापरवाही नहीं हैं। रविवार के कारण किशोरी का मेडिकल परीक्षण व कोर्ट के लिए बयान नहीं हो सके। लड़की के परिवार वाले उसे लिखत पढ़त में अपने घर ले गए थे तथा आवश्यकता पडने पर बुलाने पर हाजिर करने को कहा था। किशोरी को कोतवाली में रखने की भी समस्या थी, लिहाजा परिवार वालों की सुपुर्दगी में दे दी गई थी। लड़की ने भी परिवार वालों के साथ जाने में कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
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-राजेश्वर सिंह, सीओ पूरनपुर
लड़की बरामद होने के बाद सबसे पहले पुलिस को उसका मेडिकल परीक्षण कराना चाहिए था। इसके बाद उसका कोर्ट में बयान होना चाहिए था। कोर्ट में अगर लड़की अपने परिवार वालों के साथ जाना चाहती तो उसे कोर्ट के आदेश पर परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया जाता वरना उसे नारी निकेतन भेजा जाता। बरामदगी के बाद जब तक किशोरी का मेडिकल व कोर्ट में बयान नहीं हो जाते तब तक किशोरी की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की होती है।
-किशन लाल, अध्यक्ष बार एसोसिएशन-
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क्षेत्र के एक गांव की एक किशोरी का गांव के ही एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। बताया जाता है कि 12 अप्रैल को किशोरी अपने घर से खेत में गेहूं की बाली बिनने की बात कह कर गई थी। जहां से उसका प्रेमी उसे बहला फुसला कर भगा ले गया। बताया जाता है कि किशोरी के परिवार वालों ने घटना की सूचना उसी दिन पुलिस को दी लेकिन तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस ने आरोपी पक्ष के लोगों पर दबाव बनाया। जिसके बाद नाटकीय ढंग से 16 अप्रैल को गांव निवासी सुखविंदर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही आरोपी सुखविंदर को गिरफ्तार कर रविवार को कोर्ट के लिए चालान भेज दिया, लेकिन बरामद किशोरी का मेडिकल परीक्षण करा उसका कोर्ट में बयान कराने के बजाय पुलिस ने किशोरी को उसके परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया। सुबह किशोरी का शव उसके घर की दूसरी मंजिल पर धोती से लटका मिला। परिवार वालों के मुताबिक युवक के जेल जाने के बाद उसके घर की महिलाओं ने शनिवार को उनके घर पर पहुंच कर काफी हंगामा किया था तथा किशोरी को भला बुरा कहते हुए उसे आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया था। जिसके चलते उसने फांसी लगा खुदकुशी कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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पुलिस की इसमें लापरवाही नहीं हैं। रविवार के कारण किशोरी का मेडिकल परीक्षण व कोर्ट के लिए बयान नहीं हो सके। लड़की के परिवार वाले उसे लिखत पढ़त में अपने घर ले गए थे तथा आवश्यकता पडने पर बुलाने पर हाजिर करने को कहा था। किशोरी को कोतवाली में रखने की भी समस्या थी, लिहाजा परिवार वालों की सुपुर्दगी में दे दी गई थी। लड़की ने भी परिवार वालों के साथ जाने में कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
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-राजेश्वर सिंह, सीओ पूरनपुर
लड़की बरामद होने के बाद सबसे पहले पुलिस को उसका मेडिकल परीक्षण कराना चाहिए था। इसके बाद उसका कोर्ट में बयान होना चाहिए था। कोर्ट में अगर लड़की अपने परिवार वालों के साथ जाना चाहती तो उसे कोर्ट के आदेश पर परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया जाता वरना उसे नारी निकेतन भेजा जाता। बरामदगी के बाद जब तक किशोरी का मेडिकल व कोर्ट में बयान नहीं हो जाते तब तक किशोरी की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की होती है।
-किशन लाल, अध्यक्ष बार एसोसिएशन-