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तराई में नहीं थम रहा आधी आबादी पर अत्याचार
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sun, 22 Jan 2017 10:33 PM IST
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जिले में महिला अपराध का आंकड़ा कम नहीं हो पा रहा है। अफसर रोकथाम को लेकर सख्त दावे कर रहे है। यही नहीं पुलिस इसके प्रति गंभीर नहीं दिखती। पिछले दो सालों की बात करें तो महिला अपराध में काफी बढ़ोत्तरी हुई। बलात्कार, दहेज हत्या से लेकर रेप के बाद हत्या जैसे संगीन अपराध अपेक्षाकृत अधिक हुए। छात्राओं से छेड़छाड़ की घटनाओं में भी इजाफा हुआ। यह हालत तब है जब कई मामलों को पुलिस ने संदिग्ध बताकर टाल दिया। कुछ पुलिस के पास पहुंचे ही नहीं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दावे ही किए जाते रहे हैं।
सड़कों पर नहीं दिखती महिला पुलिस
कहने को जिले के अधिकांश थानों में महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। शहर में एक महिला थाना है, लेकिन महिला सुरक्षा के नाम पर महिला पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखती। अधिकारियों की अनदेखी के चलते महिला हैल्पलाइन भी ठप पड़ी है।
पुलिस करती है टालमटोल
महिला अपराध में कार्रवाई करने से अधिक पुलिस घटना छिपाने में अधिक मेहनत करती है। वर्ष 2016 में ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। जहानाबाद में रेप पीड़ित किशोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाए उसको ही गलत ठहराया गया। तंज से तंग आकर किशोरी ने आत्मदाह कर जान दे दी। बीसलपुर के खरगापुर गांव में किशोरी मायादेवी की हत्या कर दी गई। इसका खुलासा करने के बजाए पुलिस ने नामजदगी पर सवाल उठाकर जांच में मामला टाल दिया।
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महिला अपराध के दो वर्ष के आंकड़े
अपराध 2016 2015
हत्या 06 12
दहेज हत्या 30 20
दुराचार 36 30
294 भादवि 11 08
354 भादवि 103 79
अपहरण 79 93
दहेज उत्पीड़न 186 108
रेप के बाद हत्या 05 शून्य
चेन स्नेचिंग 02 शून्य
सामूहिक दुष्कर्म 05 05
अपराध की सूचना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाती है। कहीं कोई लापरवाही करता है, तो जांच कर सख्त विभागीय कार्रवाई भी होती है। महिला अपराध या अन्य अपराध की रोकथाम पर पुलिस गंभीर है।
डॉ. रामसुरेश यादव, एएसपी
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सड़कों पर नहीं दिखती महिला पुलिस
कहने को जिले के अधिकांश थानों में महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। शहर में एक महिला थाना है, लेकिन महिला सुरक्षा के नाम पर महिला पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखती। अधिकारियों की अनदेखी के चलते महिला हैल्पलाइन भी ठप पड़ी है।
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पुलिस करती है टालमटोल
महिला अपराध में कार्रवाई करने से अधिक पुलिस घटना छिपाने में अधिक मेहनत करती है। वर्ष 2016 में ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। जहानाबाद में रेप पीड़ित किशोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाए उसको ही गलत ठहराया गया। तंज से तंग आकर किशोरी ने आत्मदाह कर जान दे दी। बीसलपुर के खरगापुर गांव में किशोरी मायादेवी की हत्या कर दी गई। इसका खुलासा करने के बजाए पुलिस ने नामजदगी पर सवाल उठाकर जांच में मामला टाल दिया।
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महिला अपराध के दो वर्ष के आंकड़े
अपराध 2016 2015
हत्या 06 12
दहेज हत्या 30 20
दुराचार 36 30
294 भादवि 11 08
354 भादवि 103 79
अपहरण 79 93
दहेज उत्पीड़न 186 108
रेप के बाद हत्या 05 शून्य
चेन स्नेचिंग 02 शून्य
सामूहिक दुष्कर्म 05 05
अपराध की सूचना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाती है। कहीं कोई लापरवाही करता है, तो जांच कर सख्त विभागीय कार्रवाई भी होती है। महिला अपराध या अन्य अपराध की रोकथाम पर पुलिस गंभीर है।
डॉ. रामसुरेश यादव, एएसपी