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अब कैसे पीले होंगे हाथ, इसी सदमे में चली गई जान
बिलसंडा/पीलीभीत।
Updated Fri, 10 Apr 2015 11:45 PM IST
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में चौपट हुई फसलों की बर्बादी से परेशान क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के दो
किसानों की मौत हो गई। गांव बेहटी का किसान प्रेमपाल फसल की बर्बादी की वजह
से बेटी का ब्याह करने की चिंता से परेशान था। वहीं, गांव बिहारीपुर के
किसान मुरली की अगली फसल के लिए सता रही लागत की चिंता के कारण शुक्रवार
तड़के मौत हो गई। दोनों घटनाओं की सूचना तहसील प्रशासन को दी गई है।
गांव बेहटी निवासी 40 वर्षीय कृषक प्रेमपाल की बेटी दीपा ने बताया कि उसके पिता ने डेढ़ एकड़ गेहूं बोया था। अच्छी फसल देख उसका रिश्ता भी तय कर रखा है। गेहूं की फसल से ही उसकी शादी में खर्च होना था, लेकिन पिछले माह बारिश और आंधी के कारण फसल पूरी तरह चौपट हो गई। बर्बाद फसल देख प्रेम पाल सदमे में रहने लगा था।
उसे एक तो फसल चौपट होने का गम तो दूसरे बेटी की शादी की चिंता खाए जा रही थी। हर पल यही सोचता रहता कि उसकी बिटिया के हाथ कैसे पीले होंगे। गुरुवार देर शाम इसी सदमे में उसकी देर शाम मौत हो गई। प्रधान उमेश पटेल ने बताया कि मृतक के पास महज डेढ़ एकड़ जमीन थी, जिससे वह परिवार का गुजारा करता था।
उधर, गांव बिहारीपुर निवासी 60 वर्षीय कृषक मुरली मौर्या की भी शुक्रवार सुबह को फसल बर्बादी के सदमे में हुए हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतक के पुत्र हरीशचन्द्र ने बताया कि गुरुवार को गेहूं की फसल कटी थी। खेत में पैदावार इस बार इतनी कम हुई जिसका सदमा उसके पिता बर्दाश्त नहीं कर पाए।
उसने बताया कि भरण पोषण के अलावा कर्ज की भरपाई की चिंता भी उसके पिता को थी। करीब पांच बजे अटैक पड़ने पर उन्हें वह नगर के एक निजी चिकित्सक के यहां उपचार के लिए ले गए जहां डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इन दोनों घटनाओं से मृतकों के घरों में कोहराम मच गया।
पूर्व प्रधान सुमेर लाल ने बताया कि कृषक की मौत की सूचना तहसील प्रशासन को दे दी गई है। एसडीएम बीसलपुर ने इस तरह की किसी जानकारी से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि फिर भी वह मामले की जांच कराएंगे।
गांव बेहटी निवासी 40 वर्षीय कृषक प्रेमपाल की बेटी दीपा ने बताया कि उसके पिता ने डेढ़ एकड़ गेहूं बोया था। अच्छी फसल देख उसका रिश्ता भी तय कर रखा है। गेहूं की फसल से ही उसकी शादी में खर्च होना था, लेकिन पिछले माह बारिश और आंधी के कारण फसल पूरी तरह चौपट हो गई। बर्बाद फसल देख प्रेम पाल सदमे में रहने लगा था।
उसे एक तो फसल चौपट होने का गम तो दूसरे बेटी की शादी की चिंता खाए जा रही थी। हर पल यही सोचता रहता कि उसकी बिटिया के हाथ कैसे पीले होंगे। गुरुवार देर शाम इसी सदमे में उसकी देर शाम मौत हो गई। प्रधान उमेश पटेल ने बताया कि मृतक के पास महज डेढ़ एकड़ जमीन थी, जिससे वह परिवार का गुजारा करता था।
उधर, गांव बिहारीपुर निवासी 60 वर्षीय कृषक मुरली मौर्या की भी शुक्रवार सुबह को फसल बर्बादी के सदमे में हुए हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतक के पुत्र हरीशचन्द्र ने बताया कि गुरुवार को गेहूं की फसल कटी थी। खेत में पैदावार इस बार इतनी कम हुई जिसका सदमा उसके पिता बर्दाश्त नहीं कर पाए।
उसने बताया कि भरण पोषण के अलावा कर्ज की भरपाई की चिंता भी उसके पिता को थी। करीब पांच बजे अटैक पड़ने पर उन्हें वह नगर के एक निजी चिकित्सक के यहां उपचार के लिए ले गए जहां डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इन दोनों घटनाओं से मृतकों के घरों में कोहराम मच गया।
पूर्व प्रधान सुमेर लाल ने बताया कि कृषक की मौत की सूचना तहसील प्रशासन को दे दी गई है। एसडीएम बीसलपुर ने इस तरह की किसी जानकारी से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि फिर भी वह मामले की जांच कराएंगे।