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13 साल से कोर्ट में हाजिर नहीं हुए ताहिर और शहला

Thu, 11 Jan 2018 01:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पीलीभीत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पीलीभीत Updated Thu, 11 Jan 2018 01:40 AM IST
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Shahla not visited court since 13 years
कोर्ट - फोटो : amar ujala
धोखाधड़ी से कूटरचित और फर्जी आदेश बनाकर नगर पालिका परिषद पीलीभीत में अधिशासी अधिकारी के पद पर कार्यभार लेने के मामले में नवाबगंज निवासी डॉ. ताहिर और उनकी पत्नी नगर पालिका परिषद नवाबगंज की अध्यक्ष शहला ताहिर 13 साल से कोर्ट में हाजिर नहीं हुए हैं। सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन धोखाधड़ी के इस मामले में शहला और उनके पति ताहिर के खिलाफ नौ साल से गैर जमानती वारंट भी जारी है।
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तत्कालीन नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल टीटी ने नौ अगस्त 2003 को थाना सुनगढ़ी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार बरेली जिले के कस्बा नवाबगंज निवासी डॉक्टर मोहम्मद ताहिर और उनकी पत्नी शहला उन्हें चार अप्रैल 2003 को मिलीं और नगर विकास मंत्री का पत्र देकर नगर पालिका में ईओ के पद पर कार्यभार ग्रहण कराने को कहा। उस समय पद रिक्त नहीं था। 25 जुलाई 2003 को पुन: दोनों लोग उनके कार्यालय पर आए और बताया कि वह बिजनौर जिले के चांदपुर नगर पालिका में ईओ हैं। चांदपुर नवाबगंज से दूर है, इसलिए उन्हें पीलीभीत में ज्वाइन करा लें। उनसे चांदपुर नगर पालिका का अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया । 28 जुलाई को दंपति अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर आए, जिसके आधार पर ताहिर को अधिशासी अधिकारी के पद पर कार्यभार ग्रहण कराया गया। 30 जुलाई 2003 को डीएम ने पालिका अध्यक्ष को पत्र भेजकर बताया कि शासन ने मुजफ्फरनगर से बीके श्रीवास्तव को यहां तैनात किया है। उन्हें कार्यभार ग्रहण कराएं । इस पर जब छानबीन हुई तब पता चला कि ताहिर ने फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र चांदपुर नगर पालिका का दिया है। उस पर अध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर हैं। नगर पालिका अध्यक्ष राजीव अग्रवाल टीटी की तहरीर के अनुसार मोहम्मद ताहिर और उनकी पत्नी शहला ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके योजनाबद्ध तरीके से षड्यंत्र करके छल के प्रयोजन के लिए कूट रचना की है और जालसाजी व धोखाधड़ी से कार्यभार ग्रहण किया। पुलिस ने ताहिर और उनकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने 27 सितंबर 2004 को ताहिर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 19 अक्टूबर 2004 को तत्कालीन सत्र न्यायाधीश एमएल शर्मा ने 30,000 रुपये के दो जमानती व निजी मुचलका दाखिल करने पर ताहिर की जमानत शर्तें लगाकर मंजूर की । 
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जमानत आदेश की शर्तों के मुताबिक ताहिर विवेचक के बुलाने पर हाजिर होंगे। न्यायालय में भी विशेष कारणों के अलावा नियत तारीखों पर उपस्थित होते रहेंगे। उल्लंघन की स्थिति में स्वीकृत जमानत नियमानुसार निरस्त कर दी जाएगी। मुकदमे की दूसरी आरोपी शहला को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी । पुलिस की अर्जी पर एक नवंबर 2004 को तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेश भारद्वाज ने शहला की संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए। हालांकि शहला की कोई संपत्ति पुलिस को नहीं मिल पाई। विवेचना के बाद सुनगढ़ी पुलिस ने 15 फरवरी 2005 को दोनों आरोपियों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान लेकर अभियुक्तों के सम्मन जारी कर दिए। अदालत हाजिर न होने पर कोर्ट ने 25 जून 2008 को शहला और ताहिर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। तब से वारंट लगातार जारी हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास नागर की अदालत से जारी गैर जमानती वारंट के आधार पर पुलिस अभी तक शहला और उनके पति ताहिर को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। 10 अक्तूबर 2017 को सीजेएम की अदालत से पहले से चला आ रहा गैर जमानती वारंट जारी रहा। मामले की अगली सुनवाई के लिये यहां 14 जनवरी की तिथि लगी है।
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