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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Seven hours later the body was sent to postmortem half

साढे़ सात घंटे बाद पोस्टमार्टम को भेजा गया शव

Thu, 31 Mar 2016 11:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला पीलीभीत Updated Thu, 31 Mar 2016 11:29 PM IST
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पूरनपुर कोतवाली का सिपाही सुधीर कुमार सिंह एंबुलेंस 108 से सद्दाम और शकील को लेकर दोपहर एक बजे जिला अस्पताल पहुंचा। एक बजकर तीन मिनट में इमरजेंसी के डॉक्टर पीके मिश्रा और डॉ. राजकुमार ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इसके दो मिनट बाद दोनों शवों को मोरचरी भेज दिया गया। पुलिस ने दिन में दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने में लापरवाही बरती। पंचायत नामा भरकर सायं 7.44 मिनट पर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए शव विच्छेदन गृह रवाना किया। इस दौरान पूरे साढ़े सात घंटे से अधिक का समय बीत गया। पोस्टमार्टम कराने में पुलिस की देरी से लोगों के गले नहीं उतर रही है। लोग पुलिस की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।
टाइम लाइन
0 सुबह 11.56 सद्दाम व शकील को कोतवाली से सीएचसी लाया गया।
0 सुबह 12.05 पर डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर किया।
0 दोपहर 01.00 बजे एंबुलेंस दोनों को लेकर जिला अस्पताल पहुंची।
0 दोपहर 01.03 पर डॉक्टर पीके  मिश्रा व डॉ. राजकुमार ने दोनों को मृत घोषित किया।
0 दोपहर 01.20 पर इंस्पेक्टर सुनगढ़ी अतुल प्रधान जिला अस्पताल पहुंचे।
0 दोपहर 01.22 पर एंबुलेंस ने शवों को अस्पताल को सौंपा।
0 दोपहर 01.31 पर शहर कोतवाल फोर्स के साथ अस्पताल पहुंचे।

लाशें बता रहीं थी कि ज्यादती हुई
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। लाशों पर चोटों के निशान और फटे कपड़े पुलिस की ज्यादती को खुद बयां कर रहे हैं। पुलिस सूत्र जहर खाने से हुई मौत का दावा कर रहे हैं, लेकिन लाशों को देखकर यह बात किसी के गले नहीं उतर रही हैं। अगर पुलिस सूत्रों की बात पर यकीन करें तो यह भी सवाल उठता है कि आखिर पुलिस कस्टडी में जहर खाने की नौबत क्यों आई। इससे भी बड़ा सवाल यह उठता है कि हवालात में जहर कहां से पहुंचा।
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शरीर पर चोटों के निशान और फटे कपड़े इशारा कर रहे हैं कि दोनों युवकों के साथ पुलिस ज्यादती हुई है। कपड़े मिट्टी से सने थे। पुलिस अभिरक्षा में आने के बाद लॉकअप में आरोपी को रखने का प्रावधान है। लॉकअप में मिट्टी कहां से आई? इसका जवाब पुलिस के पास नहीं है। पुलिस अभिरक्षा में खाना-पानी की व्यवस्था भी पुलिस की ओर से किए जाने का प्रावधान पुलिस मैनुअल और प्रचलित भारतीय कानूनों में है। अगर पुलिस सूत्रों की बात पर विश्वास किया जाए तब यह जहर सद्दाम और शकील तक कैसे पहुंचा और उन दोनों ने कैसे जहर खा लिया। इसका जवाब पुलिस को देना होगा। कुल मिलाकर पुलिस अभिरक्षा में हुई मौतों के लिए पूरी तरह से पुलिस ही जिम्मेदार है। जिले में पुलिस अभिरक्षा में हुई तमाम मौतों में आज हुईं यह दो हत्याएं भी और शामिल हो गई हैं।
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