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रिवाल्वर नहीं दी थी, दे दी थी जान 

Fri, 08 Apr 2016 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Fri, 08 Apr 2016 10:47 PM IST
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Revolver had not granted life
हादसा - फोटो : pilibhit, beureu
तराई में आतंकवाद के दौर में सक्रिय आतंकवादी जो कुछ भी हासिल करना चाहते थे पहले उसे राजी से हासिल करने का प्रयास करते थे। अगर कोई विरोध करता तो उसे उसकी कीमत जान देकर चुकानी पड़ती थी। तमाम लोग तो उनके जुल्म और ज्यादती से भयभीत होकर तुरंत बात पूरी भी कर देते थे, लेकिन तमाम लोग ऐसे भी थे जो उनके जुल्म और ज्यादती के आगे झुके नहीं, भले ही उन्हें इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। ऐसे ही लोगों में शांतीनगर निवासी भगवान स्वरूप गुप्ता भी एक थे। आतंकी उनके पास मौजूद इटली निर्मित रिवाल्वर उनसे हासिल करना चाहता थे पर उन्होंने अपनी जान दे दी, रिवाल्वर नहीं दी। 
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बात 25 दिसंबर 1991 की है। रिवाल्वर वाले गुप्ता जी के नाम से मशहूर हजारा थाना क्षेत्र के ग्राम शांतीनगर निवासी 55 वर्षीय भगवान स्वरूप गुप्ता हमेशा की तरह अपनी इटली निर्मित रिवाल्वर गले में डाले संपूर्णानगर रोड स्थित अपनी आटा चक्की पर बैठे थे। ओढ़ी चादर के भीतर असलहा छिपाए तीन-चार आतंकवादी उनकी चक्की पर शाम करीब चार बजे अचानक दाखिल हुए और गुप्ता जी से उनके पास मौजूद रिवाल्वर मांगा। उनके इंकार करते ही चादर के अंदर छिपी एके-47 बाहर निकाल ली। संगीन की नोंक पर उन लोगों ने गुप्ता जी से रिवाल्वर जल्दी निकालकर देने को कहा, लेकिन वह डरे नहीं और उनका उत्तर ना में ही रहा। इस पर भीतर घुसे दो आतंकवादी उनसे जबरिया रिवाल्वर छीनने लगे। 
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बताते हैं कि इस दौरान भगवान स्वरूप ने एक हाथ से गले में टंगी रिवाल्वर और दूसरे हाथ से एक आतंकवादी की एके-47 रायफल पकड़ ली, जिसे छुड़ाने में दो आतंकवादियों के पसीने छूट गए। गुत्थमगुत्था देख बाहर खड़े एक अन्य आतंकवादी ने गुप्ता जी पर एके-47 से से गोली चला उन्हें ढेर कर दिया। यह देख वहां मौजूद एक रोलर चालक रमेशचंद्र भी आतंकवादियों से भिड़ गया और उसने साहस दिखाते हुए एक की रायफल छीन ली और उन लोगों की तरफ तान दी, पर वह उसे चला नहीं सका। यह देख आतंकवादियों ने उसे भी गोलियों से छलनी कर दिया और अपनी एके-47 रायफल छीन कर फरार हो गए, लेकिन वह गुप्ता जी की रिवाल्वर नहीं ले जा सके। गुप्ता जी भले ही आतंकियों के हाथों मारे गए पर उनकी बहादुरी की चर्चा आज भी पुराने लोग करते नहीं थकते।
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घटना स्थल पर लगी है गुप्ता जी प्रतिमा
शांतीनगर गांव में आज भी उनकी पत्नी शकुंतला देवी अपने पोते पवन और रवि के साथ रहती हैं। भगवान स्वरूप गुप्ता के पुत्र राजेंद्र गुप्ता की भी 1998 में मौत हो चुकी है। आतंकियों ने भगवान स्वरूप गुप्ता को जिस स्थान पर मौत के घाट उतारा था परिवार वालों ने उसी स्थान पर उनकी प्रतिमा बनवा रखी है। शकुंतला कहती हैं कि उनके पति ने आतंकियों से मुचैटा लिया पर सरकार और पुलिस प्रशासन से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला, जबकि सरकार को परिवार के एक सदस्य को नौकरी देनी चाहिए थी। यही नहीं पुलिस की लचर कार्यप्रणाली के चलते आरोपी भी दोष मुक्त हो गए। न्याय के लिए अब सिर्फ ऊपर वाले का सहारा है। 


15 मिनट तक आतंकियों से हुई थी गुत्थमगुत्था
गांव निवासी मजदूर दुखंतीराम को आज भी वह सीन याद है। दुखंती ने बताया कि आतंकवादियों की संख्या पांच थी। भगवान स्वरूप गुप्ता और रोलर चालक रमेशचंद्र से करीब 15 मिनट तक गुत्थमगुत्था होती रही। रमेश ने आतंकियों में से एक का असलहा भी छीन लिया था लेकिन उसे चलाना नहीं आता था। इसलिए वह भी मारा गया। गोलियों की तड़तड़ाहट सुन वह भयभीत हो गया था। लिहाजा शोर मचाने के बजाय चुपचाप झाले में जाकर बैठ गया था। उस सीन को याद कर आज भी उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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