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गोली लगने से वन दरोगा की मौत
पीलीभीत।
Updated Fri, 22 May 2015 10:52 PM IST
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टाइगर रिजर्व में तैनात 35 वर्षीय वन दरोगा रामेंद्र पाल सिंह की सुनगढ़ी
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स्थित अपने घर में गोली लगने से मौत हो गई। घर वालों ने रिवाल्वर लोड करते
समय गोली चलने की तहरीर दी है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और
फारेंसिक टीम के साथ घटना स्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए।
मोहल्ला सुनगढ़ी निवासी रामेंद्र पाल सिंह अपने निजी घर में मां ऊषा देवी, पत्नी सोनी और सात वर्षीय पुत्री शुभ्रा के साथ रहते थे। उनकी तैनाती टाइगर रिजर्व की माला रेंज में थी। बृहस्पतिवार की शाम वह घर आए थे। रात करीब 10.20 बजेे उनके ही रिवाल्वर की गोली सिर में लग गई, जिससे वह घायल हो गए। घर वाले उन्हें शहर के प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने बरेली रेफर कर दिया। स्थिति में सुधार न होने पर बरेली से भी लखनऊ के लिए रेफर किया गया। पर लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। शव पीलीभीत पहुंचने पर वन दरोगा की मां ऊषा देवी ने पुलिस को तहरीर दी जिसमें रात को रिवाल्वर लोड करते समय अचानक गोली चलना बताया गया है। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी बृजेश सिंह ने बताया तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर रिवाल्वर कब्जे में ले ली गई है। फोरेंसिंक टीम ने भी साक्ष्य एकत्र किए हैं। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पोस्टमार्टम के बाद देरशाम को मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रामेंद्र पाल सिंह के पिता करन सिंह वनविभाग में तैनात थे। बीमारी के चलते उनके निधन पर वर्ष 2006 में रामेंद्र को मृतक आश्रित में वनदरोगा की नौकरी मिली थी। रामेंद्र को नौकरी मिलने और कुछ दिनों बाद घर में बेटी का जन्म से मां अपने दुखों को भूलकर परिवार के साथ खुश रहने लगी थीं लेकिन उनके परिवार पर 21 मई की रात पहाड़ बनकर टूटी। पल भर में मां की खुशियां, पत्नी का सिंदूर और बेटी की मुस्कान छिन गई। सभी का रो रो बुरा हाल है।
अचानक टूटा दुखों का पहाड़
रामेंद्र के पिता करन सिंह भी वन विभाग में तैनात थे। 2006 में उनके निधन के बाद रामेंद्र को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिली थी। शादी हुई। बेटी पैदा हुई। सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
वनविभाग में छाया शोक
शुक्रवार को सुबह अचानक उसकी मौत की खबर से विभाग में शोक की लहर छा गई। जिसने सुना वही अवाक रह गया। टाइगर रिजर्व कार्यालय पर सुबह स्टाफ ने शोकसभा कर दो मिनट का मौन रखा और उनके अंतिम दर्शन को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसमें डीएफओ कैलाश प्रकाश, एसडीओ डीपी सिंह, माला रेंजर डीके सिंह, महोफ रेंजर केपी सिंह, हरीश कुमार, पवन, दिग्विजय सिंह सहित पूरा स्टाफ शामिल था।
मोहल्ला सुनगढ़ी निवासी रामेंद्र पाल सिंह अपने निजी घर में मां ऊषा देवी, पत्नी सोनी और सात वर्षीय पुत्री शुभ्रा के साथ रहते थे। उनकी तैनाती टाइगर रिजर्व की माला रेंज में थी। बृहस्पतिवार की शाम वह घर आए थे। रात करीब 10.20 बजेे उनके ही रिवाल्वर की गोली सिर में लग गई, जिससे वह घायल हो गए। घर वाले उन्हें शहर के प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने बरेली रेफर कर दिया। स्थिति में सुधार न होने पर बरेली से भी लखनऊ के लिए रेफर किया गया। पर लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। शव पीलीभीत पहुंचने पर वन दरोगा की मां ऊषा देवी ने पुलिस को तहरीर दी जिसमें रात को रिवाल्वर लोड करते समय अचानक गोली चलना बताया गया है। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी बृजेश सिंह ने बताया तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर रिवाल्वर कब्जे में ले ली गई है। फोरेंसिंक टीम ने भी साक्ष्य एकत्र किए हैं। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पोस्टमार्टम के बाद देरशाम को मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रामेंद्र पाल सिंह के पिता करन सिंह वनविभाग में तैनात थे। बीमारी के चलते उनके निधन पर वर्ष 2006 में रामेंद्र को मृतक आश्रित में वनदरोगा की नौकरी मिली थी। रामेंद्र को नौकरी मिलने और कुछ दिनों बाद घर में बेटी का जन्म से मां अपने दुखों को भूलकर परिवार के साथ खुश रहने लगी थीं लेकिन उनके परिवार पर 21 मई की रात पहाड़ बनकर टूटी। पल भर में मां की खुशियां, पत्नी का सिंदूर और बेटी की मुस्कान छिन गई। सभी का रो रो बुरा हाल है।
अचानक टूटा दुखों का पहाड़
रामेंद्र के पिता करन सिंह भी वन विभाग में तैनात थे। 2006 में उनके निधन के बाद रामेंद्र को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिली थी। शादी हुई। बेटी पैदा हुई। सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
वनविभाग में छाया शोक
शुक्रवार को सुबह अचानक उसकी मौत की खबर से विभाग में शोक की लहर छा गई। जिसने सुना वही अवाक रह गया। टाइगर रिजर्व कार्यालय पर सुबह स्टाफ ने शोकसभा कर दो मिनट का मौन रखा और उनके अंतिम दर्शन को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसमें डीएफओ कैलाश प्रकाश, एसडीओ डीपी सिंह, माला रेंजर डीके सिंह, महोफ रेंजर केपी सिंह, हरीश कुमार, पवन, दिग्विजय सिंह सहित पूरा स्टाफ शामिल था।