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चेहरा देखा नहीं, कर रहे एचएस की निगरानी
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Fri, 13 May 2016 10:38 PM IST
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पुलिस की कथनी और करनी का अंतर पहले से ही जगजाहिर है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से कराई जाने वाली हिस्ट्रीशीटर (एचएस) की निगरानी बेहद हास्यास्पद है। एचएस की एकाएक गतिविधि पर नजर रखकर अभिलेख मेनटेन करने वाले अधिकांश पुलिसकर्मी चेहरा भी नहीं पहचानते, तो किसी के पास फोटो ही नहीं है। ऐसे में अफसरों का नजरअंदाज करने वाला रवैया शातिर अपराधियों के लिए अभयदान है।
क्राइम कंट्रोल और शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए महकमे की ओर से शातिर किस्म के अपराधियों का चिन्हितीकरण किया जाता है। अपराधिक इतिहास को देखते हुए हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। इसमें शामिल किए गए अपराधियों को हिस्ट्रीशीटर का दर्जा मिलता है। नामवार सूची प्रत्येक थाने में रजिस्टर और बोर्ड में चस्पा कराई जाती है। एक आदतन तो दूसरे गैर आदतन अपराधी की श्रेणी में रहते है। वर्तमान में जिले में कुल 1018 हिस्ट्रीशीटर है। एचएस कहां जाता है, किससे मिलता है, मौजूदा समय में उसकी दिनचर्या समेत एकाएक गतिविधि पर रखने के लिए थानावार वीट बांधकर निगरानी होती है। अफसरों की वाहवाही लूटने के लिए निगरानी में लगाए गए पुलिसकर्मी सिर्फ अभिलेख मेनटेन करते है। सही तरीके से जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया जाता। सच यह भी है कि अधिकांश पुलिसकर्मी एचएस को पहचानते ही नहीं। कईयों के पास तो उनका फोटो ही नहीं है, जबकि उसी थाने से हिस्ट्रीशीट खोली गई होती है। क्षेत्र से आधी-अधूरी जानकारी जुटाकर इतिश्री कर लेते है। ऐसे में सिपाही तो अफसरों की डांट -डपट से खुद को बचा ले गए, लेकिन अपराधियों में खाकी का डर कम होता है। नतीजतन खुलेआम गुंडई करने से पहले एक बार नहीं सोचते और पहचान न होने का फायदा उठाकर पुलिस क ी आंख के सामने से निकल जाते है।
13 पीबीटीपी 11
अफसर नहीं रहते गंभीर
थाना स्तर पर बरती जा रही लापरवाही के पीछे अफसरों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया अहम कारण है। मॉनिटरिंग में कमी की वजह से पुलिस कर्मियों पर दबाव नहीं बनता, न कार्रवाई का डर। औपचारिकता एक बड़ी घटना की वजह बन जाती है।
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पांच मरे तो आठ निकले असहाय
पुलिस की लापरवाही पिछले दिनों सामने आई थी, जिसमें मरने के बाद भी हिस्ट्रीशीटर अभिलेखों में जिंदा रहे। उनकी निगरानी वीट सिपाही लगातार कर रहे थे, अभिलेख भी मेनटेन रहे, जिसके सामने के बाद अफसरों ने जांच के दौरान सामने आने की बात कहकर महकमे की साख बचाई। बाद में आठ शारीरिक और मानसिक रूप से असमर्थ हो चुके बदमाशों की हिस्ट्रीशीट नष्ट कराई गई, लेकिन अभी भी सुधार नहीं हो सका।
...वीट बुक से फोटो गायब
एचएस की पहचान और फोटो पास न होने की बात का प्रमाणिक तथ्य भी है। पिछले दिनों चेकिंग के दौरान हजारा थाने के सिपाही समेत कई पुलिसकर्मियों क ी वीट बुक में एचएस का फोटो ही गायब था। इसके अलावा शहर एक चौकी प्रभारी ने एसपी के पूछने पर क्षेत्र के ही नामी एचएस को न पहचानने की बात कही थी। जबकि उसी थाने में तीन मुकदमों में उसको वांछित बताया जा रहा था।
वैसे तो पुलिस निगरानी में कोई लापरवाही नहीं बरत रही। अगर कोई पुलिस कर्मी क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर को नहीं पहचानता, तो उसकी कमी है। इसके सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
- विकास कुमार वैद्य, एएसपी
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क्राइम कंट्रोल और शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए महकमे की ओर से शातिर किस्म के अपराधियों का चिन्हितीकरण किया जाता है। अपराधिक इतिहास को देखते हुए हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। इसमें शामिल किए गए अपराधियों को हिस्ट्रीशीटर का दर्जा मिलता है। नामवार सूची प्रत्येक थाने में रजिस्टर और बोर्ड में चस्पा कराई जाती है। एक आदतन तो दूसरे गैर आदतन अपराधी की श्रेणी में रहते है। वर्तमान में जिले में कुल 1018 हिस्ट्रीशीटर है। एचएस कहां जाता है, किससे मिलता है, मौजूदा समय में उसकी दिनचर्या समेत एकाएक गतिविधि पर रखने के लिए थानावार वीट बांधकर निगरानी होती है। अफसरों की वाहवाही लूटने के लिए निगरानी में लगाए गए पुलिसकर्मी सिर्फ अभिलेख मेनटेन करते है। सही तरीके से जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया जाता। सच यह भी है कि अधिकांश पुलिसकर्मी एचएस को पहचानते ही नहीं। कईयों के पास तो उनका फोटो ही नहीं है, जबकि उसी थाने से हिस्ट्रीशीट खोली गई होती है। क्षेत्र से आधी-अधूरी जानकारी जुटाकर इतिश्री कर लेते है। ऐसे में सिपाही तो अफसरों की डांट -डपट से खुद को बचा ले गए, लेकिन अपराधियों में खाकी का डर कम होता है। नतीजतन खुलेआम गुंडई करने से पहले एक बार नहीं सोचते और पहचान न होने का फायदा उठाकर पुलिस क ी आंख के सामने से निकल जाते है।
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13 पीबीटीपी 11
अफसर नहीं रहते गंभीर
थाना स्तर पर बरती जा रही लापरवाही के पीछे अफसरों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया अहम कारण है। मॉनिटरिंग में कमी की वजह से पुलिस कर्मियों पर दबाव नहीं बनता, न कार्रवाई का डर। औपचारिकता एक बड़ी घटना की वजह बन जाती है।
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पांच मरे तो आठ निकले असहाय
पुलिस की लापरवाही पिछले दिनों सामने आई थी, जिसमें मरने के बाद भी हिस्ट्रीशीटर अभिलेखों में जिंदा रहे। उनकी निगरानी वीट सिपाही लगातार कर रहे थे, अभिलेख भी मेनटेन रहे, जिसके सामने के बाद अफसरों ने जांच के दौरान सामने आने की बात कहकर महकमे की साख बचाई। बाद में आठ शारीरिक और मानसिक रूप से असमर्थ हो चुके बदमाशों की हिस्ट्रीशीट नष्ट कराई गई, लेकिन अभी भी सुधार नहीं हो सका।
...वीट बुक से फोटो गायब
एचएस की पहचान और फोटो पास न होने की बात का प्रमाणिक तथ्य भी है। पिछले दिनों चेकिंग के दौरान हजारा थाने के सिपाही समेत कई पुलिसकर्मियों क ी वीट बुक में एचएस का फोटो ही गायब था। इसके अलावा शहर एक चौकी प्रभारी ने एसपी के पूछने पर क्षेत्र के ही नामी एचएस को न पहचानने की बात कही थी। जबकि उसी थाने में तीन मुकदमों में उसको वांछित बताया जा रहा था।
वैसे तो पुलिस निगरानी में कोई लापरवाही नहीं बरत रही। अगर कोई पुलिस कर्मी क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर को नहीं पहचानता, तो उसकी कमी है। इसके सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
- विकास कुमार वैद्य, एएसपी