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कैमरे में कैद हुआ खूनी बाघ, तेज हुई पकड़ने की कवायद

Fri, 18 Aug 2017 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत। Updated Fri, 18 Aug 2017 12:08 AM IST
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Captured bloody tiger in the camera, fast catching drill
tiger - फोटो : amar ujala
पूर्व मंत्री के आमरण अनशन और मुख्यमंत्री केे आगमन के बाद तेज हुई कार्रवाई
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पिछले एक सप्ताह में चार किसानों को शिकार बनाने वाले खूनी बाघ को बेेहोश कर पकड़ने की कवायद में जुटे वन महकमे के काम में सीएम के दौरे के बाद तेजी आई है। खूनी घोषित हो चुके बाघ की लोकेशन ट्रेस करने को लगे कैमरों मेें उसकी दो तस्वीरें कैद हुई हैं। इसके साथ ही रात को खेतों में बांधे गए चार में से दो पड्डों को उसने मारा है। इन स्थानों पर पिंजरे लगाकर पड्डों के अवशेष मांस को इनके अंदर रखा गया है, साथ ही चार हाथियों और ट्रैंक्यूलाइजिंग गन के साथ टीमें आसपास उसकी खोज में लगी हुई हैं। गुरुवार को भी सर्च अभियान चला।
वनकटी से निकले बाघ ने देवहा नदी पार कर तीन किसानों को मार डाला था। सात, आठ और दस अगस्त को हुई इन तीन घटनाओं के बाद से ही वन विभाग डब्ल्यूटीआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ टीम एवं अन्य विशेषज्ञ वनकर्मियों की मदद से खूनी बाघ को तलाशने में जुटे है। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा के आमरण अनशन पर बैठ जाने और बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे पर बाघ को शीघ्र पकड़ने के दिए गए निर्देश के बाद से वन महकमे ने खूनी बाघ को बेहोश कर पकड़ने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के जाने के बाद ही वन अधिकारियों ने बैठक कर किसी भी हाल में बाघ को पकड़ने की रणनीति बनाई है। इसके तहत मंगलवार को जिस क्षेत्र में बाघ की लोकेशन देखी गई उस क्षेत्र में चार अलग-अलग स्थानों पर पड्डे बांधे गए। बृहस्पतिवार को सुबह चार बजे टीमों ने जब इसका निरीक्षण किया तो दो पड्डों को बाघ ने मार डाला था और उनके अध खाए शव बरामद हुए। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बाघ अपने शिकार पर फिर लौटेगा इसलिए दोनों स्थानों पर पिंजरे लगाकर पड्डों के अवशेष उनके अंदर रखे गए हैं। वनसंरक्षक वीके सिंह ने बताया कि मंगलवार को कैमरा ट्रैप में बाघ की फोटो आई है फोटो मिलने और उसके द्वारा दो पड्डों के मारे जाने से यह माना जा रहा है बाघ इस क्षेत्र में ही है। उसे पकड़ने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। डीएफओ आदर्श कुमार के नेतृत्व में चल रहे सर्च अभियान में  ट्रैंक्यूलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, डॉ. एसके राठौर, डॉ. राजुल सक्सेना, रेंजर अनिल शाह, मोबीन आरिफ, वजीर हसन, नदीम अंसारी, एलएम भट्ट, दिग्विजय सिंह सहित कई वनकर्मी गुरुवार पूरे दिन सर्च अभियान में जुटे रहे। चार हाथियों की मदद से खूनी बाघ को गन्ने के खेतों में खोजने को अभियान चलाया गया। पैदल भी वनकर्मियों ने क्षेत्र के कई स्थानों पर उसके पदचिह्न देखने का कार्य किया।
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खूनी बाघ है या बाघिन स्पष्ट नहीं
डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि कैमरे में कैद बाघ की दोनों ही तस्वीरों में उसका अगला हिस्सा कैद हुआ है। इससे फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि वह नर या मादा। वन संरक्षक वीके सिंह ने भी इसकी पुष्टि की।
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मुआवजा राशि बढ़ाने को शुरू हुई लिखा पढ़ी
टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश और सामाजिक वानिकी के निदेशक आदर्श कुमार ने बताया कि बाघ के हमलों में मारे गए लोगों के परिवारजनों को शासनादेश के मुताबिक पांच लाख रुपये मुआवजा राशि थी। उन्होंने बताया कि बाघ के हमलों के बाद आक्रोशित लोग इस राशि को बढ़ाने की मांग करते थे। तीन दिन पहले यहां आए प्रमुख वन संरक्षक एसके उपाध्याय के संज्ञान में भी इसे लाया गया। दोनों अधिकारियों ने बताया कि इस पर उन्होंने शासन को मुआवजा राशि पांच लाख से बढ़ाकर दस लाख रुपये करने का प्रस्ताव बना कर भेजा है। दोनों अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि शीघ्र ही उसे मंजूरी मिलने की संभावना है।
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