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खून के सौदागरों ने शहर में फैला रखे थे एजेंट!
पीलीभीत।
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:39 PM IST
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पीलीभीत।
- फोटो : पीलीभीत।
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शहर के निजी अस्पतालों में सेंधमारी कर खून की सौदेबाजी का कारोबार करने वाले छह आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है। इसको लेकर की जा रही जांच में अब चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पकड़े गए खून के सौदागरों ने अपना कारोबार बढ़ाने के लिए शहर में कई एजेंट फैला रखे थे। जिनको काम होने पर मोटा कमीशन दिया जाता है। अब पुलिस इस पहलू पर भी छानबीन में जुट गई है।
कोतवाली पुलिस ने मोहल्ला शेर मोहम्मद के एक मकान में छापामारी कर शहर में सालों से पनप रहे खून की सौदेबाजी के अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया था। इसमें छह आरोपी शेर मोहम्मद निवासी जाकिर सिद्दीकी, जटपुरा (न्यूरिया) के हरिशंकर, सैदपुर निवासी कमल कुमार, बनौसा नवदिया (गजरौला) के सरवन कुमार, शाही (जहानाबाद) हरचरन सिंह गौतम और राजेश को जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा एसएस हास्पिटल के चिकित्सक शिवकुमार अग्रवाल को नामजद कर जांच की जा रही है। पकड़े गए आरोपी अपने मकान में रुपये का लालच देकर खून निकालते थे। इसकी छानबीन के दौरान एक बात और संज्ञान में आई है। खून का कारोबार तेजी से आगे बढ़ाया जा सके, इसके लिए यह निजी अस्पतालों पर सक्रिय रहने के साथ ही अपने एजेंट बनाकर रखते थे, जोकि आज भी शहर में खुलेआम घूम रहे है। यह एजेंट बच्चों, नशेड़ियों और अन्य जरूरतमंदों को रुपये का लालच देकर इन तक पहुंचाते थे। इसके एवज में उनको कमीशन दिया जाता था।
नींद से अब भी नहीं जाग सका स्वास्थ्य विभाग
खास बात है कि कोतवाली पुलिस का खुलासा स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के दावों की कलई खोल चुका है। महकमे पर मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे है। एक तरफ सख्त कार्रवाई करने की बात कर रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की नींद अब भी नहीं खुल सकी है। खून के इस खेल पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी न तो कोई प्लानिंग बना सके हैं, न ही कहीं छापामारी की शुरूआत हो सकी है। सिर्फ खुद को पाक साफ बताकर जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली है।
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कोतवाल देशपाल सिंह से पूरे प्रकरण को लेकर जानकारी की जा रही है। इसमें जो भी तथ्य सामने आ रहे है, सभी पर गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है। इस अवैध धंधे मेें लिप्त सभी पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
- धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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कोतवाली पुलिस ने मोहल्ला शेर मोहम्मद के एक मकान में छापामारी कर शहर में सालों से पनप रहे खून की सौदेबाजी के अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया था। इसमें छह आरोपी शेर मोहम्मद निवासी जाकिर सिद्दीकी, जटपुरा (न्यूरिया) के हरिशंकर, सैदपुर निवासी कमल कुमार, बनौसा नवदिया (गजरौला) के सरवन कुमार, शाही (जहानाबाद) हरचरन सिंह गौतम और राजेश को जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा एसएस हास्पिटल के चिकित्सक शिवकुमार अग्रवाल को नामजद कर जांच की जा रही है। पकड़े गए आरोपी अपने मकान में रुपये का लालच देकर खून निकालते थे। इसकी छानबीन के दौरान एक बात और संज्ञान में आई है। खून का कारोबार तेजी से आगे बढ़ाया जा सके, इसके लिए यह निजी अस्पतालों पर सक्रिय रहने के साथ ही अपने एजेंट बनाकर रखते थे, जोकि आज भी शहर में खुलेआम घूम रहे है। यह एजेंट बच्चों, नशेड़ियों और अन्य जरूरतमंदों को रुपये का लालच देकर इन तक पहुंचाते थे। इसके एवज में उनको कमीशन दिया जाता था।
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नींद से अब भी नहीं जाग सका स्वास्थ्य विभाग
खास बात है कि कोतवाली पुलिस का खुलासा स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के दावों की कलई खोल चुका है। महकमे पर मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे है। एक तरफ सख्त कार्रवाई करने की बात कर रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की नींद अब भी नहीं खुल सकी है। खून के इस खेल पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी न तो कोई प्लानिंग बना सके हैं, न ही कहीं छापामारी की शुरूआत हो सकी है। सिर्फ खुद को पाक साफ बताकर जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली है।
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कोतवाल देशपाल सिंह से पूरे प्रकरण को लेकर जानकारी की जा रही है। इसमें जो भी तथ्य सामने आ रहे है, सभी पर गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है। इस अवैध धंधे मेें लिप्त सभी पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
- धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी