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बीसलपुर, बिलसंडा भी झुलसे थे आतंकवाद के लपटों में

Mon, 11 Apr 2016 10:50 PM IST
सत्यवान अवस्थी बीसलपुर।
सत्यवान अवस्थी बीसलपुर। Updated Mon, 11 Apr 2016 10:50 PM IST
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Bisalpur , Bilsnda also were scorched in the flames of terrorism
बदमाश - फोटो : अमर उजाला

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व्यापार नौकरों के हवाले कर कई व्यापारी कर गए थे पलायन
- खुद पुलिस को भी लगता था अपनी वर्दी से डर 

आतंकवाद की आग में बिलसंडा और दियोरिया भी प्रभावित हुए थे। आलम यह था कि कस्बे का बाजार तो शाम होने से पहले ही बंद हो जाता था। आम आदमी ही नहीं, बल्कि पुलिस पर भी आतंक का खौफ साफ दिखाई देता था।  
क्षेत्र के बिलसंडा व दियोरिया में सिखों की काफी आबादी है। दोनों इलाके जंगल के करीब भी हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में आतंकियों की आमद अकसर रहा करती थी। बिलसंडा का बाजार तो शाम चार बजते-बजते पूरी तरह से बंद हो जाता था। बाजार में चादर ओढ़कर घूमने वाले हर सिख को शंका की नजर से देखा जाता था। अन्य इलाकों की तरह आतंकियों ने यहां भी बड़े पैमाने पर कई धनाड्यों का अपहरण कर मोटी रकमें वसूली थीं। उस दौरान कई धनाड्य अपहरण के डर से अपना व्यापार नौकरों के हवाले छोड़ बरेली में घर बनवाकर रहने लगे थे। 
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पुलिस पर भारी था आतंकवाद का खौफ 
आतंकवादियों का खौफ इतना था कि उन दिनों पुलिसकर्मी गश्त के दौरान बिना वर्दी ही निकलते थे। पुलिस लाइन में रोजाना डाक ले जाने वाले पैरोकार भी थाने से निकलते ही अपनी वर्दी थैले में रख लेतेे थे और पुलिस लाइन पहुंचते ही उसे पुन: पहन लेते थे।
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अनहोनी की आशंका में जीते थे लोग   
आतंकवाद के दौरान क्षेत्रवासी अनहोनी की आशंका में दिन और रात गुजारते थे। इसके पीछे भी क्षेत्र में रोजाना कहीं न कहीं होने वाली घटनाएं होती थीं। दियोरिया से जंगल होकर घुंघचाई तक जाने वाला रोड पर तो कई कई दिन तक कोई राहगीर ही नहीं गुजरता था। आलम यह थी कि यदि बस में कोई चादर ओढ़े चढ़ जाता था तो कंडक्टर समेत अन्य यात्रियों की सांसें रुक जाती थीं। बताते हैं कि कंडक्टर उन्हें सीट मुहैय्या कराने के साथ ही उनसे किराया तक नहीं लेते थे। 
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