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माला जंगल में मिला भालू का सड़ा गला शव
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Mon, 22 Dec 2014 11:48 PM IST
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भालू का शव मिलने से विभाग में सनसनी फैल गई। वनविभाग ने शव जांच के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा है।
माला वनक्षेत्राधिकारी डीके सिंह ने सोमवार सुबह रेंज की गढ़ा प्रथम बीट में कंपार्टमेंट नंबर 133ए में करीब चार फिट गहरे गड्ढे में दबाया गया भालू का शव बरामद किया है। वनक्षेत्राधिकारी ने बताया कि शव करीब दो माह पुराना होने का अनुमान है। इसके कुछ नाखून, दांत एवं बालों के अवशेष और हड्डियां मिली हैं, जबकि मांस एवं पेट के अन्य भाग सड़ गल चुके हैं। भालू की उम्र का सही पता नहीं लग सका है लेकिन उसके व्यस्क होने का अनुमान है। भालू का शव मिलने के बाद दो तरह की चर्चा हो रही है। एक यह कि किसी शिकारी ने भालू का शिकार कर उसका मांस व कुछ जरूरी अंग लेने के बाद उसे मिट्टी में दबा दिया होगा। दूसरा यह कि भालू के शव को देख किसी वनकर्मी ने जांच व कार्रवाई से बचने के लिए उसे दफना दिया होगा। वनविभाग द्वारा भेजा गया भालू का क्षत विक्षत शव को पोस्टमार्टम/जांच के लिए आईवीआरआई बरेली पहुंच गया है, दो दिन बाद पोस्टमार्टम होगा।
इन सवालों का खोजना होगा जवाब
भालू का शव जमीन में दबा मिला है। इससे साफ है कि उसकी स्वभाविक मौत नहीं हुई। अगर यह भी मान लिया जाए कि उसकी स्वभाविक मौत हुई है तो उसे जंगल में जमीन में दबाने वाले कौन थे? उन्होंने ऐसा क्यों किया? यह भी खुद में सवाल है कि टाइगर रिजर्व में भालू की मौत हो जाती है और उसके शव को चार फिट गहरा गड्ढा खोद कर दबाया जाता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगती। विभाग इस घटना में भले ही कितनी भी लीपा पोती करे, लेकिन यह घटना टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों की सुरक्षा पर सलालिया निशान लगाने के लिए पर्याप्त है।
प्रथम दृष्टया भालू की हत्या किया जाना प्रतीत हो रहा है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद विभागीय लापरवाही सामने आने पर संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
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कैलाश प्र्रकाश, डीएफओ
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माला वनक्षेत्राधिकारी डीके सिंह ने सोमवार सुबह रेंज की गढ़ा प्रथम बीट में कंपार्टमेंट नंबर 133ए में करीब चार फिट गहरे गड्ढे में दबाया गया भालू का शव बरामद किया है। वनक्षेत्राधिकारी ने बताया कि शव करीब दो माह पुराना होने का अनुमान है। इसके कुछ नाखून, दांत एवं बालों के अवशेष और हड्डियां मिली हैं, जबकि मांस एवं पेट के अन्य भाग सड़ गल चुके हैं। भालू की उम्र का सही पता नहीं लग सका है लेकिन उसके व्यस्क होने का अनुमान है। भालू का शव मिलने के बाद दो तरह की चर्चा हो रही है। एक यह कि किसी शिकारी ने भालू का शिकार कर उसका मांस व कुछ जरूरी अंग लेने के बाद उसे मिट्टी में दबा दिया होगा। दूसरा यह कि भालू के शव को देख किसी वनकर्मी ने जांच व कार्रवाई से बचने के लिए उसे दफना दिया होगा। वनविभाग द्वारा भेजा गया भालू का क्षत विक्षत शव को पोस्टमार्टम/जांच के लिए आईवीआरआई बरेली पहुंच गया है, दो दिन बाद पोस्टमार्टम होगा।
इन सवालों का खोजना होगा जवाब
भालू का शव जमीन में दबा मिला है। इससे साफ है कि उसकी स्वभाविक मौत नहीं हुई। अगर यह भी मान लिया जाए कि उसकी स्वभाविक मौत हुई है तो उसे जंगल में जमीन में दबाने वाले कौन थे? उन्होंने ऐसा क्यों किया? यह भी खुद में सवाल है कि टाइगर रिजर्व में भालू की मौत हो जाती है और उसके शव को चार फिट गहरा गड्ढा खोद कर दबाया जाता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगती। विभाग इस घटना में भले ही कितनी भी लीपा पोती करे, लेकिन यह घटना टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों की सुरक्षा पर सलालिया निशान लगाने के लिए पर्याप्त है।
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प्रथम दृष्टया भालू की हत्या किया जाना प्रतीत हो रहा है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद विभागीय लापरवाही सामने आने पर संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
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कैलाश प्र्रकाश, डीएफओ