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48 घंटे बाद भी किशोरी से रेप के मामले में कार्रवाई नहीं
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Fri, 25 Nov 2016 10:50 PM IST
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घंटे बाद भी किशोरी से रेप के मामले में कार्रवाई नहीं
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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दलित किशोरी को अगवा करने के बाद बंधक बनाकर रेप करने के मामले में पुलिस कार्रवाई दो दिन बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी है। कोतवाल की वापसी का बहाना बनाकर पहले टालमटोल की गई, अब जांच के बाद कार्रवाई की बात कही जा रही है। यह बात दीगर रही कि मेडिकल परीक्षण दूसरे दिन भी पुलिस ने नहीं कराया है।
बरखेड़ा क्षेत्र के एक गांव के निवासी दलित ग्रामीण ने पुलिस को तहरीर दी थी कि 21 सितंबर को वह भतीजे की दवा लेने के लिए लखनऊ गया था। घर पर पत्नी और 15 वर्षीय पुत्री थी। रात करीब नौ बजे बेटी शौच जाने को घर से निकली। आरोप है कि गांव का एक युवक अपने साथी की मदद से मुंह दबाकर किशोरी को अपने घर ले गया। जिसके बाद रात भर बंधक बनाकर आरोपी ने रेप किया। 22 सितंबर की सुबह आरोपी ने धमकी देकर छोड़ दिया। मामले की तहरीर पुलिस को दी गई। इंस्पेक्टर के न होने से पुलिस ने पूरे मामले को टाल दिया। घटना को संदिग्ध तो बताया गया, लेकिन उसका सच सामने लाने के प्रयास नहीं किए गए। पुलिस ने न ही मेडिकल कराया न ही कोई जांच की। इधर, किशोरी का पिता पुलिस पर आरोपी की मदद करने का आरोप लगा रहा है। पुलिस ने बताया कि मामला संदिग्ध है। अफसरों को जानकारी दी गई है। जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मेडिकल परीक्षण न कराने का जवाब पुलिस के पास भी नहीं है।
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बरखेड़ा क्षेत्र के एक गांव के निवासी दलित ग्रामीण ने पुलिस को तहरीर दी थी कि 21 सितंबर को वह भतीजे की दवा लेने के लिए लखनऊ गया था। घर पर पत्नी और 15 वर्षीय पुत्री थी। रात करीब नौ बजे बेटी शौच जाने को घर से निकली। आरोप है कि गांव का एक युवक अपने साथी की मदद से मुंह दबाकर किशोरी को अपने घर ले गया। जिसके बाद रात भर बंधक बनाकर आरोपी ने रेप किया। 22 सितंबर की सुबह आरोपी ने धमकी देकर छोड़ दिया। मामले की तहरीर पुलिस को दी गई। इंस्पेक्टर के न होने से पुलिस ने पूरे मामले को टाल दिया। घटना को संदिग्ध तो बताया गया, लेकिन उसका सच सामने लाने के प्रयास नहीं किए गए। पुलिस ने न ही मेडिकल कराया न ही कोई जांच की। इधर, किशोरी का पिता पुलिस पर आरोपी की मदद करने का आरोप लगा रहा है। पुलिस ने बताया कि मामला संदिग्ध है। अफसरों को जानकारी दी गई है। जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मेडिकल परीक्षण न कराने का जवाब पुलिस के पास भी नहीं है।
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