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बर्खास्त रेल अफसर निकला गिरोह का सरगना
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Mon, 02 Apr 2018 08:28 PM IST
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पूरनपुर रेलखंड पर रविवार को दिनदहाड़े रेल पटरियां चोरी करने के आरोप में आरपीएफ के हत्थे चढ़े छह आरोपियों से सोमवार को असिस्टेंड कमांडेंट केसी मीना ने पूछताछ की। इसके बाद सभी का चालान कर दिया गया है। खास बात यह रही कि पकड़े गए इस गिरोह का सरगना बर्खास्त रेल अफसर निकला। उसी ने फर्जी मोहर व अभिलेखों के सहारे रेल पटरियों को आसानी से चोरी करने की योजना बनाई थी, जिनको आरपीएफ ने बरामद कर लिया है।
रविवार दोपहर को रेलवे जंक्शन से करीब डेढ़ किमी दूर पीलीभीत-पूरनपुर रेल मार्ग पर आरपीएफ के कार्यवाहक थानाध्यक्ष विपिन कुमार, एचसीपी ब्रहमानंद, सिपाही खुशविंदर सिंह, वीरेंद्र सिंह राना, वीरेंद्र सिंह ने छापामारी कर छह लोगों को पकड़ा था। मौके से दो ट्रेलर, एक क्रेन व एक कार बरामद किए थे। एक ट्रेलर में 25 रेल पटरी लदी हुई थीं। दिखाए गए कागजात संतोषजनक न होने पर आरपीएफ टीम सभी को पकड़कर थाने आ गई। यहां आरोपियों ने अपना नाम पवन बिहार कॉलोनी (बरेली) निवासी हरिदत्त शर्मा, अजय कुमार सैनी (मैलानी), संजय कुमार, राजू यादव, कमलेश और निजाम़ुद्दीन बताया। आरपीएफ के अनुसार आरोपी हरिदत्त शर्मा बर्खास्त सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेल पथ) है। पूछताछ में पहले तो आरोपी पटरी चोरी करने की बात से इंकार करते हुए टीम को गुमराह करते रहे, लेकिन सख्ती करने पर ज्यादा देर तक झूठ नहीं टिक सका। आरोपियों की ओर से दिखाए जा रहे कागजात की जांच की गई, तो सभी फर्जी निकले। इसके अलावा कई रेल विभाग से जुड़ी कई अन्य फर्जी मोहर व कागजात भी बरामद किए जा सके। जिसके बाद पूरा मामला खुलता चला गया। इसकी सूचना पर असिस्टेंड कमांडर भी पीलीभीत आए और आरोपियों से पूछताछ की। जिसमें सामने आया कि रेल पटरी को चोरी करने की योजना हरिदत्त शर्मा ने बनाई है। आरपीएफ थानाध्यक्ष प्रणय कुमार ने बताया कि रेलवे विकास निगम लिमिटेड के अंजनी कुमार तिवारी से मिली तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पूछताछ के बाद सभी आरोपियों का चालान कर दिया गया है।
ई-मेल भेज मंगाए गए थे ट्रेलर
गिरोह के सरगना हरिदत्त शर्मा ने घटना को अंजाम देने के लिए पहले क्रेन मालिक को कॉल कर एक क्रेन की डिमांड की। उसके कहे अनुसार कार्रवाई कर क्रेन की व्यवस्था कर ली गई। इसके बाद लखनऊ की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी को ई-मेल भेजकर दो ट्रेलर भी मंगवा लिए।
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बचने को बना रखे थे फर्जी अभिलेख
दिनदहाड़े चोरी करने के दौरान आरपीएफ उन तक पहुंच सकती है, इसका आरोपियों को पहले से आभास था। शायद यही वजह रही कि उन्होंने अपना बचाव करने और आरपीएफ को गुमराह करने के लिए फर्जी मोहर व हस्ताक्षर कर कुछ अभिलेख बना लिए थे। रविवार को आरपीएफ के पहुंचने पर इन्हीं अभिलेखों को दिखाया भी गया था।
...तो लग जाता 40 लाख का चूना
आरपीएफ की ओर से की गई धरपकड़ से रेलवे को 40 लाख रुपये का चूना लगने से बच गया। पकड़े गए आरोपियों के पास से दो रसीदें मिली हैं। यह जालसाजी कर बनाई गई थीं। इन रसीदों में एक पर 40 रेल पटरी व दूसरे में 60 रेल पटरी ले जाने की अनुमति दर्शाई गई थी। वह 25 रेल पटरियों को ट्रेलर में लाद भी चुके थे। इनकी कीमत करीब 10.50 लाख बताई जा रही है।
आखिर कहां पहुंचाई जानी थीं रेल पटरियां
पटरियों को चोरी करने के बाद क्या किया जाना था। गिरोह के तार आखिर कहां तक जुड़े हुए हैं। यह स्पष्ट है कि रेल पटरियों को आसानी से बेचा नहीं जा सकता। कोई कबाड़ी भी जल्दी इनकी खरीद फरोख्त नहीं करेगा। ऐसे में किसी बड़े ठेकेदार या फिर उद्योग से जुड़े लोगों को सप्लाई होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसका जवाब नहीं मिल सका है। इसको लेकर आरपीएफ का अपना तर्क है। वहीं सूत्रों की मानें तो जवाब न मिलने के पीछे मुख्य आरोपी हरिदत्त के हार्ट पेशेंट होना भी अहम वजह रहा। आरपीएफ अफसरों ने इस बिंदु पर जानना चाहा, लेकिन बीमारी को देखते हुए फजीहत से बचने को अधिक सख्ती नहीं दिखाई।
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रविवार दोपहर को रेलवे जंक्शन से करीब डेढ़ किमी दूर पीलीभीत-पूरनपुर रेल मार्ग पर आरपीएफ के कार्यवाहक थानाध्यक्ष विपिन कुमार, एचसीपी ब्रहमानंद, सिपाही खुशविंदर सिंह, वीरेंद्र सिंह राना, वीरेंद्र सिंह ने छापामारी कर छह लोगों को पकड़ा था। मौके से दो ट्रेलर, एक क्रेन व एक कार बरामद किए थे। एक ट्रेलर में 25 रेल पटरी लदी हुई थीं। दिखाए गए कागजात संतोषजनक न होने पर आरपीएफ टीम सभी को पकड़कर थाने आ गई। यहां आरोपियों ने अपना नाम पवन बिहार कॉलोनी (बरेली) निवासी हरिदत्त शर्मा, अजय कुमार सैनी (मैलानी), संजय कुमार, राजू यादव, कमलेश और निजाम़ुद्दीन बताया। आरपीएफ के अनुसार आरोपी हरिदत्त शर्मा बर्खास्त सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेल पथ) है। पूछताछ में पहले तो आरोपी पटरी चोरी करने की बात से इंकार करते हुए टीम को गुमराह करते रहे, लेकिन सख्ती करने पर ज्यादा देर तक झूठ नहीं टिक सका। आरोपियों की ओर से दिखाए जा रहे कागजात की जांच की गई, तो सभी फर्जी निकले। इसके अलावा कई रेल विभाग से जुड़ी कई अन्य फर्जी मोहर व कागजात भी बरामद किए जा सके। जिसके बाद पूरा मामला खुलता चला गया। इसकी सूचना पर असिस्टेंड कमांडर भी पीलीभीत आए और आरोपियों से पूछताछ की। जिसमें सामने आया कि रेल पटरी को चोरी करने की योजना हरिदत्त शर्मा ने बनाई है। आरपीएफ थानाध्यक्ष प्रणय कुमार ने बताया कि रेलवे विकास निगम लिमिटेड के अंजनी कुमार तिवारी से मिली तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पूछताछ के बाद सभी आरोपियों का चालान कर दिया गया है।
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ई-मेल भेज मंगाए गए थे ट्रेलर
गिरोह के सरगना हरिदत्त शर्मा ने घटना को अंजाम देने के लिए पहले क्रेन मालिक को कॉल कर एक क्रेन की डिमांड की। उसके कहे अनुसार कार्रवाई कर क्रेन की व्यवस्था कर ली गई। इसके बाद लखनऊ की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी को ई-मेल भेजकर दो ट्रेलर भी मंगवा लिए।
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बचने को बना रखे थे फर्जी अभिलेख
दिनदहाड़े चोरी करने के दौरान आरपीएफ उन तक पहुंच सकती है, इसका आरोपियों को पहले से आभास था। शायद यही वजह रही कि उन्होंने अपना बचाव करने और आरपीएफ को गुमराह करने के लिए फर्जी मोहर व हस्ताक्षर कर कुछ अभिलेख बना लिए थे। रविवार को आरपीएफ के पहुंचने पर इन्हीं अभिलेखों को दिखाया भी गया था।
...तो लग जाता 40 लाख का चूना
आरपीएफ की ओर से की गई धरपकड़ से रेलवे को 40 लाख रुपये का चूना लगने से बच गया। पकड़े गए आरोपियों के पास से दो रसीदें मिली हैं। यह जालसाजी कर बनाई गई थीं। इन रसीदों में एक पर 40 रेल पटरी व दूसरे में 60 रेल पटरी ले जाने की अनुमति दर्शाई गई थी। वह 25 रेल पटरियों को ट्रेलर में लाद भी चुके थे। इनकी कीमत करीब 10.50 लाख बताई जा रही है।
आखिर कहां पहुंचाई जानी थीं रेल पटरियां
पटरियों को चोरी करने के बाद क्या किया जाना था। गिरोह के तार आखिर कहां तक जुड़े हुए हैं। यह स्पष्ट है कि रेल पटरियों को आसानी से बेचा नहीं जा सकता। कोई कबाड़ी भी जल्दी इनकी खरीद फरोख्त नहीं करेगा। ऐसे में किसी बड़े ठेकेदार या फिर उद्योग से जुड़े लोगों को सप्लाई होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसका जवाब नहीं मिल सका है। इसको लेकर आरपीएफ का अपना तर्क है। वहीं सूत्रों की मानें तो जवाब न मिलने के पीछे मुख्य आरोपी हरिदत्त के हार्ट पेशेंट होना भी अहम वजह रहा। आरपीएफ अफसरों ने इस बिंदु पर जानना चाहा, लेकिन बीमारी को देखते हुए फजीहत से बचने को अधिक सख्ती नहीं दिखाई।