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डकैती के बाद परिवार से पुलिसिया बकैती, एसपी तलब
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बिलसंडा (पीलीभीत)। सत्रह साल पहले बिलसंडा क्षेत्र में हुई डकैती के मामले में तत्कालीन पुलिसकर्मियों द्वारा पीड़ित से अभद्रता और बेवजह उनका चालान करने के मामले में हाईकोर्ट ने एसपी पीलीभीत को तलब किया है। जिसके बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है। एसपी ने हाईकोर्ट में पेशी से पूर्व मामले की गहनता से जानकारी जुटाने के लिए बिलसंडा पहुंचकर पीड़ित दंपती से बातचीत की और उनके बयान लिए। इस दौरान पुलिस विभाग में खलबली मची रही।
बिलसंडा थाना क्षेत्र के मुड़िया बिलहरा निवासी मुन्नी देवी पत्नी शंभूदयाल के घर वर्ष 2002 में डकैती पड़ी थी। इसकी पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने मामले में धाराओं का खेल करते हुए चोरी में दर्ज कर लिया था। उसमें भी कोई खुलासा नहीं हुआ। इसका जब पीड़ित पक्ष की ओर से ऐतराज जताते हुए अधिकारियों से शिकायत की गई तो 29 अप्रैल 2004 को तत्कालीन दरोगा वीरेंद्र शर्मा, सिपाही प्रमोद कुमार ने उनके घर आकर अभद्रता की। पिता शंभूदयाल को हिरासत में लेकर थाने ले गए और सरकारी कार्य में बाधा और आर्म्स एक्ट की धारा में पिता शंभूदयाल और बेटे सुशील पर मुकदमा दर्ज कर चालान कर दिया। खुद के साथ हुए इस कृत्य को लेकर दंपती ने कोर्ट के आदेश पर दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ तीन अगस्त 2004 में मुकदमा दर्ज करा दिया। इसकी कई बार विवेचना हुई, लेकिन हर बार पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर दबा दिया। पुलिस की पांच बार लगाई गई फाइनल रिपोर्ट को पीड़ित पक्ष ने जून 2019 में चुनौती दी। इस मामले को दंपती का बेटा सुशील हाईकोर्ट तक खींच ले गया। हाईकोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई को लेकर एसपी पीलीभीत को तलब किया गया है। जिसके बाद सालों पुराने मसले पर खलबली मच गई। बृहस्पतिवार सुबह जनसुनवाई करने के बाद एसपी मनोज कुमार सोनकर, सीओ सदर योगेंद्र कुमार के साथ बिलसंडा पहुंचे और पूरे मामले को जाना। उन्होंने दंपती को बुलाकर भी विस्तार से जानकारी जुटाई। इसके बाद वह वापस हो गए।
मामला चूंकि से जुड़ा है इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। वैसे भी इस प्रकरण की जानकारी नहीं हैं।
मनोज कुमार सोनकर, एसपी
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बिलसंडा थाना क्षेत्र के मुड़िया बिलहरा निवासी मुन्नी देवी पत्नी शंभूदयाल के घर वर्ष 2002 में डकैती पड़ी थी। इसकी पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने मामले में धाराओं का खेल करते हुए चोरी में दर्ज कर लिया था। उसमें भी कोई खुलासा नहीं हुआ। इसका जब पीड़ित पक्ष की ओर से ऐतराज जताते हुए अधिकारियों से शिकायत की गई तो 29 अप्रैल 2004 को तत्कालीन दरोगा वीरेंद्र शर्मा, सिपाही प्रमोद कुमार ने उनके घर आकर अभद्रता की। पिता शंभूदयाल को हिरासत में लेकर थाने ले गए और सरकारी कार्य में बाधा और आर्म्स एक्ट की धारा में पिता शंभूदयाल और बेटे सुशील पर मुकदमा दर्ज कर चालान कर दिया। खुद के साथ हुए इस कृत्य को लेकर दंपती ने कोर्ट के आदेश पर दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ तीन अगस्त 2004 में मुकदमा दर्ज करा दिया। इसकी कई बार विवेचना हुई, लेकिन हर बार पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर दबा दिया। पुलिस की पांच बार लगाई गई फाइनल रिपोर्ट को पीड़ित पक्ष ने जून 2019 में चुनौती दी। इस मामले को दंपती का बेटा सुशील हाईकोर्ट तक खींच ले गया। हाईकोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई को लेकर एसपी पीलीभीत को तलब किया गया है। जिसके बाद सालों पुराने मसले पर खलबली मच गई। बृहस्पतिवार सुबह जनसुनवाई करने के बाद एसपी मनोज कुमार सोनकर, सीओ सदर योगेंद्र कुमार के साथ बिलसंडा पहुंचे और पूरे मामले को जाना। उन्होंने दंपती को बुलाकर भी विस्तार से जानकारी जुटाई। इसके बाद वह वापस हो गए।
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मामला चूंकि से जुड़ा है इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। वैसे भी इस प्रकरण की जानकारी नहीं हैं।
मनोज कुमार सोनकर, एसपी