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पुराने ड्रमों को काटकर बनाया कूड़ेदान, कीमत बताई 55 सौ
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पीलीभीत। जिले में कूड़ेदान खरीद को लेकर फिर से फाइलों के खुलने के बाद अब माहौल गरमा गया है। पिछले दिनों कूड़ेदान खरीद में घोटाले को लेकर जिला काफी सुर्खियों में रहा था। अब इस मामले में डीएम वैभव श्रीवास्तव ने सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने पूरे जिले में कूड़ेदान खरीद की जांच के लिए प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर टीम गठित की है। ऐसे में फाइलों के फिर से खुलने के बाद तमाम तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है, वहीं कई अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। कोई जनप्रतिनिधि तो कोई शासन स्तर से पैरवी कराने की जुगत में लग गया है।
बता दें, करीब सात माह पूर्व में जिले में कूड़ेदान खरीद में घोटाला सामने आया था। जिले की ग्राम पंचायतों में करीब दस हजार कूड़दानों की खरीद की गई थी। तत्कालीन सीडीओ की जांच में मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत कैच में 1800 कीमत वाले कूड़ेदान की खरीद 5500 रुपये में पाई गई। इसके बाद जिलेभर में रखे गए हजारों कूड़ेदान में लाखों का खेल उजागर होने का पता चला। यह कूड़े दान पुराने ड्रमों को काटकर बनाए गए थे। यानी एक ड्रम में दो कूड़ेदान बने। प्रशासन ने जांच में पाया कि इस तरह के कूड़े दान का एक सेट बनाने में लागत 18 सौ रुपये से भी कम आई थी, जबकि भुगतान 55 सौ रुपये लिया गया। तत्कालीन डीएम ने इस मामले में प्रधान और सचिवों को नोटिस जारी कर कूड़ेदानों की डिटेल मांगी। खासबात यह रही कि उस वक्त जिले का दौरा करने पहुुंचे प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी ने भी आरोपियों पर शिकंजा कसने का दावा किया था। इसके बाद कूड़ेदानों की खरीद पर रोक लगा दी गई थी। अब फिर से एक बार कूड़ेदान घोटाले का जिन्न फाइलों से निकल आया है। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें डीसी मनरेगा, अधिशासी अभियांता जल निगम और वरिष्ठ कोषाधिकारी शामिल हैं। इनकी देखरेख में ब्लॉक स्तर पर गठित टीम के सदस्य जांच करेंगे। डीएम द्वारा इस प्रकरण को पुन: जांच के लिए खोले जाने की खबर से संबंधित विभागीय अधिकारियों में खलबली मची हुई है। इस जांच में संबंधित फर्म विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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बता दें, करीब सात माह पूर्व में जिले में कूड़ेदान खरीद में घोटाला सामने आया था। जिले की ग्राम पंचायतों में करीब दस हजार कूड़दानों की खरीद की गई थी। तत्कालीन सीडीओ की जांच में मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत कैच में 1800 कीमत वाले कूड़ेदान की खरीद 5500 रुपये में पाई गई। इसके बाद जिलेभर में रखे गए हजारों कूड़ेदान में लाखों का खेल उजागर होने का पता चला। यह कूड़े दान पुराने ड्रमों को काटकर बनाए गए थे। यानी एक ड्रम में दो कूड़ेदान बने। प्रशासन ने जांच में पाया कि इस तरह के कूड़े दान का एक सेट बनाने में लागत 18 सौ रुपये से भी कम आई थी, जबकि भुगतान 55 सौ रुपये लिया गया। तत्कालीन डीएम ने इस मामले में प्रधान और सचिवों को नोटिस जारी कर कूड़ेदानों की डिटेल मांगी। खासबात यह रही कि उस वक्त जिले का दौरा करने पहुुंचे प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी ने भी आरोपियों पर शिकंजा कसने का दावा किया था। इसके बाद कूड़ेदानों की खरीद पर रोक लगा दी गई थी। अब फिर से एक बार कूड़ेदान घोटाले का जिन्न फाइलों से निकल आया है। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें डीसी मनरेगा, अधिशासी अभियांता जल निगम और वरिष्ठ कोषाधिकारी शामिल हैं। इनकी देखरेख में ब्लॉक स्तर पर गठित टीम के सदस्य जांच करेंगे। डीएम द्वारा इस प्रकरण को पुन: जांच के लिए खोले जाने की खबर से संबंधित विभागीय अधिकारियों में खलबली मची हुई है। इस जांच में संबंधित फर्म विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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