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धोखाधड़ी, जानलेवा हमले में फंसे बीसलपुर पालिकाध्यक्ष, एफआईआर
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बीसलपुर। एएसपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने बीसलपुर पालिकाध्यक्ष धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और जानलेवा हमले के गंभीर मामले में फंस गये हैं। एएसपी के आदेश पर कोतवाली में पालिकाध्यक्ष और उनके दो आरोपी बेटों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज भी कर ली गई है। मोहल्ला ग्यासपुर के नबी हसन ने तहरीर में बताया कि बीसलपुर पालिकाध्यक्ष नूर अहमद अंसारी और उनके पुत्रों नबीहसन, शहनवाज उर्फ निक्की ने पालिका परिषद द्वारा संचालित एसआरएम इंटर कालेज में लिपिक पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर 12 फरवरी 2018 को अपने घर बुलाकर उससे चार लाख रुपये लिये थे। चेयरमैन ने कुछ दिन तक कॉलेज में तैनाती होने की बात कहकर उससे काम भी कराया। बाद में कंप्यूटर कक्ष में तैनात कर दिया। वहां से भी कुछ दिन तक काम कराने के बाद हटा दिया। काफी दिन तक काम करने के बाद भी जब वेतन नहीं मिला तो ंजालसाजी की जानकारी हुई। नौकरी लगवाने के नाम पर दिए गए चार लाख रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने 2 जनवरी 2019 को उसे चार लाख रुपये का चेक दे भी दिया। लेकिन बैंक में चेक पर जारीकर्ता के हस्ताक्षरों का मिलान नहीं होने पर भुगतान नहीं हो पाया। इस पर जब आरोपियों के घर जाकर रुपये लौटाने को कहा तो तीनों बाप बेटों ने एकराय होकर उस पर जानलेवा हमला कर दिया। 10 जनवरी को आरोपी पीड़ित के घर आए और गला दबाकर जान लेने की कोशिश की। एसएसआई ने बताया कि एएसपी के निर्देश पर रविवार को पालिकाध्यक्ष नूर अहमद और उनके दो बेटों नबी हसन, शहनवाज उर्फ निक्की के विरु द्ध धोखाधड़ी, जालसाजी, अमानत में खयानत और घर में घुसकर जानलेवा हमला करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
राजनीतिक दबाव में लिखाई गई है एफआईआर
मेरे और मेरे दो बेटों के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में झूठे आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर राजनैतिक दवाब में दर्ज कराई गई है। जिस मामले की रिपोर्ट लिखाई गई है, इससे जुड़ा एक मामला पहले से ही कोर्ट में विचाराधीन है। उस केस की 17 जून को पेशी है। सवाल ये है कि कोर्ट में विचाराधीन मामले में नई एफआईआर लिखाने का क्या औचित्य है। यह मेरी छवि बिगाड़ने की ओछी चाल है। - नूर अहमद अँसारी, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद बीसलपुर
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राजनीतिक दबाव में लिखाई गई है एफआईआर
मेरे और मेरे दो बेटों के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट में झूठे आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर राजनैतिक दवाब में दर्ज कराई गई है। जिस मामले की रिपोर्ट लिखाई गई है, इससे जुड़ा एक मामला पहले से ही कोर्ट में विचाराधीन है। उस केस की 17 जून को पेशी है। सवाल ये है कि कोर्ट में विचाराधीन मामले में नई एफआईआर लिखाने का क्या औचित्य है। यह मेरी छवि बिगाड़ने की ओछी चाल है। - नूर अहमद अँसारी, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद बीसलपुर
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