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मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट
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पीलीभीत। ईट भट्टे की जगह पर गड्ढे में भरे बरसाती पानी में नहाते वक्त डूबकर चार बच्चों की मौत के मामले में आठ माह बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट तलब की है। हादसे के पीछे वजह क्या रही? किस तरह से कार्रवाई की गई और अफसरों की जांच में क्या तथ्य निकलकर सामने आए? इसके अलावा कई अन्य बिंदुओं पर ब्योरा तलब किया है।
हादसा सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के बरहा गांव में 15 अगस्त 2018 की दोपहर को हुआ था। गांव स्थित एक भट्ठे की जमीन पर मिट्टी निकालने के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे बरसाती पानी में नहाने गए थे। इस दौरान चार बच्चे 12 वर्षीय मनोज पुत्र टीकाराम, अजय पुत्र केदारनाथ, 10 वर्षीय जीतू पुत्र पुत्तूलाल और आठ वर्षीय प्रदीप पुत्र घनश्याम की डूबने से मौत हो गई थी। बच्चों के काफी देर बाद भी घर न पहुंचने पर जब परिजनों ने तलाशा, तो एक-एक कर चारों के शव मिले थे। एक साथ चार बच्चों की मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया था। परिवार वालों ने मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की थी। हालांकि तत्कालीन एसपी बालेंदु भूषण सिंह ने परिजनों को समझा बुझाकर पोस्टमार्टम के लिए राजी किया था। जिसके बाद चारों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया था। अब आठ माह बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस पूरे मामले में जिले के अफसरों को पत्र भेजकर रिपोर्ट तलब की है। पत्र मिलने के बाद अब पुलिस और प्रशासनिक अफसर रिपोर्ट तैयार कराने में जुट गए हैं।
बच्चों की मौत के मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। इसमें मानवाधिकार आयोग से रिपोर्ट मांगी गई है। जिसका पत्र प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मिला है। इस पर रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। - धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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हादसा सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के बरहा गांव में 15 अगस्त 2018 की दोपहर को हुआ था। गांव स्थित एक भट्ठे की जमीन पर मिट्टी निकालने के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे बरसाती पानी में नहाने गए थे। इस दौरान चार बच्चे 12 वर्षीय मनोज पुत्र टीकाराम, अजय पुत्र केदारनाथ, 10 वर्षीय जीतू पुत्र पुत्तूलाल और आठ वर्षीय प्रदीप पुत्र घनश्याम की डूबने से मौत हो गई थी। बच्चों के काफी देर बाद भी घर न पहुंचने पर जब परिजनों ने तलाशा, तो एक-एक कर चारों के शव मिले थे। एक साथ चार बच्चों की मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया था। परिवार वालों ने मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की थी। हालांकि तत्कालीन एसपी बालेंदु भूषण सिंह ने परिजनों को समझा बुझाकर पोस्टमार्टम के लिए राजी किया था। जिसके बाद चारों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया था। अब आठ माह बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस पूरे मामले में जिले के अफसरों को पत्र भेजकर रिपोर्ट तलब की है। पत्र मिलने के बाद अब पुलिस और प्रशासनिक अफसर रिपोर्ट तैयार कराने में जुट गए हैं।
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बच्चों की मौत के मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। इसमें मानवाधिकार आयोग से रिपोर्ट मांगी गई है। जिसका पत्र प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मिला है। इस पर रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। - धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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