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पिछले साल 41 पेड़ों का हुआ था अवैध कटान
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पीलीभीत। पीटीआर की कई रेंज अवैध कटान के मामले में हमेशा सुर्खियों में रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान पांच वन रेंजों में 41 पेड़ों का अवैध कटान पाया गया। इन मामलों में विभागीय केस दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा गया था। गौरतलब यह है कि अधिकतर मामलों में कार्रवाई छोटे कर्मचारियों पर की गई, जबकि अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में कामयाब रहे।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह पांच रेंजों में बंटा हुआ है। जनपद के जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद अवैध कटान पर अंकुश लगा है। मगर मिलीभगत के चलते कई रेंजों में बेशकीमती पेड़ों का कटान जारी है। लकड़ी तस्कर कोई न कोई जुगत लगाकर पीटीआर में अवैध तरीके से प्रवेश कर कटान की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जबकि नियमित गश्त की जाती है।
अवैध कटान के मामले में हरीपुर, बराही, महोफ, दियूरिया खासी सुर्खियों में रहती है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के आंकड़ों पर नजर डालें तो सभी रेंजों में मात्र 41 अवैध पेड़ कटान की घटनाएं प्रकाश में आई थी। इन सभी मामलों में विभागीय केस दर्ज करने के बाद करीब 13 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मगर कार्रवाई के नाम पर पूरे साल भर में मात्र एक बीट प्रभारी और एक सेक्शन प्रभारी को आरोपपत्र दिया गया।
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एक रेंज में मिली थी आरा मशीन
पीटीआर में नियमित गश्त की पोल गत वर्ष उस समय खुल गई थी, जब एक रेंज में पेड़ों के अवैध कटान के लिए लाई गई छोटी आरा मशीन और एक डीसीएम पकड़ी गई थी। इस पूरे मामले में वन अफसर कई दिन तक जांच की बात कहकर चुप्पी साधे रहे। बाद में जब दबाव पड़ा तो तीन पेड़ों का अवैध कटान और एक आरोपी के खिलाफ विभागीय केस काटकर मामला रफा दफा कर दिया गया। फिलहाल अब पीटीआर में अवैध कटान को लेकर शासन की ओर से एसआईटी जांच कराने की बात कही जा रही है।
एसआईटी जांच की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से हुई है। फिलहाल इसको लेकर अभी तक कोई विभागीय पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पीटीआर प्रशासन वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा संवेदनशील है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह पांच रेंजों में बंटा हुआ है। जनपद के जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद अवैध कटान पर अंकुश लगा है। मगर मिलीभगत के चलते कई रेंजों में बेशकीमती पेड़ों का कटान जारी है। लकड़ी तस्कर कोई न कोई जुगत लगाकर पीटीआर में अवैध तरीके से प्रवेश कर कटान की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जबकि नियमित गश्त की जाती है।
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अवैध कटान के मामले में हरीपुर, बराही, महोफ, दियूरिया खासी सुर्खियों में रहती है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के आंकड़ों पर नजर डालें तो सभी रेंजों में मात्र 41 अवैध पेड़ कटान की घटनाएं प्रकाश में आई थी। इन सभी मामलों में विभागीय केस दर्ज करने के बाद करीब 13 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मगर कार्रवाई के नाम पर पूरे साल भर में मात्र एक बीट प्रभारी और एक सेक्शन प्रभारी को आरोपपत्र दिया गया।
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एक रेंज में मिली थी आरा मशीन
पीटीआर में नियमित गश्त की पोल गत वर्ष उस समय खुल गई थी, जब एक रेंज में पेड़ों के अवैध कटान के लिए लाई गई छोटी आरा मशीन और एक डीसीएम पकड़ी गई थी। इस पूरे मामले में वन अफसर कई दिन तक जांच की बात कहकर चुप्पी साधे रहे। बाद में जब दबाव पड़ा तो तीन पेड़ों का अवैध कटान और एक आरोपी के खिलाफ विभागीय केस काटकर मामला रफा दफा कर दिया गया। फिलहाल अब पीटीआर में अवैध कटान को लेकर शासन की ओर से एसआईटी जांच कराने की बात कही जा रही है।
एसआईटी जांच की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से हुई है। फिलहाल इसको लेकर अभी तक कोई विभागीय पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पीटीआर प्रशासन वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा संवेदनशील है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व